यूपी के 250+ युवा क्रिकेटरों ने उठाई 3 रणजी टीमों की मांग, सितंबर में बड़े आंदोलन की तैयारी।

उत्तर प्रदेश में युवा क्रिकेटरों के बीच घरेलू क्रिकेट में अधिक अवसर की मांग अब आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है. लखनऊ के इकाना स्टेडियम में रविवार को 250 से ज्यादा युवा क्रिकेटर्स और उनके अभिभावक एकजुट हुए. इन खिलाड़ियों की मुख्य मांग है कि उत्तर प्रदेश के लिए मौजूदा एक रणजी ट्रॉफी टीम की जगह तीन अलग-अलग रणजी टीमें बनाई जाएं. प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों का तर्क है कि उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी और क्रिकेट खेलने वाले युवाओं की बड़ी संख्या को देखते हुए एक टीम में सभी प्रतिभाओं को पर्याप्त अवसर मिलना मुश्किल है.
यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश क्रिकेट प्लेयर्स एसोसिएशन और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ पूर्वांचल के बैनर तले आयोजित किया गया.
क्यों उठी तीन रणजी टीमों की मांग?
उत्तर प्रदेश देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में से एक है. यहां क्रिकेट खेलने वाले युवाओं की संख्या भी काफी बड़ी है. ऐसे में खिलाड़ियों का कहना है कि राज्य की प्रतिभा को एक ही रणजी टीम के सीमित स्लॉट में समेटना मुश्किल है. प्रदर्शनकारियों का मानना है कि अगर यूपी से तीन रणजी टीमें मैदान में उतरती हैं तो ज्यादा खिलाड़ियों को प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खेलने का अवसर मिलेगा. इससे अलग-अलग क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे आने का मौका मिल सकता है. एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह का कहना है कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाले राज्य के लिए तीन क्रिकेट एसोसिएशन और तीन रणजी टीमों की जरूरत है. उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश में एक से अधिक रणजी टीम बनाए जाने की मांग पहले भी उठती रही है.
पूर्वांचल और मध्य यूपी के खिलाड़ियों की खास शिकायत
इकाना स्टेडियम में हुए प्रदर्शन में मुख्य रूप से पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के युवा क्रिकेटर शामिल हुए. खिलाड़ियों और उनके समर्थकों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है. उनका तर्क है कि अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग क्रिकेट एसोसिएशन और टीमें होने से खिलाड़ियों के पास घरेलू क्रिकेट में अपनी प्रतिभा दिखाने के अधिक मौके होंगे.
उनका मानना है कि किसी खिलाड़ी के लिए सिर्फ प्रतिभाशाली होना पर्याप्त नहीं है. उसे प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने और खुद को साबित करने के लिए लगातार अवसर भी चाहिए.
यूपी टी20 लीग में भी क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर सवाल
युवा क्रिकेटरों की नाराजगी सिर्फ रणजी ट्रॉफी तक सीमित नहीं है. प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश टी20 लीग में खिलाड़ियों के क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाए गए. एसोसिएशन की ओर से दावा किया गया कि लीग में शामिल करीब 150 खिलाड़ियों में पूर्वांचल और मध्य यूपी के केवल 16 खिलाड़ी हैं. वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नौ जिलों से करीब 89 खिलाड़ियों के लीग में शामिल होने का दावा किया गया है. इसके अलावा दिल्ली के भी 8 खिलाड़ियों के लीग का हिस्सा होने की बात कही गई. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर घरेलू क्रिकेट का ढांचा अधिक क्षेत्रों में विभाजित किया जाए तो अलग-अलग इलाकों के खिलाड़ियों को भी अपनी क्षमता दिखाने के पर्याप्त अवसर मिल सकते हैं.
क्या है खिलाड़ियों की मुख्य मांग?
युवा क्रिकेटरों की मांगों को मोटे तौर पर कुछ प्रमुख बिंदुओं में समझा जा सकता है—
- उत्तर प्रदेश में एक की जगह तीन रणजी टीमें बनाई जाएं.
- राज्य में तीन अलग क्रिकेट एसोसिएशन गठित किए जाएं.
