दिल्ली संसद मार्च में पैलेट गन चली थी या नहीं?

नई दिल्ली: संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर पैलेट गन (Pellet Gun) के इस्तेमाल का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले ही सवाल उठ रहे थे। अब इस विवाद ने नया मोड़ ले लिया है, क्योंकि सीआरपीएफ (CRPF) इस बात की जांच कर रही है कि क्या भीड़ नियंत्रण के दौरान वास्तव में पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।
इस बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक घायल युवक को मीडिया के सामने पेश करते हुए दावा किया कि वह प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का शिकार हुआ और उसकी एक आंख की रोशनी प्रभावित हुई है।
क्या है पूरा मामला?
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और अन्य प्रदर्शनकारी विभिन्न मांगों को लेकर राजधानी दिल्ली पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की।विपक्ष का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज के साथ-साथ पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया, जबकि प्रशासन की ओर से इस दावे को लेकर स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई है।
CRPF कर रही है जांच
सूत्रों के अनुसार, सीआरपीएफ यह जांच कर रही है कि घटनास्थल पर वास्तव में पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), जो सीआरपीएफ का हिस्सा है, संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात थी। सूत्रों के मुताबिक, RAF के पास भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन उपलब्ध रहती हैं। हालांकि, इस विशेष घटना में उनके उपयोग की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
राहुल गांधी ने क्या दावा किया?
राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत के दौरान एक घायल युवक को अपने साथ लाकर कहा कि उसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से चोट लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि युवक तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहा था, तभी उसकी आंख में पैलेट लगा, जिससे उसकी देखने की क्षमता प्रभावित हुई। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान हजारों युवाओं पर बल प्रयोग किया गया और कई लोगों को गंभीर चोटें आईं।
पैलेट गन क्या होती है?
पैलेट गन एक विशेष प्रकार की पंप-एक्शन गन होती है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से भीड़ नियंत्रण के लिए किया जाता है। इसके कारतूस में सैकड़ों छोटे-छोटे धातु के छर्रे भरे होते हैं। ट्रिगर दबाने पर ये छर्रे तेज गति से अलग-अलग दिशाओं में फैलते हैं। हालांकि इसे आमतौर पर ‘नॉन-लीथल’ (कम घातक) हथियार की श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन यदि छर्रे आंख, चेहरे या शरीर के संवेदनशील हिस्सों पर लग जाएं तो गंभीर चोट, स्थायी दृष्टि हानि या अन्य जटिलताएं हो सकती हैं।
जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति
फिलहाल इस मामले में अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आए हैं।
- विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाई गई।
- सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
- सीआरपीएफ जांच कर रही है कि वास्तव में ऐसी कोई कार्रवाई हुई थी या नहीं।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनास्थल पर पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ था या नहीं और यदि हुआ, तो किन परिस्थितियों में किया गया।
