Airport Rules: एयरपोर्ट चार्जेस और नियमों में होगा बड़ा बदलाव? जानिए यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा....

हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले समय में बड़ी राहत मिल सकती है। केंद्र सरकार एयरपोर्ट पर लगने वाले विभिन्न शुल्कों और जटिल प्रक्रियाओं में सुधार की दिशा में काम कर रही है। नीति आयोग की एक समिति ने एयरपोर्ट टैरिफ सिस्टम को सरल बनाने और कई नियमों में बदलाव की सिफारिश की है। यदि इन सुझावों को मंजूरी मिलती है, तो यात्रियों के साथ-साथ एयरलाइंस और एयरपोर्ट ऑपरेटरों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
एयरपोर्ट चार्जेस को बनाया जा सकता है आसान …..
फिलहाल एयरपोर्ट पर अलग-अलग मदों में कई तरह के शुल्क वसूले जाते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- लैंडिंग फीस
- पार्किंग चार्ज
- यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF)
- एयरोब्रिज चार्ज
- अन्य एयरपोर्ट सेवा शुल्क
समिति ने सुझाव दिया है कि इन अलग-अलग शुल्कों को सरल बनाकर केवल तीन मुख्य श्रेणियों में रखा जाए:
- लैंडिंग और पार्किंग शुल्क
- यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF)
- अन्य एयरपोर्ट सेवाओं से जुड़े शुल्क
इससे शुल्क प्रणाली अधिक पारदर्शी और सरल हो सकेगी।
एयरपोर्ट ऑपरेटरों को मिलेगी अधिक लचीलापन…..
नई व्यवस्था लागू होने पर एयरपोर्ट ऑपरेटर अलग-अलग रूट, यात्रा सीजन या नई एयरलाइंस को आकर्षित करने के लिए शुल्क में छूट या बदलाव कर सकेंगे। हालांकि, इन सभी फैसलों पर एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) की निगरानी पहले की तरह जारी रहेगी।
दुकानों और लाउंज के लिए आसान होंगे नियम…..
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि एयरपोर्ट टर्मिनल के भीतर स्थित दुकानों, रेस्टोरेंट, लाउंज और अन्य व्यावसायिक स्थानों में छोटे बदलाव के लिए हर बार सुरक्षा एजेंसी से अनुमति लेने की आवश्यकता समाप्त की जाए। इसके स्थान पर सेल्फ-सर्टिफिकेशन सिस्टम लागू करने का सुझाव दिया गया है, जिससे व्यवसायों को तेजी से काम करने में सुविधा मिलेगी।
Height NOC प्रक्रिया होगी डिजिटल…..
एयरपोर्ट के आसपास बनने वाली इमारतों के लिए आवश्यक Height NOC प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और स्वचालित बनाने की सिफारिश की गई है। साथ ही, यदि एयरपोर्ट के संचालन में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है, तो Height NOC की वैधता 12 वर्ष तक बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया गया है।
ड्रोन और विदेशी पायलटों के नियमों में भी राहत…..
समिति ने एविएशन सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कुछ अन्य महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं:
- विदेशी पायलटों के अस्थायी लाइसेंस की अवधि 1 वर्ष से बढ़ाकर 2 वर्ष करने का प्रस्ताव।
- 30 किलोग्राम तक के छोटे ड्रोन के लिए मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाने की सिफारिश।
- ग्राउंड हैंडलिंग सेवाओं में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर भी जोर।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
यदि सरकार इन सिफारिशों को लागू करती है, तो भविष्य में:
- एयरपोर्ट शुल्क प्रणाली अधिक सरल और पारदर्शी होगी।
- एयरलाइंस को संचालन में अधिक लचीलापन मिलेगा।
- यात्रियों को बेहतर सुविधाएं और सेवाएं मिलने की संभावना बढ़ेगी।
- एयरपोर्ट पर व्यावसायिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
निष्कर्ष …..
नीति आयोग की सिफारिशें भारतीय विमानन क्षेत्र में बड़े सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। हालांकि इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय सरकार को लेना है, लेकिन यदि इन्हें मंजूरी मिलती है तो एयरपोर्ट संचालन अधिक आधुनिक, सरल और यात्रियों के अनुकूल हो सकता है।