- अलग-अलग क्षेत्रों के खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट में ज्यादा अवसर मिले.
- यूपी टी20 लीग में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर संतुलन बनाया जाए.
- युवा खिलाड़ियों के लिए चयन और प्रतिस्पर्धी क्रिकेट के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं.
खिलाड़ियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी क्षेत्र या खिलाड़ी के खिलाफ जाना नहीं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिलाना है.
सितंबर में बड़े आंदोलन की तैयारी
लखनऊ में हुआ प्रदर्शन इस अभियान की शुरुआत बताया जा रहा है. एसोसिएशन ने सितंबर में इससे बड़े आंदोलन की तैयारी की बात कही है. इसके लिए उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से युवा क्रिकेटरों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है. खास तौर पर Gen-Z क्रिकेटरों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की जा रही है. अगर सितंबर में आंदोलन बड़े स्तर पर होता है तो यह मुद्दा उत्तर प्रदेश के घरेलू क्रिकेट ढांचे को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकता है.
खिलाड़ियों के लिए क्यों जरूरी है ज्यादा घरेलू क्रिकेट?
किसी भी युवा क्रिकेटर के लिए घरेलू क्रिकेट उच्च स्तर तक पहुंचने का महत्वपूर्ण रास्ता होता है. रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे चलकर भारत ए, आईपीएल और राष्ट्रीय टीम के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने का अवसर मिलता है. लेकिन एक टीम में खिलाड़ियों की संख्या सीमित होने के कारण बड़ी संख्या में प्रतिभाओं को प्रतिस्पर्धी प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिल पाता. यही वजह है कि प्रदर्शन कर रहे युवा क्रिकेटरों का मानना है कि यूपी जैसे विशाल राज्य को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर अधिक टीमें बनाई जाएं तो घरेलू क्रिकेट का दायरा बढ़ सकता है.
क्या तीन रणजी टीमों से बढ़ेंगे अवसर?
खिलाड़ियों का दावा है कि तीन रणजी टीम बनने से चयन के लिए उपलब्ध स्थानों की संख्या बढ़ेगी. इसका सीधा फायदा उन युवा खिलाड़ियों को मिल सकता है जो मौजूदा व्यवस्था में प्रतिभा होने के बावजूद टीम में जगह नहीं बना पाते. हालांकि तीन टीम बनाने का फैसला सिर्फ खिलाड़ियों की मांग से नहीं होगा. इसके लिए संबंधित क्रिकेट प्रशासन और भारतीय घरेलू क्रिकेट व्यवस्था के स्तर पर कई पहलुओं पर विचार करना होगा. टीमों की संख्या बढ़ाने के साथ उनके संचालन, वित्तीय व्यवस्था, मैदान, कोचिंग स्टाफ, चयन प्रक्रिया और घरेलू क्रिकेट के ढांचे से जुड़े कई सवाल भी सामने आएंगे.
सिर्फ टीमों की संख्या नहीं, अवसर की लड़ाई
इस पूरे आंदोलन को केवल तीन रणजी टीमों की मांग के रूप में देखना सही नहीं होगा. युवा खिलाड़ियों की सबसे बड़ी चिंता अवसर और प्रतिनिधित्व को लेकर है. एक युवा क्रिकेटर कई साल तक अभ्यास करता है, स्थानीय और जिला स्तर पर खेलता है और इसके बाद उसे राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका मिलता है. अगर राज्य टीम में जगह सीमित हो तो कई खिलाड़ियों का सफर आगे बढ़ने से पहले ही रुक सकता है.
प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों का कहना है कि अगर घरेलू क्रिकेट का ढांचा ज्यादा व्यापक होगा तो प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का बेहतर रास्ता मिलेगा. लखनऊ के इकाना स्टेडियम में हुए प्रदर्शन के बाद अब नजरें इस बात पर हैं कि संबंधित क्रिकेट प्रशासन इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है. सितंबर में प्रस्तावित बड़े आंदोलन से पहले खिलाड़ियों की आवाज और मजबूत होती है या नहीं, यह भी देखने वाली बात होगी. फिलहाल यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश के युवा क्रिकेटरों ने घरेलू क्रिकेट में अधिक अवसर और बेहतर क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया है.
