राम मंदिर ट्रस्ट: इस्तीफे के बाद भी ट्रस्टी रहेंगे चंपत राय और अनिल मिश्रा

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित गबन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि जांच का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दो प्रमुख चेहरों—चंपत राय और अनिल मिश्रा—के इस्तीफे को लेकर नई जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि दोनों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन ट्रस्ट के नियमों के अनुसार वे आजीवन ट्रस्टी बने रह सकते हैं और उन्हें केवल इस्तीफा देने भर से ट्रस्टी पद से अलग नहीं माना जाएगा।
इस्तीफे के बाद भी क्यों बने रहेंगे ट्रस्टी?
सूत्रों के अनुसार, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे 6 जुलाई को स्वीकार किए गए हैं। हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नियमों के तहत ट्रस्टियों की नियुक्ति और पद से हटाने की प्रक्रिया सामान्य संस्थाओं से अलग है। ट्रस्ट डीड के प्रावधानों के अनुसार, किसी ट्रस्टी का प्रशासनिक पद छोड़ना और ट्रस्टी के रूप में उसकी सदस्यता समाप्त होना दो अलग-अलग बातें हैं। ऐसे में दोनों व्यक्तियों का ट्रस्टी के रूप में बने रहना नियमों के अनुरूप माना जा रहा है।
चढ़ावा गबन मामले में अब तक 8 गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, मंदिर में दान की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से छह कर्मचारी वाराणसी की सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज (SSS) नामक सुरक्षा एजेंसी से जुड़े बताए जा रहे हैं। यह एजेंसी अयोध्या स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की नया घाट शाखा के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था के लिए नियुक्त की गई थी।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दान की गिनती, सुरक्षा और बैंकिंग प्रक्रिया के दौरान कथित गबन कैसे हुआ और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
परिवार भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियों ने आरोपी लवकुश मिश्रा के घर की तलाशी ली है और परिवार के सदस्यों से पूछताछ की है। साथ ही उनकी पत्नी को भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
अयोध्या प्राधिकरण ने दी यह जानकारी
एडीए सूत्रों के मुताबिक सोहावल तहसील के बनवीरपुर गांव में इस मकान का निर्माण चल रहा है. उन्होंने कहा कि मकान वाली जमीन लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदी गई थी और विकास प्राधिकरण से जरूरी मंजरी लिए बिना निर्माण किया गया है. पुलिस सूत्रों ने कहा कि जांचकर्ताओं ने बुधवार को लवकुश मिश्रा के आवास की भी तलाशी ली और उनके परिवार के सदस्यों से पूछताछ की.
इस बीच, पुलिस सूत्रों ने संकेत दिया कि जांचकर्ता आरोपी अविनाश शुक्ला के खिलाफ कानूनी कार्यवाही कड़ी कर सकते हैं, जिसके पास से अब तक सबसे अधिक नकद बरामदगी हुई है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान अविनाश शुक्ला से 20.39 लाख रुपये, करुणेश पांडे से 18.07 लाख रुपये, अनुकल्प मिश्रा से 16.82 लाख रुपये, लवकुश मिश्रा से 14.25 लाख रुपये, रमाशंकर मिश्रा से 7.32 लाख रुपये और रमाशंकर यादव उर्फ टीनू से एक लाख रुपये बरामद किए गए हैं.
