बदल रही है भारतीयों की खाने की थाली! अब स्वाद के साथ प्रोटीन, फाइबर और पोषण पर भी बढ़ा फोकस।

भारत में खाने की पसंद तेजी से बदल रही है। पहले जहां भोजन चुनते समय स्वाद, कीमत और पेट भरने को ज्यादा महत्व दिया जाता था, वहीं अब लोग यह भी देखने लगे हैं कि उनकी प्लेट में कितना प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और अन्य पोषक तत्व मौजूद हैं। फिटनेस और हेल्थ को लेकर बढ़ती जागरूकता का असर अब भारतीय फूड मार्केट पर भी दिखाई दे रहा है। प्लांट-बेस्ड फूड, हाई-प्रोटीन प्रोडक्ट्स, फंक्शनल फूड और न्यूट्रास्युटिकल्स जैसे विकल्प तेजी से लोगों के बीच जगह बना रहे हैं। इस बदलाव का असर आने वाले वर्षों में घर की रसोई से लेकर सुपरमार्केट और ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म तक दिखाई दे सकता है।
कैलोरी से आगे बढ़कर पोषण पर नजर
कुछ समय पहले तक हेल्दी खाने की चर्चा में सबसे ज्यादा ध्यान कम कैलोरी वाले भोजन पर दिया जाता था। लेकिन अब लोगों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। खासतौर पर युवाओं और फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोगों के बीच प्रोटीन को लेकर जागरूकता बढ़ी है। जिम जाने वाले लोगों के अलावा आम परिवार भी अपनी रोजाना की डाइट में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करने पर ध्यान दे रहे हैं।
दाल, दूध, दही, पनीर, सोया और अन्य पारंपरिक खाद्य पदार्थ लंबे समय से भारतीय डाइट का हिस्सा रहे हैं। अब इनके साथ बाजार में प्रोटीन ड्रिंक्स, हाई-प्रोटीन स्नैक्स और दूसरे प्रोटीन आधारित उत्पादों की नई श्रेणियां भी तेजी से बढ़ रही हैं।
प्लांट-बेस्ड फूड की बढ़ती लोकप्रियता
भारतीय फूड मार्केट में प्लांट-बेस्ड फूड एक महत्वपूर्ण ट्रेंड बनकर उभर रहा है। इस तरह के खाद्य उत्पादों में पौधों से मिलने वाली सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। सोया, मटर, दाल और दूसरे पौधों से मिलने वाले प्रोटीन का उपयोग कई तरह के प्लांट-बेस्ड प्रोडक्ट बनाने में किया जा रहा है। इनमें प्लांट-बेस्ड मीट, प्रोटीन स्नैक्स और अन्य वैकल्पिक खाद्य उत्पाद शामिल हैं। प्लांट-बेस्ड फूड की मांग बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। कुछ लोग मांस का सेवन कम करना चाहते हैं, कुछ लोग पर्यावरण से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हैं, जबकि कई उपभोक्ता अपनी डाइट में अलग-अलग प्रोटीन स्रोत जोड़ना चाहते हैं।
भारत में तेजी से बढ़ रहा प्लांट-बेस्ड फूड सेक्टर
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार भारत में प्लांट-बेस्ड फूड सेक्टर की वृद्धि वैश्विक औसत से तेज हो सकती है। बताए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्लांट-बेस्ड फूड सेक्टर करीब 18 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रहा है, जबकि वैश्विक स्तर पर इसकी वृद्धि करीब 7-8 प्रतिशत बताई गई है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में भारतीय बाजार में प्लांट-बेस्ड विकल्पों की संख्या और उपलब्धता बढ़ सकती है।
हालांकि किसी भी प्रोडक्ट को सिर्फ ‘प्लांट-बेस्ड’ या ‘हेल्दी’ लिखे होने के आधार पर बेहतर नहीं मानना चाहिए। खरीदारी करते समय उसके प्रोटीन, फाइबर, शुगर, सोडियम, फैट और कुल कैलोरी की जानकारी भी देखना जरूरी है।
पांच साल में दोगुना हो सकता है प्लांट प्रोटीन बाजार
भारत में प्लांट-प्रोटीन इनग्रेडिएंट्स का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है। उपलब्ध उद्योग आंकड़ों के मुताबिक यह बाजार फिलहाल करीब 4,500 करोड़ रुपये का है और अगले पांच वर्षों में इसके लगभग दोगुना होने की संभावना जताई गई है। इस बाजार से जुड़ी एक अहम बात यह है कि भारत में इस्तेमाल होने वाले प्लांट-प्रोटीन इनग्रेडिएंट्स का बड़ा हिस्सा फिलहाल विदेशों से आता है।
