अनशन के बाद क्या तुरंत भरपेट खाना सुरक्षित है? जानिए लंबे समय तक भूखे रहने के बाद शरीर कैसे रिएक्ट करता है

सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चली अपनी भूख हड़ताल (Hunger Strike) समाप्त कर दी है। सरकार की ओर से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करने के लिखित आश्वासन के बाद उन्होंने अपना अनशन खत्म करने का फैसला लिया। हालांकि, उनके अनशन समाप्त करने के बाद एक सवाल तेजी से चर्चा में है—क्या 26 दिन तक भूखे रहने के बाद कोई व्यक्ति अचानक सामान्य या भरपेट भोजन कर सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, इसका जवाब है ‘नहीं’। लंबे समय तक उपवास या भूख हड़ताल के बाद अचानक अधिक मात्रा में खाना खाना शरीर के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
लंबे समय तक भूखे रहने पर शरीर में क्या बदलाव होते हैं?
जब कोई व्यक्ति कई दिनों तक पर्याप्त भोजन नहीं करता, तो शरीर धीरे-धीरे “स्टार्वेशन मोड” में चला जाता है। इस अवस्था में शरीर ऊर्जा बचाने के लिए अपने मेटाबॉलिज्म की गति कम कर देता है। शुरुआत में शरीर कार्बोहाइड्रेट का उपयोग करता है, लेकिन भोजन न मिलने पर ऊर्जा के लिए पहले शरीर में जमा वसा (Fat) और बाद में मांसपेशियों के प्रोटीन का उपयोग करना शुरू कर देता है।
इस दौरान शरीर में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लगती है, जिनमें शामिल हैं:
- फॉस्फोरस
- पोटेशियम
- मैग्नीशियम
- कैल्शियम
- थायमिन (Vitamin B1)
अनशन के बाद अचानक भरपेट खाना खाने से क्या होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक भूखे रहने के बाद यदि कोई व्यक्ति अचानक अधिक मात्रा में भोजन कर लेता है, तो शरीर उसे सामान्य तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाता। जैसे ही भोजन शरीर में पहुंचता है, इंसुलिन का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। इससे इलेक्ट्रोलाइट्स खून से निकलकर कोशिकाओं के अंदर तेजी से पहुंचने लगते हैं। परिणामस्वरूप खून में इन जरूरी तत्वों की कमी हो जाती है। यही स्थिति रीफीडिंग सिंड्रोम कहलाती है, जो गंभीर मामलों में जानलेवा भी हो सकती है।
क्या है रीफीडिंग सिंड्रोम ?
रीफीडिंग सिंड्रोम एक गंभीर मेडिकल स्थिति है, जो लंबे समय तक कुपोषण या भूखे रहने के बाद दोबारा भोजन शुरू करने पर विकसित हो सकती है। इस दौरान शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स और तरल पदार्थों का संतुलन अचानक बिगड़ जाता है, जिससे कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं।
किन अंगों पर पड़ सकता है असर?
- हृदय
- फेफड़े
- मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र
- मांसपेशियां
- रक्त संचार प्रणाली
- किडनी
- पाचन तंत्र
लंबे उपवास के बाद भोजन कैसे शुरू किया जाता है?
डॉक्टरों के अनुसार, लंबे उपवास या भूख हड़ताल के बाद भोजन हमेशा मेडिकल निगरानी में शुरू किया जाना चाहिए।
आमतौर पर शुरुआत इन चीजों से की जाती है:
- तरल पदार्थ
- इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति
- हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन
- कम मात्रा में बार-बार भोजन
- जरूरत पड़ने पर विटामिन B1 (थायमिन) और अन्य सप्लीमेंट
भोजन की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जाती है ताकि शरीर सुरक्षित तरीके से सामान्य स्थिति में लौट सके।
किन लोगों में रीफीडिंग सिंड्रोम का खतरा ज्यादा होता है?
- लंबे समय तक भूखे रहने वाले लोग
- भूख हड़ताल या लंबे उपवास करने वाले
- कुपोषण के शिकार मरीज
- एनोरेक्सिया जैसे ईटिंग डिसऑर्डर से पीड़ित लोग
- कैंसर मरीज
- अनियंत्रित डायबिटीज के मरीज
- सीलिएक डिजीज या इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज के मरीज
- लंबे समय तक शराब का सेवन करने वाले
- कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी ले रहे मरीज
- लंबे समय तक IV न्यूट्रिशन पर रहने वाले मरीज
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि किसी व्यक्ति ने लंबे समय तक उपवास, भूख हड़ताल या कुपोषण की स्थिति का सामना किया है, तो भोजन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
