हरियाणा में घी के नाम पर बिकने वाले मानकविहीन उत्पादों पर सरकार का बड़ा एक्शन! 21 अगस्त 2026 से एक साल की रोक लागू की गई है। जानिए किन उत्पादों पर पड़ेगा असर और क्या असली घी भी बैन है।

हरियाणा सरकार ने खाद्य पदार्थों में मिलावट और ग्राहकों को गुमराह करने वाले उत्पादों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। राज्य में निर्धारित खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करने वाले उत्पादों को ‘घी’ के नाम से बनाने, बेचने, स्टोर करने और सप्लाई करने पर एक साल की रोक लगाई गई है। यह आदेश पूरे हरियाणा में लागू किया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में बिकने वाले सभी घी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जो घी निर्धारित खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को पूरा करता है, उसकी बिक्री जारी रहेगी।
21 अगस्त 2026 से लागू हुआ आदेश….
हरियाणा के खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. मनोज कुमार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक यह प्रतिबंध 21 अगस्त 2026 से एक साल के लिए लागू किया गया है। यानी आदेश में बदलाव या वापसी नहीं होने पर यह रोक अगस्त 2027 तक प्रभावी रहेगी। सरकार ने यह कदम खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और ऐसे उत्पादों पर रोक लगाने के लिए उठाया है, जिन्हें घी के नाम पर बेचा जा रहा है लेकिन वे निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते।
किन उत्पादों पर लगेगी रोक….?
आदेश के दायरे में ऐसे उत्पाद आते हैं जिन्हें घी के नाम से बाजार में बेचा या प्रचारित किया जाता है, लेकिन वे निर्धारित संरचना और गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करते।
खास तौर पर इन नामों से बेचे जाने वाले उत्पादों पर कार्रवाई हो सकती है :-
- घी फॉर पूजा
- घी फॉर दीया
- घी फॉर हवन
- कुकिंग घी
- टेबल घी
- वनस्पति घी
इन उत्पादों को निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरने की स्थिति में ‘घी’ के नाम से बनाना, बेचना, स्टोर करना और सप्लाई करना प्रतिबंधित रहेगा।
क्या असली घी की बिक्री भी बंद है….?
सरकार के आदेश को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हरियाणा में अब घी की बिक्री बंद हो जाएगी? ऐसा नहीं है। जो घी निर्धारित खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को पूरा करता है, उसकी बिक्री पर इस आदेश के तहत रोक नहीं लगाई गई है। कार्रवाई मुख्य रूप से उन उत्पादों के खिलाफ है जिन्हें घी के नाम से बेचा जा रहा है लेकिन वे तय मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए ग्राहकों को घी खरीदते समय पैकेट पर मौजूद जानकारी और उत्पाद की गुणवत्ता से जुड़े विवरण को ध्यान से देखना चाहिए।
पनीर और मक्खन पर भी सख्ती….
घी के अलावा हरियाणा सरकार ने एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर और मार्जरीन को मक्खन के नाम से बेचने पर भी एक साल की रोक लगाई है। एनालॉग पनीर देखने और इस्तेमाल में सामान्य पनीर जैसा हो सकता है, लेकिन इसमें दूध की वसा की जगह पूरी तरह या आंशिक रूप से वेजिटेबल ऑयल या वेजिटेबल फैट का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक को किसी खाद्य उत्पाद की वास्तविक प्रकृति के बारे में सही जानकारी मिले और उसे किसी दूसरे उत्पाद के नाम पर न बेचा जाए।
होटल-रेस्टोरेंट और कारोबारियों पर भी असर….
इस आदेश का असर सिर्फ दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग यूनिट, ईटरी और क्लाउड किचन जैसे कारोबार भी इसके दायरे में आ सकते हैं। इन कारोबारों को ऐसे नॉन-डेयरी या एनालॉग पनीर के इस्तेमाल, स्टोरेज और बिक्री से बचना होगा, जिन पर प्रतिबंध लागू है। खाद्य सामग्री खरीदते समय कारोबारियों को अपने सप्लायर्स और उत्पादों की गुणवत्ता की जांच करना जरूरी होगा।
सरकार का क्या है उद्देश्य….?
हरियाणा सरकार का जोर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने और ग्राहकों को सही उत्पाद उपलब्ध कराने पर है। बाजार में किसी खाद्य वस्तु को जिस नाम से बेचा जा रहा है, वह निर्धारित मानकों और उसकी वास्तविक संरचना के अनुरूप होना चाहिए। मिलावट या गलत तरीके से लेबल किए गए उत्पादों पर रोक लगाकर सरकार खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
ग्राहकों को भी रहना होगा सावधान….
घी या अन्य डेयरी उत्पाद खरीदते समय ग्राहक पैकेट पर लेबल, उत्पाद की जानकारी, लाइसेंस संबंधी विवरण और अन्य जरूरी जानकारी जरूर देखें। अगर किसी उत्पाद के नाम और उसकी वास्तविक प्रकृति को लेकर संदेह हो तो उसे खरीदने से पहले जानकारी हासिल करना बेहतर है।
नोट : हरियाणा सरकार का यह प्रतिबंध निर्धारित मानकों को पूरा न करने वाले या घी के नाम पर बेचे जाने वाले संबंधित उत्पादों पर लागू है। मानकों के अनुरूप असली घी की बिक्री पर इस आदेश के तहत सामान्य प्रतिबंध नहीं है।
