📉 शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन बड़ी गिरावट! निवेशकों को 4 दिनों में 13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का झटका। जानिए आखिर बाजार में बिकवाली क्यों बढ़ी।
By Acharan.in | बिजनेस डेस्क

भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी दिन भी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की सतर्कता ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। शुरुआती कारोबार में BSE सेंसेक्स 239 अंकों से अधिक फिसल गया, जबकि निफ्टी भी गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। ट्रेडिंग के पिछले चार दिनों में निवेशकों की संपत्ति में 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आने का अनुमान है।
क्यों गिर रहा है शेयर बाजार?
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में कमजोरी के पीछे कई बड़े कारण हैं—
- पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव।
- कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत लगभग 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना।
- भारत के आयात बिल और महंगाई बढ़ने की आशंका।
- रुपये पर दबाव और विदेशी निवेशकों की सतर्कता।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने की उम्मीद।
इन सभी कारणों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है।
चार दिनों में 13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान….
लगातार बिकवाली के कारण—
- सेंसेक्स अपने हालिया उच्च स्तर से लगभग 2,200 अंक नीचे आ चुका है।
- निफ्टी में भी 500 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
- निवेशकों की कुल संपत्ति में 13.43 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी का अनुमान लगाया जा रहा है।
बुधवार को सबसे ज्यादा दबाव….
22 जुलाई के कारोबारी सत्र में—
- सेंसेक्स 715 अंक गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ।
- निफ्टी 191 अंक टूटकर 23,996.25 पर बंद हुआ।
- केवल एक दिन में निवेशकों को करीब 4.25 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर?
इस गिरावट का सबसे अधिक असर बैंकिंग, फार्मा और एविएशन सेक्टर पर देखने को मिला।
बैंकिंग सेक्टर
- HDFC Bank के तिमाही नतीजों और नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव के कारण शेयरों में बिकवाली बढ़ी।
फार्मा सेक्टर
- भारतीय जेनेरिक दवाओं पर संभावित अमेरिकी टैरिफ को लेकर चिंता के कारण कई फार्मा शेयर दबाव में रहे।
एविएशन और ऑयल
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से एयरलाइन और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतें क्यों हैं चिंता का विषय?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर—
- आयात बिल बढ़ता है।
- रुपये पर दबाव आता है।
- महंगाई बढ़ सकती है।
- कंपनियों की लागत बढ़ती है।
- आर्थिक विकास की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से निवेशकों में फिलहाल सतर्कता का माहौल है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तेज उतार-चढ़ाव के दौरान घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। निवेशकों को—
- लंबी अवधि की रणनीति पर कायम रहना चाहिए।
- पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए।
- केवल अफवाहों के आधार पर खरीद-बिक्री से बचना चाहिए।
- निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर हो सकता है।
