
नई दिल्ली, 27 मार्च। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-संचालित प्रक्रिया के जरिए होने चाहिए, जिनका मुख्य उद्देश्य विकास होना चाहिए।
गोयल ने यह बात कैमरून के याउंडे में आयोजित डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के दौरान कही।
प्रमुख सिद्धांतों को बनाए रखने पर जोर
पीयूष गोयल ने कहा कि डब्ल्यूटीओ सुधारों में बिना भेदभाव, सर्वसम्मति आधारित निर्णय और समानता जैसे मूल सिद्धांतों को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि संगठन के सुधार ऐसे तरीके से किए जाने चाहिए, जिससे सभी सदस्य देशों की भागीदारी और हित सुनिश्चित हों।
कैमरून के प्रधानमंत्री से मुलाकात
सम्मेलन के दौरान गोयल ने कैमरून के प्रधानमंत्री जोसेफ डियोन न्गुटे से मुलाकात की।
इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और कैमरून के बीच सहयोग को मजबूत करने के उपायों और विभिन्न द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की।
डब्ल्यूटीओ महानिदेशक से भी की चर्चा
गोयल ने डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक न्गोजी ओकोंजो-इवेला से भी मुलाकात की और एमसी14 के एजेंडे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
इसके अलावा उन्होंने नीदरलैंड, फ्रांस और इथियोपिया के अपने समकक्षों से भी द्विपक्षीय व्यापार संबंधों की समीक्षा की।
कई देशों के साथ हुई बैठकें
सम्मेलन के दौरान वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं।
इन बैठकों में चिली, पैराग्वे, अमेरिका, नेपाल, फिलीपींस, सऊदी अरब, मैक्सिको, पेरू, रूस और न्यूजीलैंड के प्रतिनिधियों के अलावा यूरोपीय संघ के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल रहा।
26 से 29 मार्च तक चलेगा सम्मेलन
डब्ल्यूटीओ का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 26 मार्च को याउंडे में शुरू हुआ, जिसकी अध्यक्षता कैमरून के व्यापार मंत्री कर रहे हैं। यह सम्मेलन 29 मार्च तक चलेगा।
उद्घाटन सत्र में डब्ल्यूटीओ महानिदेशक न्गोजी ओकोंजो-इवेला के साथ कई सदस्य देशों के व्यापार मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए।
विकास-केंद्रित एजेंडा पर जोर
भारत ने इस दौरान विकास-केंद्रित एजेंडा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इसमें खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH) पर स्थायी समाधान, विकासशील और अल्प विकसित देशों के लिए विशेष और विभेदक व्यवहार (S&DT) प्रावधान, और पूरी तरह से कार्यशील विवाद निपटान तंत्र की बहाली जैसे मुद्दे शामिल हैं।
