‘पद्मावत’ के जौहर सीन पर छिड़ी बहस के बीच श्रेया पिलगांवकर ने कहा कि कल्चर समय के साथ बदलता है और पुराने दौर के लोगों को आज की सोच के आधार पर जज नहीं किया जा सकता। वहीं स्वरा भास्कर ने अपने बयान पर सफाई दी है।

‘कल्चर समय के साथ बदलता है’, स्वरा भास्कर के ‘पद्मावत’ बयान पर श्रेया पिलगांवकर ने रखी अपनी बात…….
फिल्म ‘पद्मावत’ में दिखाए गए जौहर के दृश्य को लेकर शुरू हुई चर्चा एक बार फिर सुर्खियों में है। स्वरा भास्कर के पुराने बयान और उस पर उनकी सफाई के बीच अब एक्ट्रेस श्रेया पिलगांवकर ने भी अपनी राय सामने रखी है। उनका कहना है कि किसी दूसरे दौर में जी रहे लोगों और उनकी परिस्थितियों को आज के नजरिए से आंकना सही नहीं है। श्रेया इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘मिर्जापुर’ को लेकर चर्चा में हैं। इसी बीच उन्होंने स्वरा भास्कर के ‘पद्मावत’ से जुड़े बयान पर बात करते हुए संस्कृति, समय और सामाजिक परिस्थितियों के बदलने का जिक्र किया।
‘आज के समय से इतिहास को जज नहीं कर सकते’……
श्रेया पिलगांवकर ने कहा कि आज के दौर में बैठकर कई दशक या सदियों पहले की परिस्थितियों को पूरी तरह समझना आसान नहीं है। उस समय लोगों की सोच क्या थी, उनके सामने कैसी परिस्थितियां थीं और उन पर किस तरह का सामाजिक दबाव था, इन सभी पहलुओं को समझना जरूरी है। उनके मुताबिक, किसी पुराने दौर के लोगों के फैसलों को आज के सामाजिक नजरिए और मौजूदा सोच के आधार पर जज करना उचित नहीं होगा।
‘कल्चर समय के साथ बदलता है’…..

श्रेया ने अपनी बात रखते हुए कहा कि संस्कृति कोई स्थिर चीज नहीं है। समय के साथ समाज बदलता है और उसके साथ लोगों की सोच, परिस्थितियां और जीवन के अनुभव भी बदलते रहते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अलग-अलग दौर को समझने के लिए उस समय की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए। किसी ऐतिहासिक घटना को केवल आज की सोच के आधार पर देखने से उसकी पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
क्यों चर्चा में आया स्वरा भास्कर का बयान…..?
दरअसल, स्वरा भास्कर ने ‘पद्मावत’ के जौहर वाले सीन को लेकर अपनी असहमति जाहिर की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि अगर कोई महिला यौन हिंसा की पीड़ित होने के बाद जीवित रहती है, तो क्या उसके जीवन को कमतर माना जाना चाहिए….? स्वरा ने इस दृश्य को लेकर चिंता जताते हुए कहा था कि किसी महिला के लिए यौन हिंसा के बाद जिंदगी खत्म नहीं हो जाती और सर्वाइवर्स को जीने का पूरा अधिकार है। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई।
वायरल बयान पर स्वरा ने दी सफाई……
बयान पर विवाद बढ़ने के बाद स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनके बयान का एक हिस्सा संदर्भ से अलग करके फैलाया जा रहा है। स्वरा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को ‘कायर’ नहीं कहा था। उन्होंने बताया कि ‘पद्मावत’ के क्लाइमैक्स को देखते हुए उनके मन में एक रेप सर्वाइवर के नजरिए से सवाल उठा था कि क्या किसी महिला को ऐसी स्थिति में जीवित रहने के लिए खुद को दोषी महसूस करना चाहिए।
इतिहास, सिनेमा और आज की सोच पर बहस……
‘पद्मावत’ से जुड़ा यह विवाद एक बार फिर इतिहास को सिनेमा में दिखाने और उसे आधुनिक नजरिए से समझने की बहस को सामने लाता है। श्रेया पिलगांवकर की टिप्पणी जहां ऐतिहासिक संदर्भ और बदलती संस्कृति को समझने की बात करती है, वहीं स्वरा भास्कर का तर्क यौन हिंसा के बाद सर्वाइवर्स के अधिकार और सम्मान पर केंद्रित है। दोनों बयानों के बीच मूल सवाल यही है कि इतिहास और संस्कृति को समझते समय क्या हमें उस दौर की परिस्थितियों को प्राथमिकता देनी चाहिए या आज के सामाजिक मूल्यों के आधार पर उसकी समीक्षा करनी चाहिए। इस मुद्दे पर अलग-अलग लोगों की अलग राय हो सकती है, लेकिन बहस ने एक बार फिर ‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
