वनडे में क्यों नहीं चल पाया सूर्यकुमार यादव का बल्ला? खुद सूर्या ने खोला राज और अपनी गलती भी मानी।

सूर्यकुमार यादव का नाम जब भी भारतीय क्रिकेट के सबसे खतरनाक टी20 बल्लेबाजों में लिया जाता है, तो उनका जिक्र जरूर होता है. मैदान के चारों तरफ शॉट खेलने की क्षमता और मुश्किल गेंदों को भी आसानी से बाउंड्री के पार पहुंचाने के अंदाज ने उन्हें टी20 क्रिकेट का खास बल्लेबाज बनाया. हालांकि, वनडे क्रिकेट में सूर्यकुमार यादव का करियर उनकी टी20 सफलता के मुकाबले काफी अलग रहा. उन्होंने भारत के लिए 37 वनडे मैच खेले, लेकिन इस फॉर्मेट में वह अपनी जगह लंबे समय तक पक्की नहीं कर सके.
अब सूर्यकुमार यादव ने खुद अपने वनडे करियर को लेकर खुलकर बात की है. उन्होंने माना कि वनडे फॉर्मेट को समझने और उसके हिसाब से अपनी बल्लेबाजी तैयार करने के लिए उन्होंने उतनी मेहनत नहीं की, जितनी उन्हें करनी चाहिए थी.
30 साल की उम्र में हुआ था इंटरनेशनल डेब्यू
सूर्यकुमार यादव ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपेक्षाकृत देर से कदम रखा. उन्होंने करीब 30 साल की उम्र में अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया.
सूर्या का मानना है कि अगर उन्हें 2016 के आसपास ही भारतीय टीम में आने का मौका मिल गया होता, तो शायद उनका टेस्ट और वनडे करियर अलग दिशा में जा सकता था.
उन्होंने अपने करियर को पीछे मुड़कर देखते हुए स्वीकार किया कि देर से इंटरनेशनल क्रिकेट में आने की वजह से उन्हें खुद को अलग-अलग फॉर्मेट के मुताबिक ढालने के लिए कम समय मिला.
वनडे में 37 मैच, 773 रन
सूर्यकुमार यादव ने भारत के लिए कुल 37 वनडे मुकाबले खेले हैं. इन मैचों में उनके बल्ले से 773 रन निकले. वनडे में उनका सर्वाधिक स्कोर 72 रन रहा. आंकड़ों के लिहाज से यह प्रदर्शन उनकी टी20 उपलब्धियों की तुलना में काफी साधारण नजर आता है.
सूर्या ने आखिरी बार भारत के लिए वनडे मुकाबला 2023 वनडे वर्ल्ड कप फाइनल में खेला था. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उस मुकाबले में वह सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और 18 रन ही बना सके. इसके बाद वह भारतीय वनडे टीम में वापसी नहीं कर सके.
खुद को बताया वनडे में असफलता का जिम्मेदार
सूर्यकुमार यादव ने अपने वनडे करियर को लेकर किसी और को जिम्मेदार ठहराने के बजाय खुद की कमियों को स्वीकार किया.
एक बातचीत के दौरान उन्होंने माना कि उन्होंने वनडे फॉर्मेट को उतनी गंभीरता से नहीं समझा, जितनी जरूरत थी. सूर्या के मुताबिक, उन्हें पता था कि वनडे में उन्हें आमतौर पर नंबर 5 या नंबर 6 के आसपास बल्लेबाजी करनी होगी. इसके बावजूद उन्होंने इस फॉर्मेट की मांग के हिसाब से अपनी बल्लेबाजी को विकसित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए. उनका मानना है कि टी20 और वनडे दोनों व्हाइट-बॉल क्रिकेट हैं, लेकिन दोनों फॉर्मेट में बल्लेबाजी की जरूरत अलग-अलग होती है. सूर्यकुमार यादव ने अपनी बात रखते हुए माना कि वनडे क्रिकेट में सफल होने के लिए उन्हें ज्यादा तैयारी करनी चाहिए थी. उनके मुताबिक, उन्होंने वनडे फॉर्मेट का सही तरीका निकालने की कोशिश उतनी नहीं की, जितनी करनी चाहिए थी. यही वजह रही कि टी20 में लगातार सफल होने के बावजूद वह वनडे टीम में अपनी जगह स्थायी नहीं बना पाए.
उनकी यह स्वीकारोक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खिलाड़ी अक्सर खराब प्रदर्शन के लिए परिस्थितियों या चयन को जिम्मेदार बताते हैं. लेकिन सूर्या ने अपने वनडे करियर की कमियों को खुद स्वीकार किया.
टेस्ट क्रिकेट में भी नहीं बना पाए जगह
सूर्यकुमार यादव को टेस्ट क्रिकेट में भी ज्यादा मौके नहीं मिले. उन्होंने भारत के लिए सिर्फ एक टेस्ट मैच खेला.
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2023 में खेले गए उस टेस्ट मैच की एक पारी में सूर्यकुमार सिर्फ 8 रन बना सके. इसके बाद टेस्ट टीम में उनकी जगह नहीं बन पाई. सूर्या ने माना कि उस मुकाबले के बाद दूसरे खिलाड़ियों ने अपनी जगह वापस हासिल कर ली और वह खुद टीम में अपना स्थान सुरक्षित नहीं कर सके.
टी20 में रहा शानदार प्रदर्शन
जहां वनडे और टेस्ट क्रिकेट में सूर्यकुमार यादव का सफर ज्यादा लंबा नहीं रहा, वहीं टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में उन्होंने जबरदस्त सफलता हासिल की. सूर्या ने अब तक 113 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 3,272 रन बनाए हैं. उनके इंटरनेशनल करियर की सभी चार शतकीय पारियां टी20 फॉर्मेट में आई हैं.
उनकी 360 डिग्री बल्लेबाजी ने उन्हें टी20 क्रिकेट में अलग पहचान दिलाई. मैदान के पीछे, स्क्वायर लेग, कवर और विकेट के सामने अलग-अलग तरह के शॉट खेलने की उनकी क्षमता ने उन्हें दुनिया के प्रमुख टी20 बल्लेबाजों में शामिल किया.
