परिचय

केरल के कोट्टायम ज़िले में पुलिस बर्बरता (Police Brutality) का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक पिता का आरोप है कि पुलिस ने उनके 24 वर्षीय बेटे को लाठियों से बुरी तरह पीटा और उसके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए। परिवार ने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और मानवाधिकार आयोग तक शिकायत की, लेकिन छह महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
घटना कैसे शुरू हुई?
- तारीख: 20 मार्च, 2025
- स्थान: एट्टूमनूर, कोट्टायम
- अभय एस. राजीव नामक युवक बाइक से घर लौट रहा था।
- रास्ते में एक निजी बस से टक्कर होते-होते बची।
- जब अभय ने बस चालक से इस पर बात की, तो मौके पर मौजूद सर्कल इंस्पेक्टर अंसिल और चार पुलिसकर्मी उस पर टूट पड़े।
- सार्वजनिक रूप से मारपीट की गई और उसका मोबाइल फोन व बाइक क्षतिग्रस्त कर दी गई।
जनमैत्री केंद्र में बर्बरता

परिवार का आरोप है कि अभय को बाद में एट्टूमनूर पुलिस स्टेशन के पास स्थित जनमैत्री मध्यस्थता केंद्र ले जाया गया, जहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था।
- वहीं उसे लाठियों से पीटा गया।
- पीठ पर गंभीर चोट आई।
- पिता ने चोटों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जारी कीं।
शिकायत और न्याय की राह
परिवार ने शिकायतें भेजीं:

- मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राज्यपाल
- डीजीपी, मानवाधिकार आयोग, एससी/एसटी आयोग
लेकिन छह महीने बाद भी सुनवाई नहीं हुई।
फर्जी मुकदमे और झूठी रिपोर्ट
- पुलिस ने अभय (पूर्व एसएफआई कार्यकर्ता) पर कापा अधिनियम (केरल का असामाजिक गतिविधियां रोकथाम कानून) के तहत झूठा मुकदमा चलाया।
- कापा सलाहकार बोर्ड ने इस कार्रवाई को रद्द किया और पुलिस की आलोचना की।
- आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने अभय को नशेड़ी और असामाजिक तत्व बताने की साजिश रची।
पिता ने यह भी आरोप लगाया:
- पूर्व एसपी वी.जी. विनोद कुमार ने झूठी रिपोर्ट पेश की, जिसके चलते जाति की स्थिति रद्द करने की कोशिश हुई।
- बाद में केरल हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाई।
- अभय का ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने और परिवार पर एफआईआर दर्ज करने की कोशिश भी हुई।
पीड़ित परिवार की स्थिति
- अभय वर्तमान में अवसाद का इलाज कर रहा है।
- परिवार लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
- पिता का कहना है: “स्पष्ट सबूतों के बावजूद पुलिसकर्मी बेपरवाह हैं। मैं किसी भी कीमत पर न्याय के लिए प्रयास करूंगा।”
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं बल्कि पुलिस जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाता है। जब उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो आम नागरिक का न्याय पर विश्वास डगमगाने लगता है।
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