अगर देश में इन सामग्री का उत्पादन और प्रोसेसिंग बढ़ती है तो इससे घरेलू फूड इंडस्ट्री को फायदा मिल सकता है। इसके साथ ही भारतीय उपभोक्ताओं के लिए नए और अलग-अलग प्रोटीन आधारित उत्पादों के विकल्प भी बढ़ सकते हैं।
प्रोटीन अब केवल खिलाड़ियों या बॉडीबिल्डिंग करने वाले लोगों तक सीमित शब्द नहीं रह गया है। आम उपभोक्ता भी अपने भोजन में प्रोटीन की मात्रा को लेकर जागरूक हो रहे हैं। दाल, चना, राजमा, सोया, पनीर, दूध, दही, अंडे और मछली जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ भारतीय डाइट में प्रोटीन के महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं। इसके साथ बाजार में पैकेज्ड प्रोटीन फूड की नई श्रेणियां भी जुड़ रही हैं। हालांकि पैकेज्ड प्रोटीन प्रोडक्ट खरीदते समय केवल फ्रंट पैकेजिंग पर लिखे दावे को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। Nutrition Facts और Ingredients List पढ़ना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
फंक्शनल फूड क्या होता है?
बदलती फूड हैबिट्स में Functional Food भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। आसान भाषा में कहें तो ऐसे खाद्य उत्पादों को फंक्शनल फूड कहा जाता है, जिन्हें सामान्य पोषण के अलावा किसी खास पोषण संबंधी जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। इन उत्पादों में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल या अन्य पोषक तत्वों को विशेष रूप से शामिल किया जा सकता है। इस श्रेणी के उत्पादों की बढ़ती मांग बताती है कि उपभोक्ता अब भोजन को केवल स्वाद और भूख मिटाने के साधन के तौर पर नहीं देख रहे, बल्कि पोषण के नजरिए से भी समझने की कोशिश कर रहे हैं।
न्यूट्रास्युटिकल्स की भी बढ़ रही मांग
Nutraceuticals भी हेल्थ और न्यूट्रिशन से जुड़े बाजार का तेजी से बढ़ता हिस्सा हैं। इनके जरिए भोजन और पोषण से जुड़े उत्पादों को अतिरिक्त स्वास्थ्य या पोषण संबंधी लाभ के दावों के साथ बाजार में पेश किया जाता है।
हालांकि ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल करते समय सावधानी जरूरी है। किसी भी न्यूट्रास्युटिकल या सप्लीमेंट को संतुलित भोजन का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को किसी विशेष पोषण संबंधी कमी या स्वास्थ्य संबंधी जरूरत है तो विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
हेल्दी फूड खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
बाजार में हेल्दी, हाई-प्रोटीन और न्यूट्रिशन से जुड़े दावों वाले प्रोडक्ट बढ़ रहे हैं। ऐसे में खरीदारी करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- सिर्फ पैकेज पर लिखे ‘Healthy’ या ‘High Protein’ दावे पर भरोसा न करें।
- Nutrition Facts जरूर पढ़ें।
- प्रति सर्विंग प्रोटीन की मात्रा देखें।
- शुगर और सोडियम की मात्रा पर भी नजर रखें।
- Ingredients List पढ़ें।
- ज्यादा प्रोसेस्ड फूड को रोजमर्रा के भोजन का मुख्य हिस्सा न बनाएं।
- प्राकृतिक और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल रखें।
- जरूरत के अनुसार अलग-अलग प्रोटीन स्रोतों का इस्तेमाल करें।
क्या भारतीय थाली में खत्म हो जाएंगे पारंपरिक भोजन?
प्लांट-बेस्ड और हाई-प्रोटीन फूड की लोकप्रियता बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारतीय पारंपरिक भोजन की जगह पूरी तरह पैकेज्ड प्रोडक्ट ले लेंगे। वास्तव में भारतीय भोजन में पहले से ही कई पौष्टिक और प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ मौजूद हैं। दाल, चना, राजमा, सोया, पनीर, दूध, दही और कई तरह के अनाज-सब्जियां संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकते हैं। बदलाव यह है कि अब लोग इन खाद्य पदार्थों के पोषण मूल्य को पहले की तुलना में ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
