प्रस्तावना

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) 2025 का शिखर सम्मेलन दुनियाभर के नेताओं और विदेश मंत्रियों के लिए कूटनीतिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसी क्रम में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में अपने व्यस्त कार्यक्रम के दौरान नीदरलैंड, श्रीलंका, डेनमार्क, सिंगापुर, मालदीव, मॉरीशस और सेंट लूसिया जैसे देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।
इन मुलाकातों में न सिर्फ आपसी संबंधों पर चर्चा हुई, बल्कि वैश्विक मुद्दों जैसे यूरोप-यूक्रेन संघर्ष, वैश्विक दक्षिण की चुनौतियाँ, द्वीपीय देशों का विकास, भारत-ईयू सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर भी गंभीर विचार-विमर्श हुआ।
नीदरलैंड के विदेश मंत्री डेविड वान वील से मुलाकात
जयशंकर ने नीदरलैंड के विदेश मंत्री डेविड वान वील से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि बातचीत बेहद सकारात्मक रही।
- इसमें यूरोपीय रणनीतिक स्थिति और भारत के दृष्टिकोण पर गहन चर्चा हुई।
- नीदरलैंड यूरोप में भारत का एक अहम व्यापारिक और तकनीकी साझेदार है।
- दोनों देशों के बीच क्लीन एनर्जी, वाटर मैनेजमेंट, और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना रही।
श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ से वार्ता

श्रीलंका भारत का करीबी पड़ोसी और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साझेदार है। जयशंकर ने श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ के साथ मुलाकात की।
- बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई।
- भारत पहले से ही श्रीलंका की इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट, ट्रेड और एनर्जी सेक्टर में मदद कर रहा है।
- हाल ही में भारत ने श्रीलंका की आर्थिक चुनौतियों को दूर करने के लिए भी अहम वित्तीय सहायता दी थी।
सेंट लूसिया के विदेश मंत्री अल्वा बैप्टिस्ट के साथ संवाद
जयशंकर ने कहा कि सेंट लूसिया के विदेश मंत्री अल्वा बैप्टिस्ट के साथ बातचीत शानदार रही और उन्होंने उनके साथ अपने लंबे संबंधों को याद किया।
- कैरेबियाई देशों के साथ भारत की पीपल-टू-पीपल कनेक्ट और ग्लोबल साउथ सहयोग को मजबूत करने पर विचार हुआ।
- भारत इन देशों में हेल्थकेयर, एजुकेशन और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन से मुलाकात
डेनमार्क यूरोप में भारत का अहम सहयोगी है। जयशंकर ने डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन से मुलाकात की और चर्चा को महत्वपूर्ण बताया।

- वार्ता में यूरोप और यूक्रेन संघर्ष के ताज़ा घटनाक्रम पर विचार-विमर्श किया गया।
- भारत और डेनमार्क के बीच ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप पर भी बातचीत हुई।
- डेनिश प्रेसीडेंसी के तहत भारत-ईयू सहयोग पर नए अवसरों की तलाश की गई।
सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन के साथ संक्षिप्त बातचीत
जयशंकर ने समान विचारधारा वाले ग्लोबल साउथ देशों की बैठक के दौरान सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन से भी बातचीत की।
- बातचीत संक्षिप्त थी, लेकिन दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग, व्यापार और सुरक्षा पर विचार साझा किए।
- भारत और सिंगापुर लंबे समय से ट्रेड, टेक्नोलॉजी और डिफेंस सेक्टर में करीबी साझेदारी निभाते आ रहे हैं।
मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील से मुलाकात
जयशंकर ने मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील के साथ द्विपक्षीय बैठक की।
- इसमें भारत ने मालदीव के विकास और स्थिरता के लिए अपने दृढ़ समर्थन को दोहराया।
- भारत पहले से ही मालदीव में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, समुद्री सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों में सहयोग कर रहा है।
- इस मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी “पड़ोसी पहले” नीति को पूरी मजबूती से आगे बढ़ा रहा है।
मॉरीशस के विदेश मंत्री रितेश रामफुल के साथ बातचीत
जयशंकर ने न्यूयॉर्क में मॉरीशस के विदेश मंत्री रितेश रामफुल से मुलाकात की।
- इसमें हाल ही में मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम की भारत यात्रा पर चर्चा हुई।
- भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध बेहद गहरे हैं।
- दोनों देशों ने इंडियन ओशन सिक्योरिटी, ब्लू इकोनॉमी और एजुकेशन में साझेदारी पर जोर दिया।
वैश्विक दक्षिण की भूमिका
इन बैठकों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि भारत ने खुद को वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ के रूप में प्रस्तुत किया।
- भारत छोटे और विकासशील देशों की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाता आ रहा है।
- जयशंकर की ये मुलाकातें इस बात का सबूत हैं कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है।
कूटनीतिक महत्व
जयशंकर की इन बैठकों का महत्व कई स्तरों पर है:
- द्विपक्षीय संबंध मजबूत करना – भारत और इन देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों में नई ऊर्जा।
- वैश्विक सहयोग – यूरोप, एशिया, अफ्रीका और कैरेबियन देशों के साथ नए अवसरों की तलाश।
- रणनीतिक मुद्दे – यूक्रेन युद्ध, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, ग्लोबल साउथ की चुनौतियाँ।
- भारत की छवि – एक सक्रिय, जिम्मेदार और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में वैश्विक पहचान।
निष्कर्ष
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की न्यूयॉर्क में हुई इन कूटनीतिक बैठकों ने यह साबित कर दिया कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक रणनीतिक साझेदार बन चुका है। नीदरलैंड और श्रीलंका से लेकर सिंगापुर, मालदीव और मॉरीशस तक, भारत हर मोर्चे पर अपने रिश्तों को मज़बूत कर रहा है।
इन मुलाकातों से न सिर्फ भारत की विदेश नीति को गति मिली है, बल्कि यह संदेश भी गया है कि भारत शांति, सहयोग और विकास के एजेंडे पर पूरी दुनिया के साथ खड़ा है।
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