🚇 भारत की मेट्रो रफ्तार पकड़ रही है! देश का मेट्रो नेटवर्क 1,170 किलोमीटर तक पहुंच गया है और अगले 2 साल में भारत अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश बन सकता है।

भारत में मेट्रो रेल अब सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है. देश के अलग-अलग शहरों में तेजी से नए मेट्रो कॉरिडोर तैयार किए जा रहे हैं और मौजूदा नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है. इसी रफ्तार का असर अब भारत की वैश्विक स्थिति पर भी दिखाई देने लगा है. देश में मेट्रो रेल नेटवर्क की कुल लंबाई करीब 1,170 किलोमीटर तक पहुंच चुकी है. सरकार का अनुमान है कि अगर विस्तार की यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले करीब दो वर्षों में भारत मेट्रो नेटवर्क की लंबाई के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है. ऐसा होने पर चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क वाला देश बन जाएगा.
अमेरिका से अब कितना पीछे है भारत……?
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल के अनुसार, अमेरिका में फिलहाल करीब 1,386 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल नेटवर्क है. वहीं भारत में यह आंकड़ा लगभग 1,170 किलोमीटर है. यानी दोनों देशों के बीच करीब 216 किलोमीटर का अंतर बचा है. भारत में जिस गति से नई मेट्रो परियोजनाओं पर काम हो रहा है, उसे देखते हुए इस अंतर को अगले दो वर्षों में पाटने की उम्मीद जताई जा रही है. अगर भारत अमेरिका से आगे निकलता है, तो यह देश के शहरी परिवहन ढांचे के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी.
2014 में सिर्फ 245 किलोमीटर था नेटवर्क……
भारत के मेट्रो नेटवर्क की मौजूदा तस्वीर को समझने के लिए करीब एक दशक पीछे जाना जरूरी है. साल 2014 में देश के सिर्फ 5 शहरों में लगभग 245 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क मौजूद था. उस समय मेट्रो सेवा चुनिंदा महानगरों तक ही सीमित थी. अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. मेट्रो रेल का नेटवर्क 26 शहरों तक पहुंच चुका है और इसकी कुल लंबाई करीब 1,170 किलोमीटर हो गई है. इसका मतलब है कि 2014 के मुकाबले देश में मेट्रो नेटवर्क कई गुना बढ़ चुका है. नए शहरों में परियोजनाएं शुरू होने और पुराने कॉरिडोर के विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है.
चीन अभी सबसे आगे…….
दुनिया में सबसे लंबे मेट्रो रेल नेटवर्क की बात करें तो चीन फिलहाल सबसे आगे है. चीन में करीब 8,000 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क बताया जाता है. इसके बाद अमेरिका और भारत का स्थान आता है. भारत अब अमेरिका के काफी करीब पहुंच चुका है और आने वाले समय में दोनों देशों की स्थिति बदल सकती है. भारत का लक्ष्य केवल मौजूदा मेट्रो शहरों में लाइन बढ़ाना नहीं है, बल्कि देश के ज्यादा से ज्यादा शहरी क्षेत्रों को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन से जोड़ना भी है.
छोटे शहरों में भी पहुंच रही मेट्रो…….
भारत में मेट्रो विस्तार की खास बात यह है कि अब इसका फोकस केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है. कई दूसरे शहरों में भी मेट्रो और आधुनिक शहरी परिवहन परियोजनाओं पर काम हो रहा है. इससे शहरों में बढ़ते ट्रैफिक का दबाव कम करने, लोगों के सफर को आसान बनाने और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने में मदद मिल सकती है. मेट्रो नेटवर्क का विस्तार केवल यात्रियों की सुविधा से जुड़ा विषय नहीं है. इसके साथ शहरों का इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, रियल एस्टेट और स्थानीय कारोबार भी प्रभावित होते हैं.
इंदौर भी जुड़ा मेट्रो नेटवर्क से……
मध्य प्रदेश का इंदौर भी देश के बढ़ते मेट्रो नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है. शहर में मेट्रो सेवा के नए मार्ग का उद्घाटन किया गया है. इंदौर में मेट्रो का परिचालन करीब 17 किलोमीटर लंबे मार्ग पर पहुंच गया है. इस नए मार्ग में 16 स्टेशन शामिल हैं. इंदौर जैसे शहरों में मेट्रो का विस्तार यह संकेत देता है कि आने वाले समय में भारत के और भी शहर आधुनिक शहरी परिवहन व्यवस्था से जुड़ सकते हैं.
भारत के लिए क्यों बड़ी उपलब्धि होगी अमेरिका को पीछे छोड़ना……?
अगर अगले दो वर्षों में भारत अमेरिका को मेट्रो नेटवर्क की लंबाई के मामले में पीछे छोड़ देता है, तो यह देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की एक बड़ी तस्वीर पेश करेगा. एक दशक से कुछ ज्यादा समय में 245 किलोमीटर से करीब 1,170 किलोमीटर तक पहुंचना बताता है कि भारत में मेट्रो परियोजनाओं का विस्तार किस तेजी से हुआ है. सिर्फ नेटवर्क की लंबाई बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है. मेट्रो का सफल विस्तार इस बात पर भी निर्भर करता है कि यात्रियों के लिए सेवा कितनी सुविधाजनक, सुरक्षित, समयबद्ध और किफायती रहती है. फिलहाल भारत की रफ्तार को देखते हुए यह मुकाबला दिलचस्प होने वाला है. अगर नई परियोजनाएं तय गति से पूरी होती हैं, तो आने वाले दो साल भारत को दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मेट्रो रेल नेटवर्क वाले देश के रूप में स्थापित कर सकते हैं…….
