2006 में सूरत में आई भीषण बाढ़ ने डायमंड सिटी की रफ्तार रोक दी थी। 🌊 शहर का बड़ा हिस्सा 10-15 फीट पानी में डूब गया और हीरा कारोबार को करीब 1800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने 2006 में गुजरात के सूरत में आई उस विनाशकारी बाढ़ की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के हीरा कारोबार को हिलाकर रख दिया था। दुनिया की डायमंड सिटी के तौर पर पहचाने जाने वाले सूरत में कुछ ही घंटों में हालात इतने बिगड़ गए थे कि शहर का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया था।
कैसे आई थी सूरत में इतनी भयानक बाढ़….?
साल 2006 में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में लगातार भारी बारिश हुई थी। इसका असर तापी नदी के जलस्तर पर भी पड़ा और उकाई बांध में तेजी से पानी भरने लगा। बांध पर दबाव बढ़ने के बाद उसे सुरक्षित रखने के लिए करीब 10 से 11 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसी दौरान समुद्र में हाई टाइड की स्थिति थी। समुद्र में पानी का बहाव सामान्य तरीके से नहीं जा सका और तापी नदी का पानी सूरत की ओर फैल गया। कुछ ही समय में शहर के बड़े हिस्से में पानी भर गया। कई इलाकों में पानी की गहराई 10 से 15 फीट तक पहुंच गई थी। सड़कों, घरों, बाजारों और औद्योगिक इलाकों में पानी और कीचड़ फैल गया।
डायमंड हब में तबाही का मंजर….
सूरत का हीरा उद्योग इस बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल था। कतारगाम, वराछा और महिधरपुरा जैसे इलाके हीरा कटिंग और पॉलिशिंग के बड़े केंद्र थे। बाढ़ के पानी ने बड़ी संख्या में कारखानों को अपनी चपेट में ले लिया। कई यूनिट्स के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर में पानी घुस गया। महंगी मशीनें, कंप्यूटर और डायमंड प्रोसेसिंग से जुड़ा उपकरण पानी और कीचड़ में खराब हो गया। कई छोटे कारोबारियों के लिए यह नुकसान बेहद बड़ा था, क्योंकि उनके पास नुकसान से उबरने के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन या बीमा की सुविधा नहीं थी।
कीचड़ में तलाशे गए हीरे…..
बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। कई जगहों पर कीचड़ और गाद जमा हो गई थी। कुछ कारोबारियों और कर्मचारियों को इसी कीचड़ में हीरों और दूसरी कीमती चीजों की तलाश करनी पड़ी। कारखानों में रखे कच्चे और तराशे हुए हीरों को लेकर भी भारी नुकसान की खबरें सामने आई थीं। बाढ़ ने उस समय सूरत के हजारों कारोबारियों और लाखों लोगों की आजीविका को प्रभावित किया।
हीरा कारोबार को हुआ करीब 1800 करोड़ का नुकसान…..
उस समय सूरत का डायमंड उद्योग प्रतिदिन बड़े स्तर पर कारोबार करता था। बाढ़ के कारण करीब 20 से 25 दिनों तक कारोबार बुरी तरह प्रभावित रहा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सिर्फ हीरा उद्योग को लगभग 1800 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ था। इसके अलावा शहर को कुल मिलाकर हजारों करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति झेलनी पड़ी थी। बाढ़ का असर सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रहा। सूरत का हीरा कारोबार अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जुड़ा हुआ था, इसलिए उत्पादन रुकने का असर विदेशी ग्राहकों और निर्यात पर भी पड़ा।
लाखों कारीगरों पर पड़ा सीधा असर…..
सूरत का हीरा उद्योग बड़ी संख्या में कारीगरों और कर्मचारियों को रोजगार देता है। बाढ़ के दौरान कारखाने बंद होने और घरों में पानी भरने से बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। छोटे कारखानों के सामने स्थिति और मुश्किल थी। मशीनों और कच्चे माल के नुकसान के साथ कारोबार बंद होने से कई लोगों पर कर्ज का बोझ भी बढ़ गया।
पानी उतरते ही शुरू हुई वापसी की कोशिश…..
2006 की बाढ़ ने सूरत को भारी आर्थिक चोट पहुंचाई, लेकिन शहर के कारोबारियों और कारीगरों ने जल्द ही वापसी की कोशिश शुरू कर दी। पानी उतरने के बाद सफाई, मशीनों की मरम्मत और कारखानों को दोबारा शुरू करने का काम तेज हुआ। कारोबारियों और कारीगरों ने लंबे समय तक काम करके उत्पादन को सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश की। धीरे-धीरे सूरत का डायमंड कारोबार फिर पटरी पर आया और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी।
सूरत की कहानी बताती है कि आपदा के बाद वापसी कैसे होती है…..
2006 की सूरत बाढ़ शहर के लिए एक बड़ी प्राकृतिक और आर्थिक आपदा थी। इसने दिखाया कि किसी प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ लोगों के घरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उद्योग, रोजगार और पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद सूरत ने जिस तरह इस संकट के बाद दोबारा अपने कारोबार को खड़ा किया, वह शहर की कारोबारी क्षमता और लोगों के हौसले की मिसाल बन गया। आज नेपाल की बाढ़ की तस्वीरें देखकर 2006 की सूरत त्रासदी एक बार फिर चर्चा में है।
