🗳️ तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा अपडेट! TVK गठबंधन का नाम रखा गया 'सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस'। बैठक से CPM-CPI ने दूरी बनाई, वहीं कांग्रेस और TVK के बीच राष्ट्रीय नेतृत्व को लेकर खटपट भी सामने आई।

तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। टीवीके यानी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के नेतृत्व वाले गठबंधन का आधिकारिक नाम ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस’ रखा गया है। चेन्नई के पनैयूर स्थित TVK मुख्यालय में हुई गठबंधन समन्वय बैठक के दौरान इस नाम की घोषणा की गई।
किन दलों के साथ गठबंधन…..?
बैठक में कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं की मौजूदगी की बात सामने आई है। गठबंधन का नया नाम इसके राजनीतिक एजेंडे में धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय और चुनावी जीत पर जोर को दर्शाता है। TVK प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने सहयोगी दलों के नेताओं के साथ गठबंधन को लेकर चर्चा की। यह बैठक सहयोगी दलों के साथ उनकी दूसरी महत्वपूर्ण बैठक बताई जा रही है।
CPM और CPI ने बैठक से बनाई दूरी…..
गठबंधन की बैठक में वाम दलों की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। CPM और CPI ने बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया। बताया गया कि यह 1 जुलाई के बाद औपचारिक गठबंधन वार्ता से उनकी लगातार दूसरी दूरी है। CPM की ओर से कहा गया कि वाम दल मुद्दों के आधार पर बाहरी समर्थन देने के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। उनका उद्देश्य विधानसभा में स्थिरता बनाए रखना बताया गया है।
कांग्रेस और TVK के बीच क्यों बढ़ा तनाव…..?
गठबंधन के बीच राष्ट्रीय नेतृत्व को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं। TVK के कुछ नेताओं और विधायकों की ओर से विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए संभावित प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताए जाने पर तमिलनाडु कांग्रेस के नेताओं ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता एस. राजेश कुमार ने कहा कि राहुल गांधी राष्ट्रीय विपक्षी गठबंधन के निर्विवाद नेता हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस स्थिति को कमजोर करने वाली किसी भी कोशिश का असर राज्य में कांग्रेस की राजनीतिक भागीदारी पर पड़ सकता है।
TVK ने विवाद को शांत करने की कोशिश की…..
विवाद बढ़ने के बाद TVK नेतृत्व ने सफाई देते हुए कहा कि विजय को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने से जुड़ी टिप्पणियां पार्टी विधायकों की व्यक्तिगत राय थीं। यानी पार्टी ने फिलहाल इन बयानों को आधिकारिक रुख मानने से दूरी बनाई है। गठबंधन का नाम तय होने के बाद अब निगाहें सीट बंटवारे, साझा रणनीति और चुनावी अभियान पर रहेंगी। तमिलनाडु की राजनीति में यह गठबंधन आने वाले चुनाव में कितना प्रभाव डालता है, यह देखने वाली बात होगी।
