मुजफ्फरपुर के 66 स्कूलों में RO पर सवाल! 🚨 JDU नेता ने करीब 50 लाख रुपये के खर्च की जांच की मांग की।

बिहार के मुजफ्फरपुर के सरकारी स्कूलों में लगाए गए 66 RO सेट को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। जेडीयू के प्रदेश प्रवक्ता और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से NDA समर्थित प्रत्याशी अभिषेक झा ने इन RO की लागत, गुणवत्ता और खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। अभिषेक झा का कहना है कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति पर सीधे आरोप लगाने का नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का है। उन्होंने योजना से जुड़े वित्तीय और तकनीकी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
66 स्कूलों में लगाए गए RO को लेकर क्या है मामला…..?
अभिषेक झा के मुताबिक, मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत मुजफ्फरपुर के 66 सरकारी विद्यालयों में 25 लीटर RO Commercial Purifier with Chiller लगाए जाने की अनुशंसा की गई है। उनके अनुसार, इस पूरी योजना में करीब 50 लाख रुपये तक की राशि का प्रावधान बताया गया है। इस हिसाब से प्रति RO की औसत लागत लगभग 75,758 रुपये बैठती है। जेडीयू नेता ने सीतामढ़ी में इसी तरह के RO पर करीब एक लाख रुपये तक खर्च होने का भी उल्लेख किया है। वास्तविक खरीद कीमत और खर्च की पुष्टि आधिकारिक बिल, टेंडर और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों से ही हो सकती है।
बिल और टेंडर सार्वजनिक करने की मांग…..
RO की लागत और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाते हुए अभिषेक झा ने कई दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है। इनमें बिल, टेंडर, BOQ, सप्लाई ऑर्डर, भुगतान वाउचर और गुणवत्ता प्रमाण-पत्र शामिल हैं। उनका कहना है कि अगर किसी RO पर 75 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक खर्च किए गए हैं, तो उपकरण की गुणवत्ता भी उसी स्तर की होनी चाहिए। उन्होंने स्थानीय बाजार में समान उपकरणों की कीमत कम होने की बात का भी उल्लेख किया, लेकिन साथ ही कहा कि वास्तविक कीमत की पुष्टि आधिकारिक खरीद रिकॉर्ड से होनी चाहिए।
बच्चों को मिलने वाले पानी की भी हो जांच…..
मामले का एक अहम पहलू स्कूलों में बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता है। अभिषेक झा ने मांग की है कि सभी RO से मिलने वाले पानी के सैंपल किसी मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला में जांचे जाएं। अगर पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है, तो मामला सिर्फ सरकारी धन के इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहेगा। इससे सीधे तौर पर स्कूली बच्चों को मिलने वाले पेयजल की गुणवत्ता का सवाल भी जुड़ जाएगा।
“बिना जांच किसी को दोषी नहीं ठहरा रहे”…..
अभिषेक झा ने स्पष्ट किया कि वह बिना जांच किसी व्यक्ति को भ्रष्टाचार का दोषी नहीं बता रहे हैं। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल पूरे मामले की स्वतंत्र वित्तीय और तकनीकी जांच कराना है। उन्होंने मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी में लगाए गए RO की जांच के साथ-साथ बिहार में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत लगाए गए ऐसे सभी RO की समीक्षा की मांग की है।
दस्तावेज सामने आने के बाद साफ होगी तस्वीर…..
फिलहाल इस मामले में लगाए गए सवालों और जांच की मांग के बीच सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित विभाग की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। यदि खरीद प्रक्रिया नियमों के मुताबिक हुई है तो टेंडर, बिल और भुगतान से जुड़े दस्तावेज मामले में पारदर्शिता ला सकते हैं। वहीं, अगर जांच में गुणवत्ता या खरीद प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह मामला जांच और दस्तावेजों की पुष्टि का है।
