
वाराणसी, 26 मार्च। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव रामनवमी 27 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन दुनिया भर में भक्त उत्साह और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान विष्णु तथा राम के दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंचते हैं।
काशी, जिसे शिवनगरी के रूप में जाना जाता है, गंगा, शिव और ज्ञान का अद्भुत संगम है। इसी पवित्र नगरी में स्थित है भगवान विष्णु को समर्पित बिंदु माधव मंदिर, जिसकी मान्यता ऋषि अग्निबिंदु की तपस्या से जुड़ी मानी जाती है।
पंचगंगा घाट पर स्थित है बिंदु माधव मंदिर
वाराणसी के पंचगंगा घाट पर स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, जहां वह ‘बिंदु माधव’ यानी बूंदों के स्वामी के रूप में विराजमान हैं।
यह मंदिर केवल विष्णु भक्ति का केंद्र ही नहीं, बल्कि रामनवमी के अवसर पर भगवान राम और विष्णु के एकत्व का प्रतीक भी माना जाता है।
ऋषि अग्निबिंदु की तपस्या से जुड़ी कथा
उत्तर प्रदेश सरकार के काशी गवर्मेंट पोर्टल के अनुसार, पंचगंगा घाट से ऊपर जाती सीढ़ियां एक साधारण पत्थर के हॉल तक पहुंचती हैं, जहां प्राचीन बिंदु माधव मंदिर स्थित है।
किंवदंतियों के अनुसार, इस स्थान पर ऋषि अग्निबिंदु ने कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि उन्होंने पवित्र जल की बूंदों को ग्रहण करके ही अपना जीवन व्यतीत किया।
उनकी भक्ति और निष्ठा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि वह हमेशा इस स्थान पर निवास करेंगे, इसलिए उन्हें ‘बिंदु माधव’ कहा गया, जिसका अर्थ है ‘बूंदों के स्वामी’।
पंच माधव मंदिरों में से एक
बिंदु माधव मंदिर पंच माधव मंदिरों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्ची श्रद्धा से पूजा करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है।
रामनवमी के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। भगवान राम को विष्णु का अवतार माना जाता है, इसलिए इस दिन यहां राम और विष्णु की संयुक्त भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
इतिहास में भव्य रहा है मंदिर
ऐतिहासिक रूप से यह मंदिर कभी बेहद भव्य हुआ करता था। 17वीं शताब्दी के फ्रांसीसी यात्री जीन बप्तिस्त टैवर्नियर ने अपने यात्रा विवरण में इस मंदिर की प्रशंसा की थी।
उन्होंने बताया था कि यह मंदिर क्रॉस (X) के आकार का भव्य पैगोडा था, जिसमें भगवान विष्णु की लगभग छह फुट ऊंची प्रतिमा रत्नों, माणिकों और मोतियों से सजी हुई थी।
हालांकि, 1669 में इस मंदिर को नष्ट कर दिया गया, लेकिन भक्तों ने प्रतिमा को गुप्त रूप से सुरक्षित बचा लिया।
मराठा शासक ने कराया पुनर्निर्माण
19वीं शताब्दी में मराठा शासक भवान राव ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया और प्राचीन प्रतिमा को फिर से स्थापित किया।
आज मंदिर में भगवान विष्णु की शालिग्राम शिला और प्रतिमा स्थापित है, जिनके दोनों ओर गरुड़ और हनुमान जी विराजमान हैं। बताया जाता है कि ये प्रतिमाएं पुराने मंदिर के मलबे से सुरक्षित बचाई गई थीं।
रामनवमी पर विशेष आयोजन
हर वर्ष कार्तिक मास में यह मंदिर दीपों से जगमगा उठता है, जहां धार्मिक ग्रंथों का पाठ और भक्ति कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
रामनवमी के दिन भी यहां विशेष सजावट, पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
कैसे पहुंचे बिंदु माधव मंदिर
यह मंदिर पंचगंगा घाट के रतन फाटक, घसी टोला इलाके में स्थित है।
- कैंट रेलवे स्टेशन से ऑटो, रिक्शा या कैब के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है।
- उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसें भी उपलब्ध हैं।
मंदिर प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 10:30 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है।
