🚨 Instagram पर आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर Meta की मुश्किलें बढ़ीं! NCPCR के साथ Meta अधिकारियों की बैठक हुई। बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट और पेड विज्ञापनों को लेकर जांच जारी है। 📱⚠️

Instagram पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट (CSAM) को लेकर Meta की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस मामले में Meta के वरिष्ठ अधिकारियों ने 9 सितंबर को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अधिकारियों से मुलाकात की। करीब एक घंटे चली इस बैठक में Meta India के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, कंपनी के MD और Head मौजूद नहीं थे। मामला Instagram पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट और उससे संबंधित पेड विज्ञापनों को लेकर है। NCPCR ने एक रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए 3 जुलाई को Meta Platforms Inc. को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। Meta ने करीब एक सप्ताह बाद आयोग को अपना जवाब दिया, जिसके बाद NCPCR ने मामले की औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया।
NCPCR ने Meta से मांगा जवाब…..
आयोग की कार्रवाई उस रिपोर्ट के बाद शुरू हुई, जिसमें Instagram पर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। NCPCR ने Meta से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा और प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट की मौजूदगी तथा उससे जुड़े विज्ञापनों को लेकर जवाब तलब किया। जांच के तहत NCPCR ने 8 सितंबर को Meta India के प्रबंध निदेशक और प्रमुख को भी तलब किया था। इसके अगले दिन Meta के वरिष्ठ अधिकारियों ने आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक की।
सरकार भी कर चुकी है कड़ी कार्रवाई की चेतावनी…..
यह मामला सिर्फ NCPCR तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), संसद की IT से जुड़ी समिति और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) समेत कई सरकारी संस्थाएं इस मुद्दे पर कार्रवाई कर रही हैं। जुलाई में सरकार ने Instagram पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री वाले पेड विज्ञापनों को लेकर Meta को कड़ी चेतावनी दी थी। मंत्रालय ने Instagram से ऐसी सामग्री और उसे बढ़ावा देने या उस तक पहुंच आसान बनाने वाले विज्ञापनों को हटाने का निर्देश दिया था। साथ ही Meta से इस पूरे मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।
Algorithm को लेकर भी उठे सवाल…..
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब एक मीडिया रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि Meta का Algorithm ऐसे वीडियो को बढ़ावा दे रहा था, जिनमें बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री मौजूद थी। अब NCPCR की औपचारिक जांच और सरकारी एजेंसियों की सक्रियता के बीच Meta से यह स्पष्ट करने की अपेक्षा है कि Instagram पर इस तरह की सामग्री और विज्ञापनों को रोकने के लिए उसके सिस्टम कितने प्रभावी हैं। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था और उनकी जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
