मोहन भागवत के बयान का संत समाज ने किया समर्थन, महंत रवींद्र पुरी बोले- 'मुसलमान हमारे भाई हैं'

धर्म और सामाजिक सौहार्द को लेकर देश में समय-समय पर अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं. इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के धर्म और मानवता से जुड़े बयान को लेकर संत समाज की ओर से महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया सामने आई है.
उत्तराखंड के हरिद्वार में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने भागवत के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा सभी के सुख और कल्याण की कामना करती है. उन्होंने इस संदर्भ में ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना का उल्लेख करते हुए सामाजिक भाईचारे और सद्भाव को महत्वपूर्ण बताया. महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि पूजा और उपासना की पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवता और ईश्वर की तलाश का भाव लोगों को जोड़ सकता है.
‘भारत में रहने वाले मुसलमान हमारे भाई हैं’
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि भारत में रहने वाले मुसलमानों को अलग या गैर मानना उचित नहीं है. उनके मुताबिक देश के मुसलमान भी इसी समाज का हिस्सा हैं और उनके साथ भाईचारे की भावना रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि समाज को लोगों के बीच दूरी बढ़ाने के बजाय आपसी विश्वास और संवाद को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए. महंत रवींद्र पुरी की इस टिप्पणी में सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव का संदेश प्रमुख रहा. उन्होंने धर्म और समुदाय के आधार पर आम लोगों के बीच नफरत या टकराव को बढ़ावा देने से बचने की बात कही.
‘ईश्वर और खुदा के रास्ते अलग, मंजिल एक’
महंत रवींद्र पुरी ने धार्मिक विविधता को लेकर कहा कि अलग-अलग समुदायों की उपासना पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन अंतिम उद्देश्य ईश्वर की ओर बढ़ना हो सकता है. उन्होंने इसी भावना को व्यक्त करते हुए कहा कि ईश्वर और खुदा तक पहुंचने के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल एक है.
उनका कहना था कि धार्मिक मतभेदों को लेकर समाज में लगातार विवाद और टकराव की स्थिति पैदा करना उचित नहीं है. अलग-अलग धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर दिया जाना चाहिए.
सभी मुसलमानों को एक नजर से देखना ठीक नहीं
महंत रवींद्र पुरी ने यह भी कहा कि किसी पूरे समुदाय को एक ही नजर से देखना सही नहीं है. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में भी अलग-अलग विचार रखने वाले लोग हैं और बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो सनातन परंपराओं तथा भारतीय संस्कृति का सम्मान करते हैं. इसलिए किसी व्यक्ति या समूह की गतिविधि के आधार पर पूरे समुदाय के बारे में एक जैसी धारणा बनाना उचित नहीं होगा. उनके बयान में आम लोगों और किसी विशेष विचारधारा या गतिविधि के बीच अंतर करने की जरूरत पर जोर दिया गया.
‘विरोध हो, लेकिन आम लोगों के बीच भाईचारा बना रहे’
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि देश और समाज के खिलाफ किसी भी तरह की गतिविधि का विरोध होना चाहिए, लेकिन इसका असर आम लोगों के आपसी संबंधों पर नहीं पड़ना चाहिए. उन्होंने सामाजिक एकता को बनाए रखने की जरूरत बताते हुए कहा कि आम नागरिकों के बीच भाईचारा और विश्वास मजबूत रहना चाहिए. उनका कहना है कि किसी भी विचार या गतिविधि से असहमति हो सकती है, लेकिन असहमति का मतलब समाज के अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करना नहीं होना चाहिए.
महंत रवींद्र पुरी ने अपने बयान में सनातन परंपरा की उस भावना का उल्लेख किया जिसमें सभी के सुख और कल्याण की कामना की जाती है. ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का भाव भारतीय धार्मिक और दार्शनिक परंपरा में व्यापक रूप से मानव कल्याण से जुड़ा माना जाता है. उन्होंने इसी भावना को सामाजिक जीवन में लागू करने पर जोर दिया. उनके अनुसार धर्म का उद्देश्य समाज में सद्भाव और मानवता को मजबूत करना भी होना चाहिए.
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि समाज में लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करने की कोशिश होनी चाहिए. उन्होंने लोगों से एक-दूसरे को समझने और संवाद के रास्ते खुले रखने की अपील की. उनके अनुसार अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के बावजूद लोग एक ही देश और समाज का हिस्सा हैं. इसलिए सामाजिक शांति और आपसी सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है.
मोहन भागवत के बयान को बताया समाज को जोड़ने वाला संदेश
महंत रवींद्र पुरी ने मोहन भागवत के धर्म और मानवता से जुड़े विचारों को समाज को जोड़ने वाला संदेश बताया. उन्होंने कहा कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बातचीत के दौरान आपसी सम्मान और भाईचारे को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. उनके मुताबिक समाज में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इन मतभेदों को टकराव और नफरत में बदलने से बचना जरूरी है.
हरिद्वार से आया सामाजिक सद्भाव का संदेश
महंत रवींद्र पुरी का बयान हरिद्वार से सामने आया, जो देश के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्रों में शामिल है. अखाड़ा परिषद से जुड़े संतों की सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर टिप्पणियां अक्सर चर्चा में रहती हैं. ऐसे में महंत रवींद्र पुरी का यह बयान धार्मिक विविधता, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को लेकर महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, धर्म और राजनीति से जुड़े ऐसे बयानों पर अलग-अलग वर्गों की अपनी-अपनी व्याख्या हो सकती है, लेकिन महंत रवींद्र पुरी ने अपने बयान में आम लोगों के बीच शांति और भाईचारे को प्राथमिकता देने की बात कही है.
