💰 पैसा रिकवर हुआ, फिर भी नहीं बंद होगा विजय माल्या का केस! ED ने हाई कोर्ट में साफ किया कि रकम की वसूली से मनी लॉन्ड्रिंग की आपराधिक कार्यवाही खत्म नहीं होती। आखिर क्या है पूरा मामला.....?

भगोड़े कारोबारी विजय माल्या से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामला एक बार फिर चर्चा में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बॉम्बे हाई कोर्ट में साफ कर दिया है कि माल्या से कथित तौर पर रकम की वसूली हो जाने के बावजूद उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही खत्म नहीं की जाएगी। माल्या की ओर से लंबे समय से लंबित मामले को खत्म करने की मांग की गई है। उनका तर्क है कि बैंकों के बकाये से अधिक रकम पहले ही रिकवर की जा चुकी है, ऐसे में अब इस मामले को आगे चलाने का कोई आधार नहीं बचता। हालांकि, ED इस दलील से सहमत नहीं है।
हाई कोर्ट में ED ने क्या कहा….?
मामले की सुनवाई के दौरान ED ने बॉम्बे हाई कोर्ट के सामने कहा कि माल्या का भारत से बाहर रहना और अदालत के सामने पेश नहीं होना अब भी इस मामले की पूरी पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है। ED ने अदालत से कहा कि माल्या के लगातार अनुपस्थित रहने और उनके आचरण को ध्यान में रखते हुए ही इस मामले में आगे कोई फैसला लिया जाना चाहिए। एजेंसी का कहना है कि सिर्फ रकम की रिकवरी हो जाने से आपराधिक मामला अपने आप खत्म नहीं हो जाता।
‘यह सिर्फ कारोबारी विवाद नहीं है’…..
ED ने कोर्ट के सामने स्पष्ट किया कि विजय माल्या से जुड़ा मामला महज एक कारोबारी या कर्ज विवाद नहीं है, बल्कि यह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही है। एजेंसी ने PMLA की धारा 8(8) का हवाला देते हुए कहा कि संपत्तियों की बहाली उस व्यक्ति को संपत्ति लौटाने की कानूनी प्रक्रिया है, जिसका उस संपत्ति पर वैध अधिकार है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संपत्ति लौटाने के साथ अपराध या मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप भी खत्म हो जाते हैं। यानी ED के मुताबिक पैसा या संपत्ति वापस मिलना और आपराधिक कार्यवाही खत्म होना दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।
माल्या ने केस खत्म करने की मांग क्यों की…..?
विजय माल्या की ओर से हाई कोर्ट में मामले को खत्म करने की मांग की गई है। उनकी दलील है कि कर्ज से ज्यादा रकम की वसूली हो चुकी है, इसलिए इतने लंबे समय से चल रहे मामले को अब समाप्त किया जाना चाहिए। माल्या ने यह भी मांग की है कि मामले के खत्म होने के बाद उन्हें भारत लौटने की अनुमति मिल सके। ED का रुख इसके बिल्कुल विपरीत है। एजेंसी का कहना है कि रकम की रिकवरी के बावजूद आपराधिक कार्यवाही का अपना महत्व है।
कोर्ट ने माल्या को दिया आखिरी मौका…..
सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को यह स्पष्ट करने का आखिरी मौका दिया कि क्या वह भारत लौटकर अदालत के अधिकार क्षेत्र में खुद को पेश करने के लिए तैयार हैं। ऐसे में अब मामले में माल्या की वापसी और उनके खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर बनी हुई है।
2016 से भारत से बाहर हैं माल्या…..
विजय माल्या साल 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। इसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। साल 2019 में उन्हें इस मामले में भगोड़ा घोषित किया गया था। माल्या से जुड़े मामलों में भारतीय एजेंसियां लंबे समय से संपत्तियों की रिकवरी और कानूनी कार्रवाई कर रही हैं। लेकिन ED के ताजा रुख से साफ है कि संपत्तियों या रकम की वसूली को आपराधिक कार्यवाही खत्म करने का आधार नहीं माना जा रहा है।
निष्कर्ष……
विजय माल्या से जुड़ा मामला अब सिर्फ बकाया रकम की वसूली तक सीमित नहीं है। ED का कहना है कि यह आपराधिक कार्यवाही है और रकम की रिकवरी के बावजूद इसे खत्म नहीं किया जा सकता। अब बॉम्बे हाई कोर्ट में माल्या के भारत लौटने और मामले को आगे बढ़ाने को लेकर अगला रुख महत्वपूर्ण होगा।
