
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 17 अगस्त से बिहार में तीन चरणों में होने वाली मतदाता अधिकार यात्रा की शुरुआत करेंगे। यह यात्रा राज्य के 30 जिलों को कवर करेगी और इसमें बेरोजगारी, कानून-व्यव
स्था, पलायन और चुनाव आयोग की मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
झामुमो नेता शिबू सोरेन के निधन से एक सप्ताह टली थी यात्रा

इस यात्रा की शुरुआत पहले 10 अगस्त को होनी थी, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन के निधन के कारण इसे एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया। अब राहुल गांधी इस अभियान की शुरुआत रोहतास जिले के मुख्यालय सासाराम से करेंगे।
महागठबंधन के बड़े नेता भी होंगे शामिल

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, यात्रा के विभिन्न चरणों में बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के शामिल होने की संभावना है। प्रियंका गांधी ने 4 अगस्त को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को बड़ा मुद्दा बताया था और इस पर संसद में चर्चा की मांग की थी।
13-14 दिनों में पूरा होगा तीन चरणों का सफर
राज्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एमएलसी प्रेम चंद्र मिश्रा के अनुसार, राहुल गांधी की यह यात्रा लगभग 13 से 14 दिन चलेगी। इसमें 30 जिलों को कवर करते हुए तीन चरणों में समापन होगा। यात्रा के दौरान राहुल गांधी और महागठबंधन के नेता विभिन्न जनसभाओं, रैलियों और पदयात्राओं के माध्यम से जनता से सीधा संवाद करेंगे।
प्रमुख मुद्दे – बेरोजगारी से लेकर मतदाता सूची में गड़बड़ी तक
इस यात्रा में राहुल गांधी और उनके सहयोगी नेता कई अहम मुद्दों को सामने रखेंगे—
- बिहार की बिगड़ती कानून-व्यवस्था
- बेरोजगारी और युवाओं का पलायन
- बिहार मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के परिणाम
- मजदूरों और किसानों से जुड़े सवाल
राजनीतिक महत्व
बिहार में होने वाले आगामी चुनावों को देखते हुए यह यात्रा कांग्रेस और महागठबंधन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस अभियान का मकसद जनता से सीधा जुड़ाव बनाना, मतदाता जागरूकता फैलाना और विपक्षी दलों की एकजुटता दिखाना है।
निष्कर्ष
राहुल गांधी की मतदाता अधिकार यात्रा न केवल एक राजनीतिक अभियान है, बल्कि यह बिहार के विभिन्न सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को उजागर करने का भी प्रयास है। 17 अगस्त से शुरू होने वाली इस यात्रा पर पूरे देश की निगाहें टिकी होंगी, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें महागठबंधन के शीर्ष नेता एक मंच पर नजर आ सकते हैं।
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