मानसून में पहाड़ों की खूबसूरती बढ़ जाती है, लेकिन ट्रेकिंग का जोखिम भी.

मानसून का मौसम पहाड़ों को हरे-भरे रंगों से भर देता है. बादलों से घिरी चोटियां, झरनों का तेज बहाव, हरियाली से ढकी घाटियां और ठंडी हवाएं ट्रेकिंग के शौकीनों को बेहद आकर्षित करती हैं. यही वजह है कि बारिश के मौसम में कई लोग हिमालय के अलग-अलग ट्रेक पर जाने का प्लान बनाते हैं.
लेकिन पहाड़ों में खूबसूरत मौसम हमेशा सुरक्षित मौसम नहीं होता. जून से सितंबर के बीच भारी बारिश के कारण लैंडस्लाइड, अचानक बाढ़, उफनते नाले, फिसलन, गिरते पत्थर और कम विजिबिलिटी जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं. कई बार कुछ घंटों की तेज बारिश ही किसी ट्रेक के रास्ते की स्थिति बदल देती है.
ऐसे में अगर आप मानसून में ट्रेकिंग की योजना बना रहे हैं तो सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों को देखकर फैसला न लें. ट्रेक की मौजूदा स्थिति, मौसम का पूर्वानुमान, स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी और रास्ते की सुरक्षा के बारे में जानकारी लेना बेहद जरूरी है.
आइए जानते हैं कुछ ऐसे लोकप्रिय ट्रेक्स के बारे में जहां मानसून के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है.
1. हम्पटा पास ट्रेक, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश का हम्पटा पास ट्रेक एडवेंचर और खूबसूरत पहाड़ी नजारों के लिए काफी लोकप्रिय है. यह ट्रेक कुल्लू घाटी को लाहौल क्षेत्र से जोड़ता है. रास्ते में हरे-भरे पहाड़, ऊंची चोटियां, नदियां और बदलता हुआ पहाड़ी लैंडस्केप देखने को मिलता है.
हालांकि, मानसून में यहां परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं. लगातार बारिश के कारण छोटे-बड़े नालों में पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है. कीचड़ और फिसलन के कारण चढ़ाई मुश्किल हो सकती है. बारिश के साथ कोहरा आने पर विजिबिलिटी भी कम हो जाती है. कुछ हिस्सों में पत्थरों के खिसकने और रास्ते के खराब होने का खतरा बढ़ सकता है. ट्रेक तक पहुंचने वाली पहाड़ी सड़कों पर भी लैंडस्लाइड यात्रा को प्रभावित कर सकता है.
2. वैली ऑफ फ्लावर्स ट्रेक, उत्तराखंड
उत्तराखंड की वैली ऑफ फ्लावर्स मानसून के दौरान अपने बेहद खूबसूरत रूप में नजर आती है. इस मौसम में घाटी में कई तरह के फूल खिलते हैं, जिसके कारण यह जगह प्रकृति प्रेमियों के बीच खास आकर्षण रखती है. लेकिन फूलों की खूबसूरती के पीछे पहाड़ी मौसम की चुनौती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. बारिश के दौरान रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं. पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड का खतरा भी बढ़ सकता है. नदियों और झरनों में पानी का स्तर बढ़ने से कुछ क्रॉसिंग चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं. मौसम ज्यादा खराब होने की स्थिति में स्थानीय प्रशासन या वन विभाग की ओर से आवाजाही पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है.
इसलिए वैली ऑफ फ्लावर्स जाने से पहले मौसम, ट्रेल की स्थिति और आधिकारिक एडवाइजरी जरूर जांचें.
3. कश्मीर ग्रेट लेक्स ट्रेक, जम्मू-कश्मीर
कश्मीर ग्रेट लेक्स ट्रेक देश के लोकप्रिय हाई-एल्टीट्यूड ट्रेक्स में शामिल है. रास्ते में हरे-भरे घास के मैदान, ऊंचे पहाड़ और खूबसूरत झीलें देखने को मिलती हैं. मानसून के दौरान यहां मौसम तेजी से बदल सकता है. बारिश के बाद घास और मिट्टी वाले ढलान बेहद फिसलन भरे हो सकते हैं. वहीं, बादल और कोहरा छाने के बाद दूर तक देख पाना मुश्किल हो सकता है.
रास्ते में आने वाले छोटे-बड़े नालों में बारिश के बाद पानी का बहाव बढ़ सकता है. दूर-दराज के कैंपिंग क्षेत्रों में खराब मौसम की स्थिति में पहुंचना भी मुश्किल हो सकता है. हाई एल्टीट्यूड और लंबे ट्रेकिंग दिनों को देखते हुए इस तरह के रूट पर मौसम की स्थिरता को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है.
