भारत के ये 3 दिग्गज क्रिकेटर खूब चमके, लेकिन कभी नहीं जीत पाए वर्ल्ड कप!

क्रिकेटर के लिए देश का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में गर्व की बात होती है, लेकिन जब बात वर्ल्ड कप जीतने की आती है तो यह सपना और भी खास हो जाता है. भारतीय क्रिकेट ने अब तक वनडे वर्ल्ड कप में दो बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है. 1983 में कपिल देव की कप्तानी में भारत ने पहली बार खिताब जीता, जबकि 2011 में एमएस धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया ने दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की. हालांकि, भारतीय क्रिकेट के कई महान खिलाड़ी ऐसे भी रहे, जिन्होंने अपने शानदार करियर में कई उपलब्धियां हासिल कीं, लेकिन वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उनके हाथ नहीं लग सकी. इनमें सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और मोहम्मद अजहरुद्दीन प्रमुख नाम हैं.
1. सौरव गांगुली
भारतीय क्रिकेट में सौरव गांगुली को एक बेहतरीन कप्तान और शानदार वनडे बल्लेबाज के तौर पर याद किया जाता है. उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने विदेशी जमीन पर भी कई बड़ी टीमों को कड़ी चुनौती दी और भारतीय क्रिकेट को एक आक्रामक अंदाज दिया.
गांगुली ने अपने करियर में 1999, 2003 और 2007 के वनडे वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया. इनमें 2003 का टूर्नामेंट उनके और भारतीय टीम के लिए सबसे खास रहा. 2003 वर्ल्ड कप में गांगुली की कप्तानी में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई. टीम ने टूर्नामेंट के दौरान कई मजबूत टीमों को हराया और फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के सामने पहुंची. लेकिन फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 125 रन से हरा दिया. इस हार के साथ गांगुली की कप्तानी में वर्ल्ड कप जीतने का सपना अधूरा रह गया. गांगुली ने अपने तीन वर्ल्ड कप में कुल 22 मैचों में 1,066 रन बनाए. उनका औसत करीब 56 का रहा. 2003 के टूर्नामेंट में उन्होंने तीन शतक भी लगाए थे. गांगुली की कप्तानी में भारत फाइनल तक पहुंचा, लेकिन खिताब से दूर रह गया.
2. राहुल द्रविड़
राहुल द्रविड़ को क्रिकेट की दुनिया में ‘द वॉल’ के नाम से जाना जाता है. टेस्ट क्रिकेट में अपनी तकनीक और धैर्य के लिए मशहूर द्रविड़ ने वनडे क्रिकेट में भी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. द्रविड़ ने 1999, 2003 और 2007 के वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया. 1999 का वर्ल्ड कप उनके लिए खास तौर पर यादगार रहा.
1999 में द्रविड़ ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ आठ मैचों में 461 रन बनाए और टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. उनके बल्ले से दो शतक और तीन अर्धशतक निकले. 2003 वर्ल्ड कप में भी द्रविड़ भारतीय टीम के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल थे. भारत ने उस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल तक पहुंचा. द्रविड़ ने 11 मैचों में 318 रन बनाए.
लेकिन फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत को हार का सामना करना पड़ा. इस हार के साथ द्रविड़ के करियर में भी वर्ल्ड कप ट्रॉफी की कमी बनी रही. 2007 का वर्ल्ड कप भारतीय टीम के लिए निराशाजनक रहा और टीम ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई. इसके बाद द्रविड़ के वर्ल्ड कप जीतने का सपना पूरा नहीं हो सका.
3. मोहम्मद अजहरुद्दीन
मोहम्मद अजहरुद्दीन भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने लंबे समय तक टीम इंडिया की कप्तानी की. अपनी शानदार बल्लेबाजी और कप्तानी के लिए मशहूर अजहरुद्दीन ने भारत की ओर से तीन वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया. अजहरुद्दीन ने 1992, 1996 और 1999 के वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की कप्तानी की.
1992 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और टीम ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ सकी. इसके बाद 1996 में भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया और सेमीफाइनल तक पहुंचा. 1996 के सेमीफाइनल में भारत का सामना श्रीलंका से हुआ. यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए बेहद निराशाजनक रहा और हार के साथ उसका टूर्नामेंट खत्म हो गया.
1999 वर्ल्ड कप में भी भारतीय टीम फाइनल तक नहीं पहुंच सकी. टीम सुपर सिक्स चरण तक गई, लेकिन खिताबी मुकाबले में जगह बनाने में नाकाम रही. अजहरुद्दीन ने अपने तीन वर्ल्ड कप में कुल 22 मैच खेले और 665 रन बनाए. उनका बल्लेबाजी औसत 44.33 रहा.
वर्ल्ड कप जीतना क्यों होता है इतना खास?
वर्ल्ड कप जीतना किसी भी क्रिकेटर के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है. खिलाड़ी कई साल तक देश के लिए खेलता है, लेकिन विश्व चैंपियन बनने का मौका हर किसी को नहीं मिलता.
वर्ल्ड कप की ट्रॉफी भले ही इन तीनों दिग्गजों के हाथ नहीं लगी, लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान और उनकी उपलब्धियों को कभी भुलाया नहीं जा सकता.
