केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि छात्रों को देश के इतिहास और लोकतंत्र के हर महत्वपूर्ण दौर की जानकारी होनी चाहिए। उनका बयान NCERT की नई कक्षा 9 की किताब में किए गए बदलावों को लेकर चल रही चर्चा के बीच आया है।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की सोशल साइंस की नई पुस्तक में कई अहम बदलाव किए हैं। नई किताब में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को पहली बार शामिल किया गया है। वहीं, संविधान की प्रस्तावना में मौजूद ‘समाजवाद’, ‘धर्मनिरपेक्षता’ और लोकतंत्र की कुछ पारंपरिक व्याख्याओं को पहले की तुलना में अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा, वर्ष 1975 की इमरजेंसी को भी पहली बार कक्षा 9 के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।
संविधान को समझाने का तरीका बदला
नई पुस्तक में संविधान को पहले की तुलना में अलग दृष्टिकोण से समझाया गया है। किताब में इस बात पर अधिक जोर दिया गया है कि संविधान कैसे तैयार हुआ, संविधान सभा की क्या भूमिका रही और लोकतांत्रिक संस्थाएं किस प्रकार कार्य करती हैं।
साथ ही छात्रों को समानता, स्वतंत्रता, मौलिक अधिकार और नागरिक कर्तव्यों की जानकारी भी दी गई है। हालांकि, पहले की पुस्तकों की तरह संविधान की प्रस्तावना और उसमें प्रयुक्त शब्दों की विस्तृत व्याख्या इस संस्करण में प्रमुख रूप से शामिल नहीं की गई है। ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्षता’ जैसे शब्दों की प्रस्तुति भी पहले की तुलना में बदली गई है।
पहली बार पाठ्यक्रम में शामिल हुई इमरजेंसी
नई किताब में वर्ष 1975 में लागू इमरजेंसी को भी शामिल किया गया है। अध्याय में बताया गया है कि उस दौर में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा और किन परिस्थितियों में आपातकाल लागू किया गया था।
NCERT ने इसे लोकतंत्र के सामने आने वाली चुनौतियों को समझाने के एक ऐतिहासिक उदाहरण के रूप में शामिल किया है, ताकि छात्र भारतीय लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
SIR क्या है और इसे क्यों जोड़ा गया?
नई किताब में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision – SIR) की जानकारी भी दी गई है। इसमें चुनाव आयोग की जिम्मेदारियों के साथ यह समझाया गया है कि मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट और सत्यापित करने की प्रक्रिया कैसे होती है।
पुस्तक के अनुसार, SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाए रखना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और विश्वसनीय बनी रहे।
चार विषयों की जगह अब एक ही पुस्तक
इस बार NCERT ने इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र को अलग-अलग पुस्तकों की बजाय एकीकृत सोशल साइंस पुस्तक में शामिल किया है।
परिषद का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्रों को विषयों के बीच बेहतर संबंध समझाना और समग्र दृष्टिकोण विकसित करना है, जिससे वे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों को एक साथ जोड़कर समझ सकें।
शिक्षा मंत्री की क्या है प्रक्रिया
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि छात्रों को देश के इतिहास और लोकतंत्र से जुड़े दूर के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इतिहास के हर महत्वपूर्ण अध्याय को जानना विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
बदलावों पर शुरू हुई बहस
नई पुस्तक में किए गए बदलावों को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा हो रही है। कुछ शिक्षाविद इसे नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण मान रहे हैं, जबकि कुछ राजनीतिक दल और विशेषज्ञ संविधान से जुड़े कुछ विषयों की प्रस्तुति में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
आने वाले समय में इन बदलावों पर शिक्षा जगत और राजनीतिक क्षेत्र में बहस और तेज होने की संभावना है।
