सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद अन्ना हजारे उनके समर्थन में सामने आए।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में आए अन्ना हजारे, सरकार से बोले- संवाद कीजिए, सब्र की परीक्षा न लेंकी भूख हड़ताल और स्वास्थ्य को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। इसी बीच प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार को संवाद का रास्ता अपनाने की सलाह दी है।
अन्ना हजारे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होता है और सरकार को किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते पहल करनी चाहिए।
अन्ना हजारे ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के रालेगन सिद्धी में न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में अन्ना हजारे ने कहा, ‘किसी भी मुद्दे का समाधान सिर्फ चुप्पी साधकर बैठने से नहीं निकलता है. इसके लिए संवाद जरूरी है. सरकार को इस मामले पर अपनी चुप्पी को तोड़ना चाहिए. वह पिछले 20 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं, ऐसे व्यक्ति की सब्र की परीक्षा नहीं लेना ठीक नहीं है. इस मामले पर सरकार संवाद स्थापित करें, अपनी बात भी रखे और सामने वाले पक्ष की भी बात सुने.’
सोनम वांगचुक की बिगड़ी थी तबीयत
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे। स्वास्थ्य लगातार कमजोर होने के बाद उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्रशासन का कहना है कि यह कदम मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह और न्यायिक निर्देशों के अनुरूप उठाया गया था ताकि उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वर्तमान में सोनम वांगचुक का इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखे हुए है। अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद उनके समर्थकों और विभिन्न संगठनों ने चिंता व्यक्त की है तथा उनकी मांगों पर चर्चा शुरू करने की अपील की है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई के बाद कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। कुछ विपक्षी नेताओं ने सरकार से बातचीत शुरू करने और आंदोलनकारियों की चिंताओं को गंभीरता से लेने की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि उनकी प्राथमिकता वांगचुक की स्वास्थ्य सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
अन्ना हजारे ने अपने बयान में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में संवाद सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर बैठें तो समाधान निकालना संभव हो सकता है।उनके अनुसार, किसी भी आंदोलन या विरोध को केवल प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं बल्कि सार्थक संवाद से बेहतर तरीके से संबोधित किया जा सकता है।
