ड्रीम-11 ने टीम इंडिया की स्पॉन्सरशिप छोड़ी

मुंबई। भारतीय क्रिकेट में बड़ा बदलाव हुआ है। ड्रीम-11 ने टीम इंडिया की स्पॉन्सरशिप छोड़ने का फैसला कर लिया है। 358 करोड़ रुपये का यह बड़ा करार समय से पहले ही समाप्त हो गया। बीसीसीआई ने साफ कर दिया है कि अब भविष्य में किसी ऑनलाइन गेमिंग कंपनी के साथ करार नहीं किया जाएगा।
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने सोमवार (25 अगस्त) को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, “ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करने वाला नया बिल पास हो गया है। ऐसे में बीसीसीआई और ड्रीम-11 अब एक साथ आगे नहीं बढ़ सकते।”
क्यों टूटा ड्रीम-11 स्पॉन्सरशिप करार?
ड्रीम-11 ने 2023 में बीसीसीआई के साथ 358 करोड़ रुपये का तीन साल का करार किया था। इस डील के तहत:
- हर घरेलू मैच के लिए बीसीसीआई को 3 करोड़ रुपये मिलते थे।
- विदेशों में खेले गए हर मैच के लिए 1 करोड़ रुपये दिए जाते थे।
यह करार 2026 तक चलना था। मगर ड्रीम-11 स्पॉन्सरशिप को ऑनलाइन गेमिंग पर बने नए कानून की वजह से बीच में ही खत्म करना पड़ा।
नया कानून और असर

भारत सरकार ने हाल ही में एक बिल पास किया है, जिसमें रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगा दी गई है। ड्रीम-11 का मुख्य कारोबार इसी सेगमेंट पर आधारित था। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी की 67% कमाई रियल मनी गेमिंग से आती थी।
बीसीसीआई और ड्रीम-11 के करार में एक विशेष क्लॉज शामिल था। इसमें कहा गया था कि अगर सरकार का कोई नया नियम स्पॉन्सर के बिजनेस को प्रभावित करता है, तो अनुबंध को बिना जुर्माना दिए खत्म किया जा सकता है। यही वजह है कि ड्रीम-11 स्पॉन्सरशिप को रद्द करने पर जुर्माना नहीं लगाया गया।
ड्रीम-11 की नई दिशा
ड्रीम-11 के सीईओ हर्ष जैन ने कहा कि नए कानून के तहत रियल-मनी गेमिंग जारी रखने का कोई कानूनी रास्ता नहीं है। इसलिए कंपनी ने अपने इस कोर बिजनेस को बंद करने का फैसला लिया है। अब ड्रीम-11 नॉन-रियल मनी गेमिंग और डिजिटल एंटरटेनमेंट सेगमेंट पर फोकस करेगी।
बीसीसीआई का रुख और नए स्पॉन्सर की तलाश

बीसीसीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब वह भविष्य में किसी ऑनलाइन गेमिंग कंपनी के साथ करार नहीं करेगा। बोर्ड जल्द ही नए लीड स्पॉन्सर के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा।
टाटा ग्रुप, रिलायंस इंडस्ट्रीज और अडाणी ग्रुप जैसी कंपनियां संभावित दावेदारों में मानी जा रही हैं। टाटा पहले से ही आईपीएल के ऑफिशियल स्पॉन्सर हैं, रिलायंस जियो स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप और प्रसारण अधिकारों में शामिल है। अडाणी ग्रुप भी स्पोर्ट्स वेंचर्स में निवेश कर रहा है।
358 करोड़ के करार का आर्थिक प्रभाव
बीसीसीआई के लिए ड्रीम-11 स्पॉन्सरशिप एक बड़ा राजस्व स्रोत था। करार खत्म होने से नई स्पॉन्सरशिप डील में उतनी ही बड़ी या उससे ज्यादा राशि हासिल करना चुनौती होगी। हालांकि, क्रिकेट की लोकप्रियता को देखते हुए यह संभव माना जा रहा है।
खेल स्पॉन्सरशिप इंडस्ट्री के लिए सीख
- कानूनों में बदलाव से बिजनेस मॉडल पर सीधा असर पड़ सकता है।
- स्पॉन्सरशिप डील में कानूनी सुरक्षा देने वाले क्लॉज बेहद जरूरी हैं।
- बड़े स्पोर्ट्स बोर्ड्स को अब पारंपरिक और भरोसेमंद कंपनियों पर ज्यादा भरोसा करना होगा।
भविष्य की संभावनाएं
बीसीसीआई के नए लीड स्पॉन्सर की घोषणा आने वाले हफ्तों में हो सकती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि टाटा, रिलायंस और अडाणी में से कोई एक कंपनी यह बड़ा करार हासिल कर सकती है।
निष्कर्ष
ड्रीम-11 स्पॉन्सरशिप का अंत भारतीय क्रिकेट स्पॉन्सरशिप जगत के लिए ऐतिहासिक क्षण है। यह बदलाव न केवल ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पर नए कानून के प्रभाव को दर्शाता है, बल्कि खेलों में पारदर्शी और स्थायी निवेश की दिशा में भी एक कदम है।
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