पाकिस्तान हॉकी महासंघ का बड़ा फैसला

पाकिस्तान हॉकी महासंघ (PHF) ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) और एशियाई हॉकी महासंघ (AHF) को पत्र लिखकर सूचित किया है कि सुरक्षा कारणों के चलते वह अपनी हॉकी टीम को भारत नहीं भेज पाएगा। टूर्नामेंट अगस्त-सितंबर में बिहार के राजगीर में होना है।
मौजूदा हालात में खतरे की आशंका
PHF प्रमुख तारिक बुगती ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा माहौल में पाकिस्तान की हॉकी टीम को भारत भेजना एक जोखिम भरा कदम होगा। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों में डर का माहौल है और वे भारत जाकर खेलने को तैयार नहीं हैं। “हमने दोनों संस्थाओं को बता दिया है कि मौजूदा परिदृश्य में हमारी हॉकी टीम भारत में खेलते समय सुरक्षा खतरों का सामना कर सकती है,” उन्होंने कहा।
टूर्नामेंट से हटने की सूचना
बुगती ने स्पष्ट किया कि यह टूर्नामेंट सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि हॉकी टीम के लिए वर्ल्ड कप क्वालिफिकेशन का भी जरिया है। इसके बावजूद खिलाड़ियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा, “हमने FIH और AHF से पूछा है कि क्या गारंटी है कि हमारे खिलाड़ी भारत में सुरक्षित रहेंगे और पूरे ध्यान से खेल सकेंगे?”
पाकिस्तान सरकार की चुप्पी
हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पहले संकेत दिया था कि टीम शायद भारत न जाए। इसका मतलब है कि पाकिस्तान सरकार भी इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है और शायद वह भी टीम को भारत भेजने के पक्ष में नहीं है।
भारत का रुख साफ
वहीं भारतीय खेल मंत्रालय के सूत्रों ने साफ किया है कि भारत सरकार किसी भी बहु-राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेने वाली टीमों पर प्रतिबंध नहीं लगाती। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान की हॉकी टीम एशिया कप में हिस्सा लेना चाहती है, तो भारत उसके खिलाफ नहीं है। “हमारा नजरिया स्पष्ट है – खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए,” एक अधिकारी ने पीटीआई से कहा।
राजगीर में होगा टूर्नामेंट

हॉकी एशिया कप का आयोजन 27 अगस्त से 7 सितंबर तक बिहार के राजगीर में होना है। यह पहली बार है जब इस स्तर का टूर्नामेंट बिहार में आयोजित हो रहा है। भारत, जापान, कोरिया, मलेशिया, चीन और बांग्लादेश जैसी टीमें पहले ही टूर्नामेंट की तैयारी में जुटी हैं। लेकिन पाकिस्तान की हॉकी टीम के हटने की स्थिति में पूरे टूर्नामेंट के कार्यक्रम और ग्रुप सिस्टम पर असर पड़ सकता है।
भारत-पाक हॉकी मुकाबलों की अहमियत

भारत और पाकिस्तान के बीच हॉकी टीम मुकाबले हमेशा से खास रहे हैं। दोनों देशों की टीमें जब भी आमने-सामने होती हैं तो दर्शकों में भारी उत्साह देखा जाता है। अगर पाकिस्तान की टीम टूर्नामेंट में शामिल नहीं होती तो यह रोमांच भी खत्म हो जाएगा।
आयोजन संस्थाओं के सामने चुनौती
अब सारी जिम्मेदारी FIH और AHF पर है कि वे पाकिस्तान की हॉकी टीम को मनाने का प्रयास करें या फिर टूर्नामेंट की रूपरेखा में बदलाव करें। आयोजन के ठीक पहले पाकिस्तान की गैरहाजिरी टूर्नामेंट की गुणवत्ता पर भी असर डालेगी।
आंतरिक आलोचना भी शुरू
पाकिस्तान के भीतर भी इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ पूर्व खिलाड़ी और अधिकारी मानते हैं कि PHF को FIH से मजबूत सुरक्षा आश्वासन लेकर हॉकी टीम को भारत भेजना चाहिए। उनका मानना है कि यह फैसला खिलाड़ियों के अनुभव और भविष्य दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।
खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोपरि
हालांकि PHF का कहना है कि वे खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेंगे। “हम अपने खिलाड़ियों को असुरक्षित माहौल में नहीं भेज सकते। चाहे टूर्नामेंट कितना भी महत्वपूर्ण क्यों न हो, सुरक्षा पहले है,” तारिक बुगती ने दोहराया।
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