
पुणे – कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुणे की विशेष सांसद-विधायक अदालत में पेश होकर कहा है कि उनकी जान को खतरा है। यह बयान उन्होंने वीर सावरकर पर की गई टिप्पणियों के चलते चल रहे आपराधिक मानहानि केस के सिलसिले में दिया। गांधी के वकील ने अदालत में एक याचिका दायर की है, जिसमें विशेष तौर पर ‘गोडसे के वंशजों’ से सुरक्षा की मांग की गई है।
सावरकर मानहानि केस में पेश हुए राहुल गांधी
विनायक दामोदर सावरकर पर टिप्पणी करने के बाद राहुल गांधी के खिलाफ पुणे में आपराधिक मानहानि का मामला चल रहा है। बुधवार को वे इस मामले में कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने उनके वकील मिलिंद पवार की ओर से दायर याचिका को रिकॉर्ड में लिया।
इस याचिका में कहा गया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल और कुछ नेताओं के बयानों के कारण राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा है।
भाजपा नेताओं के बयानों का जिक्र
याचिका में भाजपा नेता आर.एन. बिट्टू और तरविंदर मारवाह के बयानों का भी जिक्र किया गया। पवार ने अदालत में बताया कि आर.एन. बिट्टू ने राहुल गांधी को ‘आतंकवादी’ कहा था, जबकि तरविंदर मारवाह ने सीधी धमकी देते हुए कहा कि “गांधी को अच्छा व्यवहार करना चाहिए, अन्यथा उनका भी अपनी दादी जैसा हश्र होगा।”
इन बयानों को सुरक्षा खतरे का मुख्य कारण बताते हुए वकील ने अदालत से हस्तक्षेप की मांग की।
शिकायतकर्ता पर गंभीर आरोप
राहुल गांधी के वकील ने शिकायतकर्ता सत्याकि के बारे में भी अदालत को बताया। उनका दावा है कि सत्याकि का संबंध सावरकर और गोडसे परिवारों से है।
याचिका में कहा गया कि ऐसे लोगों का इतिहास हिंसा और संविधान विरोधी गतिविधियों से जुड़ा रहा है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
वोट चोरी के खुलासे के बाद खतरा बढ़ा
वकील पवार ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने हाल ही में कथित ‘वोट चोरी’ का खुलासा किया है, जिसके बाद उनके खिलाफ माहौल और अधिक बिगड़ गया है।
याचिका में स्पष्ट कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह आशंका वाजिब है कि विनायक सावरकर की विचारधारा को मानने वाले लोग गांधी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
महात्मा गांधी की हत्या का उदाहरण

याचिका में महात्मा गांधी की हत्या का उदाहरण देते हुए कहा गया –
“यह कोई आवेग में किया गया कदम नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का नतीजा था, जो एक खास विचारधारा पर आधारित थी। इसके परिणामस्वरूप एक निहत्थे व्यक्ति के खिलाफ जानबूझकर हिंसा की गई।”
राहुल गांधी के वकील ने अदालत से आग्रह किया कि इतिहास को खुद को दोहराने से रोकना जरूरी है।
अदालत में मांगी विशेष सुरक्षा
पवार ने अदालत से आग्रह किया कि राहुल गांधी को इस केस की सुनवाई के दौरान और बाहर, दोनों जगह विशेष सुरक्षा दी जाए।
उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक टकराव और विरोधियों के उकसाने वाले बयानों के बीच गांधी की जान को खतरा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मामला अब चर्चा में क्यों है
यह केस केवल राहुल गांधी के बयान का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसमें अब राजनीतिक बयानबाजी, ऐतिहासिक संदर्भ और व्यक्तिगत सुरक्षा जैसे मुद्दे जुड़ गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले का असर राजनीतिक माहौल पर भी दिख सकता है।
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