
नई दिल्ली, 25 फरवरी। बंगाल एसआईआर सुप्रीम कोर्ट निर्देश के तहत बुधवार को अहम आदेश जारी किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया से जुड़े मामले में ईआरओ (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) और एईआरओ (असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) को स्पष्ट निर्देश दिए।
26 फरवरी शाम 5 बजे तक दस्तावेज सौंपने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 15 फरवरी तक मतदाताओं द्वारा अपने दावों के समर्थन में जमा किए गए सभी दस्तावेज, जो 24 फरवरी तक पोर्टल पर अपलोड नहीं हुए हैं, उन्हें 26 फरवरी शाम पांच बजे तक एसआईआर प्रक्रिया में तैनात न्यायिक अधिकारियों को सौंपा जाए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
- 14 फरवरी तक लिखित या डिजिटल रूप में जमा दस्तावेज मान्य होंगे।
- जो दस्तावेज समय पर ईआरओ/एईआरओ को मिल गए थे लेकिन अपलोड नहीं हुए, वे भी सौंपे जाएंगे।
सत्यापन के लिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में तार्किक विसंगति और ‘अनमैप्ड’ श्रेणी के लाखों मामलों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त करने का निर्देश दिया था।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जिला न्यायाधीश और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश स्तर के लगभग 250 अधिकारी इस कार्य में लगे हैं।
हालांकि, आवेदनों की भारी संख्या को देखते हुए यह संख्या अपर्याप्त मानी गई।
सिविल न्यायाधीश भी होंगे शामिल
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सिविल न्यायाधीशों को भी सत्यापन प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर:
- झारखंड उच्च न्यायालय
- उड़ीसा उच्च न्यायालय
से भी अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की मांग की जा सकती है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची समय पर तैयार करने के लिए यह कार्य युद्ध स्तर पर पूरा किया जाना चाहिए।
28 फरवरी 2026 की समयसीमा
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी व्यवस्था दी कि यदि 28 फरवरी 2026 तक सभी लंबित मामलों का सत्यापन पूरा नहीं हो पाता है, तो निर्वाचन आयोग अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने के बाद पूरक सूची जारी कर सकता है।
निष्कर्ष
बंगाल एसआईआर मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों से स्पष्ट है कि मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अदालत ने प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर समन्वय बढ़ाकर प्रक्रिया में तेजी लाने के संकेत दिए हैं।
