कच्चा तेल फिर हुआ महंगा! ⛽📈 ब्रेंट 108 डॉलर के पार, क्या अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बढ़ेंगी?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और तेल की सप्लाई को लेकर बनी चिंताओं के बीच सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत में 3 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। इससे भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे। घरेलू ईंधन कीमतों पर कई अन्य कारकों का भी असर होता है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो तेल कंपनियों पर कीमतों को लेकर दबाव जरूर बढ़ सकता है।
108 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड…..
सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3.3 फीसदी बढ़कर 108.04 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 3.5 फीसदी चढ़कर 103.54 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले सप्ताह भी कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 9 फीसदी की तेजी देखने को मिली थी। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया था। जुलाई के बाद यह पहली बार था जब ब्रेंट 100 डॉलर के ऊपर पहुंचा।
वेस्ट एशिया के तनाव का असर…..
कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी की बड़ी वजह वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव बताया जा रहा है। हालिया हमलों के बाद तेल की सप्लाई और शिपिंग रूट को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है। तेल बाजार में किसी भी बड़े सप्लाई व्यवधान की आशंका कीमतों को ऊपर ले जा सकती है। यही वजह है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव दिखाई दे रहा है।
क्या 120 डॉलर तक पहुंच सकता है तेल…..?
बाजार में यह आशंका भी जताई जा रही है कि अगर युद्ध और सप्लाई से जुड़ी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहीं तो ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इसके अलावा रूस की रिफाइनरी में रुकावट और तेल के घटते भंडार जैसी परिस्थितियां भी बाजार पर दबाव बढ़ा सकती हैं। 120 डॉलर का स्तर अभी एक संभावित परिदृश्य है, निश्चित कीमत नहीं।
महंगा कच्चा तेल बढ़ा सकता है महंगाई का दबाव……
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। महंगा ईंधन परिवहन लागत को बढ़ा सकता है, जिसका असर सामान की ढुलाई और कई उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है। इसके अलावा बिजली उत्पादन और पेट्रोकेमिकल से जुड़े क्षेत्रों पर भी महंगे तेल का असर पड़ सकता है। ऐसे में अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल……?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने की संभावना पर चर्चा जरूर शुरू हो गई है। लेकिन घरेलू पेट्रोल-डीजल के दाम केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत के आधार पर तय नहीं होते। तेल कंपनियों की लागत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, टैक्स और अन्य बाजार परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पेट्रोल-डीजल की कीमत कब और कितनी बढ़ेगी। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती है, तो आने वाले समय में घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
आगे बाजार पर रहेगी नजर……
वेस्ट एशिया में तनाव, वैश्विक तेल सप्लाई और रूस की रिफाइनरी से जुड़ी परिस्थितियां आने वाले दिनों में कच्चे तेल की दिशा तय करने में अहम हो सकती हैं। अगर सप्लाई संबंधी चिंताएं कम होती हैं तो कीमतों में राहत आ सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने पर तेल और महंगा होने का जोखिम बना रहेगा। ऐसे में भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर आने वाले दिनों में तेल बाजार और घरेलू तेल कंपनियों के फैसलों पर नजर रहेगी।
