
रायपुर, 11 मार्च। छत्तीसगढ़ नक्सली सरेंडर के मामले में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। बुधवार को छत्तीसगढ़ रीजन में एक साथ 108 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी पर कुल मिलाकर 3.95 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था।
अलग-अलग जिलों में हुआ सरेंडर
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सरेंडर करने वाले नक्सली राज्य के अलग-अलग जिलों से जुड़े हुए थे।
- बीजापुर – 37 नक्सली
- नारायणपुर – 4 नक्सली
- बस्तर – 16 नक्सली
- कांकेर – 3 नक्सली
- सुकमा – 18 नक्सली
- दंतेवाड़ा – 30 नक्सली
इनमें से 22 नक्सलियों पर 8-8 लाख रुपए, 31 पर 5 लाख रुपए, एक पर 3 लाख रुपए, 9 पर 2-2 लाख रुपए और 43 नक्सलियों पर 1-1 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
अब तक के सबसे बड़े सरेंडर में से एक
इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों का आत्मसमर्पण अब तक के सबसे बड़े सरेंडर मामलों में से एक माना जा रहा है। इसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ‘नक्सल मुक्त भारत अभियान’ की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
भारत सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। अंतिम समयसीमा से पहले इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों का सरेंडर मिशन के लिए अहम माना जा रहा है।
पहले भी हथियारों के साथ किया था आत्मसमर्पण
इससे पहले छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में 15 माओवादियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था।
इन नक्सलियों ने पुलिस को कई हथियार सौंपे थे, जिनमें शामिल हैं:
- 3 एके-47 राइफल
- 2 एसएलआर (सेल्फ लोडिंग राइफल)
- 2 इंडियन स्मॉल आर्म्स सिस्टम राइफल
इस समूह में 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल थे, जो ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय बलांगीर-बरगढ़-महासमुंद समिति से जुड़े हुए थे।
सीआरपीएफ ने तेज किया अभियान
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक जीपी सिंह ने हाल ही में छत्तीसगढ़ में फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जवानों को अभियान के अंतिम चरण के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ तैयार रहने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए छिपे हुए आईईडी (IED) सबसे बड़ा खतरा होते हैं, इसलिए ऑपरेशन के दौरान सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना जरूरी है।
सुरक्षा बलों का लक्ष्य अभियान के दौरान ‘जीरो कैजुअल्टी’ सुनिश्चित करना है।
