दिल्ली और मुंबई में अलग-अलग समय पर विराजेंगे बप्पा! जानें गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा का समय, चंद्र दर्शन से बचने का समय और विसर्जन की तारीख.

गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित है और देशभर में इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन श्रद्धालु घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं.
इस साल गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. हालांकि गणपति स्थापना का समय हर शहर में एक जैसा नहीं होगा. खास तौर पर दिल्ली और मुंबई के शुभ मुहूर्त में अंतर है. ऐसे में अगर आप गणपति स्थापना की तैयारी कर रहे हैं तो अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार ही मुहूर्त देखना जरूरी है.
गणेश चतुर्थी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर 2026 को सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी. चतुर्थी तिथि अगले दिन सुबह तक रहने के बावजूद मुख्य गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को ही मनाई जाएगी. इसका कारण यह है कि गणेश चतुर्थी के लिए उस दिन के मध्याह्न काल में चतुर्थी तिथि का होना महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का प्राकट्य मध्याह्न काल में हुआ था. इसलिए इसी समय के आसपास गणपति स्थापना और पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है.
मुख्य तारीख और समय:
- गणेश चतुर्थी: 14 सितंबर 2026, सोमवार
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर, सुबह 7:06 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर, सुबह 7:44 बजे
दिल्ली में गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
दिल्ली में गणपति स्थापना और पूजा के लिए शुभ समय 14 सितंबर को सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा. इस दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करके प्राण प्रतिष्ठा और पूजा कर सकते हैं. घर में गणपति स्थापना करने वाले भक्तों को पूजा की सभी तैयारियां शुभ मुहूर्त शुरू होने से पहले पूरी कर लेनी चाहिए. चौकी, आसन, पूजा सामग्री, कलश और प्रसाद आदि पहले से तैयार रखें ताकि शुभ समय में बिना किसी जल्दबाजी के पूजा की जा सके.
दिल्ली में गणपति स्थापना मुहूर्त:
सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक
मुंबई में कब विराजेंगे बप्पा?
मुंबई में गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त दिल्ली की तुलना में 18 मिनट बाद शुरू होगा. मुंबई में 14 सितंबर को सुबह 11:20 बजे से दोपहर 1:48 बजे तक गणपति स्थापना और पूजा का शुभ समय बताया गया है. मुंबई में गणेश उत्सव का विशेष महत्व है. यहां घरों के साथ-साथ बड़ी संख्या में सार्वजनिक गणेश मंडलों में भी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है.
मुंबई में गणपति स्थापना मुहूर्त:
सुबह 11:20 बजे से दोपहर 1:48 बजे तक
दिल्ली-मुंबई के मुहूर्त में अंतर क्यों?
कई लोगों के मन में सवाल होता है कि जब दिल्ली और मुंबई दोनों भारतीय मानक समय यानी IST के अनुसार चलते हैं तो गणपति स्थापना के समय में अंतर क्यों है?
दरअसल, धार्मिक पंचांग में कई शुभ मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर निकाले जाते हैं. दिल्ली और मुंबई की भौगोलिक स्थिति अलग होने के कारण दोनों जगह सूर्योदय और सूर्यास्त का समय अलग होता है. गणेश पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है. इसी वजह से दोनों शहरों के गणपति स्थापना मुहूर्त में कुछ अंतर देखने को मिलता है. इसलिए इंटरनेट पर मिलने वाले किसी सामान्य मुहूर्त को हर शहर के लिए एक जैसा मानना सही नहीं है. पूजा से पहले अपने स्थान के अनुसार पंचांग देखना बेहतर है.
गणपति स्थापना के समय क्या करें?
गणपति स्थापना से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें. चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद कलश स्थापित करके पूजा का संकल्प लिया जा सकता है. भगवान गणेश को सिंदूर, अक्षत, फूल, दूर्वा, फल और मोदक अर्पित करें. पूजा के दौरान गणपति मंत्रों का जाप करें और अंत में भगवान गणेश की आरती करें. परिवार के सभी सदस्य पूजा में शामिल होकर बप्पा का आशीर्वाद ले सकते हैं. परंपरागत रूप से गणेश जी को दूर्वा और मोदक विशेष रूप से प्रिय माना जाता है, इसलिए पूजा सामग्री में इन्हें शामिल किया जाता है.
गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से क्यों बचते हैं?
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से बचने की धार्मिक परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति पर मिथ्या आरोप या झूठा कलंक लग सकता है. दिए गए पंचांग के अनुसार दिल्ली में 14 सितंबर को सुबह 9:06 बजे से रात 8:04 बजे तक चंद्र दर्शन से बचने का समय रहेगा. वहीं मुंबई में सुबह 9:10 बजे से रात 8:37 बजे तक चंद्र दर्शन से बचने की सलाह दी गई है. अगर अनजाने में चंद्रमा दिखाई दे जाए तो धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का ध्यान किया जा सकता है और स्यमंतक मणि की कथा का श्रवण या पाठ किया जा सकता है.
गणेश विसर्जन 2026 कब होगा?
गणेश उत्सव आमतौर पर 10 दिनों तक चलता है और इसका समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है. इस साल मुख्य गणेश विसर्जन शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर किया जाएगा. अनंत चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11:18 बजे शुरू होगी और 25 सितंबर को रात 11:06 बजे समाप्त होगी. हालांकि, घर में स्थापित गणपति का विसर्जन परिवार की परंपरा और सुविधा के अनुसार डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें या सातवें दिन भी किया जा सकता है.
2026 में प्रमुख गणपति विसर्जन तिथियां
- डेढ़ दिन का विसर्जन: 15 सितंबर
- तीसरे दिन का विसर्जन: 16 सितंबर
- पांचवें दिन का विसर्जन: 18 सितंबर
- सातवें दिन का विसर्जन: 20 सितंबर
- अनंत चतुर्दशी का मुख्य विसर्जन: 25 सितंबर
पर्यावरण का भी रखें ध्यान
गणपति विसर्जन के दौरान पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है. संभव हो तो मिट्टी से बनी ऐसी प्रतिमा चुनें जो पानी में आसानी से घुल सके. घर में स्थापित छोटी गणेश प्रतिमा के लिए स्थानीय नियमों का पालन करते हुए कृत्रिम या निर्धारित विसर्जन स्थल का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे नदियों और जलाशयों में प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है.
इस गणेश चतुर्थी पर याद रखें ये जरूरी समय
अगर आप दिल्ली या मुंबई में गणपति स्थापना की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे महत्वपूर्ण समय इस प्रकार हैं:
दिल्ली: सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक
मुंबई: सुबह 11:20 बजे से दोपहर 1:48 बजे तक
दोनों शहरों के बीच 18 मिनट का अंतर है. इसलिए किसी दूसरे शहर का मुहूर्त देखकर अपने शहर में गणपति स्थापना करना उचित नहीं माना जाता.
Disclaimer: इस लेख में दी गई धार्मिक जानकारी और मुहूर्त पारंपरिक पंचांग एवं मान्यताओं पर आधारित हैं. अलग-अलग पंचांग या स्थान के अनुसार समय में अंतर संभव है. किसी भी धार्मिक जानकारी को अपनाने से पहले स्थानीय विद्वान या विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है.