4. रूपकुंड ट्रेक, उत्तराखंड
उत्तराखंड का रूपकुंड ट्रेक अपनी ऊंचाई, रहस्यमयी झील और कठिन पहाड़ी रास्तों के लिए प्रसिद्ध है. इस रूट में खड़ी चढ़ाई और पथरीले हिस्से शामिल हैं, इसलिए सामान्य मौसम में भी यह शुरुआती ट्रेकर्स के लिए आसान विकल्प नहीं माना जाता. मानसून में लगातार बारिश के कारण फिसलन और ढीले पत्थरों का खतरा बढ़ सकता है. कई जगहों पर घना कोहरा विजिबिलिटी को प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा, रूपकुंड क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों और पहुंच को लेकर समय-समय पर प्रतिबंध या बदलाव हो सकते हैं. इसलिए यहां जाने से पहले मौजूदा सरकारी नियम, परमिट और ट्रेकिंग की अनुमति की जानकारी लेना जरूरी है.
5. संदकफू ट्रेक, पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल का संदकफू ट्रेक हिमालय के शानदार दृश्यों के लिए जाना जाता है. साफ मौसम में यहां से माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, ल्होत्से और मकालू जैसी ऊंची चोटियों के दृश्य दिखाई दे सकते हैं. लेकिन मानसून के दौरान लगातार बारिश के कारण जंगलों से गुजरने वाले रास्ते कीचड़ से भर सकते हैं. फिसलन के साथ-साथ जोंक की समस्या भी बढ़ सकती है. घने बादलों और कोहरे की वजह से हिमालय की चोटियां दिखाई न देना भी आम बात हो सकती है. इसके अलावा, शुरुआती हिस्सों तक पहुंचने वाली पहाड़ी सड़कों पर लैंडस्लाइड के कारण यात्रा प्रभावित हो सकती है.
अगर आप मानसून में संदकफू जाने की योजना बना रहे हैं तो स्थानीय मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी पहले जरूर लें.
मानसून में ट्रेकिंग के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
अगर बारिश के मौसम में ट्रेकिंग करना जरूरी है, तो कुछ बुनियादी सावधानियां आपकी यात्रा को सुरक्षित बनाने में मदद कर सकती हैं.
मौसम की जानकारी पहले लें
ट्रेक शुरू करने से पहले मौसम का पूर्वानुमान देखें. सिर्फ ट्रेक के बेस कैंप का मौसम न देखें, बल्कि पूरे रूट की परिस्थितियों की जानकारी लें.
स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी देखें
भारी बारिश या लैंडस्लाइड की स्थिति में कई ट्रेकिंग रूट अस्थायी रूप से बंद किए जा सकते हैं. किसी भी ट्रेक पर जाने से पहले स्थानीय प्रशासन, वन विभाग या संबंधित ट्रेक प्राधिकरण की ताजा जानकारी जरूर जांचें.
वॉटरप्रूफ सामान रखें
बारिश में कपड़े, मोबाइल, पावर बैंक, मेडिकल किट और जरूरी दस्तावेज गीले हो सकते हैं. इसलिए इन्हें वाटरप्रूफ बैग या ड्राई बैग में रखें.
फिसलन वाले रास्तों पर जल्दबाजी न करें
गीली चट्टानों और कीचड़ वाले रास्तों पर एक छोटी सी गलती भी चोट का कारण बन सकती है. ऐसे हिस्सों में धीरे चलें और उचित ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज पहनें.
अकेले ट्रेकिंग करने से बचें
खासकर मानसून में अनजान और हाई-एल्टीट्यूड रूट पर अकेले जाना जोखिम बढ़ा सकता है. अनुभवी गाइड या भरोसेमंद ट्रेकिंग ग्रुप के साथ जाना बेहतर विकल्प हो सकता है.
नदी और नालों को पार करते समय सावधानी रखें
बारिश के बाद पहाड़ी नालों का पानी अचानक बढ़ सकता है. तेज बहाव दिखाई दे तो उसे पार करने की कोशिश न करें.
प्लान B जरूर रखें
मानसून में मौसम कुछ घंटों में बदल सकता है. इसलिए यात्रा का वैकल्पिक प्लान रखें और जरूरत पड़ने पर ट्रेक रद्द करने या वापस लौटने के लिए तैयार रहें.
खूबसूरत नजारे जरूरी हैं, लेकिन सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी
मानसून में पहाड़ों की खूबसूरती किसी को भी आकर्षित कर सकती है, लेकिन ट्रेकिंग के दौरान मौसम और रास्ते की स्थिति को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. खासकर हाई-एल्टीट्यूड ट्रेक्स पर मौसम तेजी से बदल सकता है. अगर मौसम खराब हो, प्रशासन ने चेतावनी जारी की हो या रास्ता असुरक्षित नजर आए तो सिर्फ ट्रेक पूरा करने के लिए जोखिम न लें. पहाड़ कहीं नहीं जा रहे, लेकिन आपकी सुरक्षा सबसे पहले है.
इसलिए मानसून ट्रेकिंग का प्लान बनाने से पहले मौसम, स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी, ट्रेल की मौजूदा स्थिति और अपनी फिटनेस को ध्यान में रखें. सही तैयारी के साथ ही पहाड़ों की खूबसूरती का आनंद सुरक्षित तरीके से लिया जा सकता है.
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है. ट्रेकिंग की स्थिति, मौसम और स्थानीय नियम समय के साथ बदल सकते हैं. यात्रा से पहले संबंधित प्रशासन, वन विभाग, स्थानीय गाइड और आधिकारिक स्रोतों से ताजा जानकारी जरूर प्राप्त करें.
