🚨 सऊदी अरब में हूतियों का बड़ा हमला! एयरपोर्ट, एयरबेस और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का दावा। अब सवाल ये है कि मक्का डिफेंस पैक्ट के तहत पाकिस्तान और तुर्की का अगला कदम क्या होगा.....?

पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से में कई अहम ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। रिपोर्टों के मुताबिक अबहा, जाज़ान, नजरान और खमीस मुशैत में नागरिक और आर्थिक ढांचे प्रभावित हुए हैं। हमलों में 73 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हूतियों ने दावा किया है कि उनके हमलों में अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयरबेस और सऊदी तेल कंपनी अरामको से जुड़े ठिकाने निशाने पर थे। जाज़ान में मौजूद तेल और ऊर्जा ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। हालांकि, हमलों के हर दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सऊदी अरब के अंदर तक पहुंचा हमला…..
इस हमले की गंभीरता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि निशाना सिर्फ सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रहा। अबहा और खमीस मुशैत सऊदी अरब के महत्वपूर्ण विमानन और सैन्य केंद्र हैं, जबकि जाज़ान ऊर्जा ढांचे के लिहाज से बेहद अहम है। रिपोर्टों के अनुसार जाज़ान में करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली रिफाइनरी मौजूद है। हमले के बाद कुछ ऊर्जा इकाइयों के अस्थायी रूप से प्रभावित होने की खबर आई। इस घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दिया और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।
हूतियों ने क्यों किया हमला…..?
हूतियों की ओर से इन हमलों को यमन में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य अभियान का जवाब बताया गया है। इससे पहले हूतियों ने यमन के जफ़ प्रांत में एक जेल पर हुए हवाई हमले के लिए भी सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया था। हूती पक्ष के मुताबिक उस हमले में एक बच्चे समेत कई लोगों की मौत हुई। इसके साथ ही हूती विद्रोहियों ने हाल के महीनों में लाल सागर में सऊदी हितों और जहाजों को निशाना बनाने की धमकी और कार्रवाई तेज की है। ऐसे में ताजा हमला दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव का अगला बड़ा चरण माना जा रहा है।
अब चर्चा में क्यों आया ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’…..?
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी राजनीतिक कड़ी करीब एक महीने पहले हुए सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के रक्षा समझौते से जुड़ी है। 7 अगस्त को मक्का में हुए इस समझौते में सामूहिक सुरक्षा का सिद्धांत रखा गया था। इसका मतलब यह है कि किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों की सुरक्षा से जोड़कर देखा जाएगा। यही वजह है कि सऊदी अरब पर हुए ताजा हमले के बाद अब निगाहें पाकिस्तान और तुर्की की प्रतिक्रिया पर हैं। सवाल यह है कि दोनों देश इस हमले को सिर्फ सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष मानते हैं या सामूहिक रक्षा समझौते के तहत कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने आती है।
पाकिस्तान और तुर्की के सामने बड़ी चुनौती……
मक्का डिफेंस पैक्ट के लिए यह घटनाक्रम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि समझौते के तुरंत बाद ही सऊदी अरब को बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ा है। अगर सऊदी अरब इस हमले का सैन्य जवाब देता है और संघर्ष और फैलता है, तो पाकिस्तान और तुर्की पर भी अपनी रणनीति स्पष्ट करने का दबाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ सीधे सैन्य हस्तक्षेप का मतलब संघर्ष के और बड़े क्षेत्र में फैलने का जोखिम भी होगा।
तेल से लेकर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर असर……
सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है। ऐसे में उसकी तेल रिफाइनरी और ऊर्जा सुविधाओं पर हमले का असर सिर्फ स्थानीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता। ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमत और लाल सागर से गुजरने वाले व्यापारिक मार्गों पर इसका असर पड़ सकता है। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे अलग-अलग संघर्ष किस तरह एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं। हूती-सऊदी तनाव, लाल सागर की सुरक्षा और क्षेत्रीय रक्षा गठबंधन अब एक ही बड़े भू-राजनीतिक समीकरण का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सऊदी अरब इस हमले का जवाब किस तरह देता है और मक्का डिफेंस पैक्ट के साथी पाकिस्तान और तुर्की की अगली चाल क्या होगी।
