डायबिटीज में अचार, पापड़ और चटनी खाना सही है या नहीं? जानिए कौन सा विकल्प बेहतर है और किन चीजों से सावधानी बरतनी चाहिए.

डायबिटीज में खान-पान का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. जब भी ब्लड शुगर कंट्रोल करने की बात होती है, तो ज्यादातर लोग मीठी चीजों, चावल, रोटी, ब्रेड और मिठाइयों पर ध्यान देते हैं. लेकिन खाने के साथ ली जाने वाली छोटी-छोटी चीजों, जैसे अचार, पापड़ और चटनी, पर अक्सर ध्यान नहीं जाता.
ये चीजें भोजन का स्वाद जरूर बढ़ाती हैं, लेकिन डायबिटीज में इनका सेवन कितना सही है? क्या अचार या चटनी खाने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है? क्या पापड़ डायबिटीज के मरीजों के लिए सुरक्षित है? इसका जवाब सिर्फ ‘हां’ या ‘नहीं’ में देना सही नहीं होगा. इन चीजों का असर मुख्य रूप से इनकी सामग्री, बनाने के तरीके और खाने की मात्रा पर निर्भर करता है.
डायबिटीज में अचार, पापड़ और चटनी का क्या असर होता है?
डायबिटीज वाले व्यक्ति के लिए किसी भी खाद्य पदार्थ का असर सिर्फ उसके नाम से तय नहीं होता. उदाहरण के लिए, एक घर में बनी कम चीनी वाली चटनी और बाजार में मिलने वाली मीठी चटनी की पोषण संरचना अलग हो सकती है. इसी तरह कम नमक वाला घर का अचार और बाजार का ज्यादा नमक या चीनी वाला अचार भी एक जैसा नहीं होता.
इसलिए डायबिटीज में अचार, पापड़ और चटनी को पूरी तरह बैन करने के बजाय लेबल, सामग्री और मात्रा पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है.
अचार: डायबिटीज में कितना खाना ठीक?
अचार में आमतौर पर कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं होती, लेकिन इसमें नमक और तेल की मात्रा काफी अधिक हो सकती है. कुछ बाजार में मिलने वाले अचार में अतिरिक्त चीनी भी मिलाई जाती है.
इसलिए डायबिटीज के साथ अगर किसी व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर या हृदय से जुड़ी समस्या भी है, तो ज्यादा नमक वाला अचार विशेष रूप से सीमित करना जरूरी हो सकता है.
कौन सा अचार बेहतर विकल्प हो सकता है?
घर पर तैयार किया गया ऐसा अचार जिसमें:
- अतिरिक्त चीनी कम या न हो
- नमक सीमित मात्रा में हो
- तेल का इस्तेमाल नियंत्रित हो
- ताजी और साफ सामग्री का इस्तेमाल किया गया हो
ऐसा अचार थोड़ी मात्रा में लिया जा सकता है.
लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि अचार को सब्जियों का विकल्प नहीं माना जा सकता. इसे सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए थोड़ी मात्रा में लेना बेहतर है.
पापड़: भुना हुआ या तला हुआ?
डायबिटीज में पापड़ का चुनाव करते समय बनाने का तरीका काफी मायने रखता है. पापड़ आमतौर पर दाल या दूसरे अनाज से तैयार किए जाते हैं. इनमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ब्रांड और सामग्री के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. अगर पापड़ को तेल में डीप फ्राई किया जाए, तो उसमें अतिरिक्त फैट और कैलोरी बढ़ जाती है. इसलिए तले हुए पापड़ की जगह भुना हुआ पापड़ बेहतर विकल्प हो सकता है. हालांकि, भुना हुआ पापड़ भी असीमित मात्रा में नहीं खाना चाहिए, क्योंकि कई पैकेज्ड पापड़ों में नमक काफी ज्यादा हो सकता है.
चटनी: हर चटनी एक जैसी नहीं होती
डायबिटीज में चटनी का चुनाव भी उसकी सामग्री पर निर्भर करता है.
हरी चटनी
धनिया, पुदीना, हरी मिर्च, नींबू और कुछ मसालों से बनी घर की ताजी चटनी आमतौर पर कम कैलोरी वाला विकल्प हो सकती है. अगर इसमें चीनी नहीं डाली गई है और नमक सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया गया है, तो इसे भोजन के साथ थोड़ी मात्रा में लिया जा सकता है.
नारियल की चटनी
नारियल में फैट और फाइबर होता है, लेकिन कैलोरी भी अधिक हो सकती है. इसलिए डायबिटीज में नारियल की चटनी भी मात्रा को ध्यान में रखकर खानी चाहिए.
दही वाली चटनी
दही के साथ बनाई गई चटनी में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व मिल सकते हैं. हालांकि, इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले दही और अन्य सामग्री की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है.
मीठी टमाटर की चटनी
बाजार में मिलने वाली कई मीठी चटनियों में अतिरिक्त चीनी हो सकती है. ऐसी चटनी डायबिटीज वाले लोगों के लिए नियमित रूप से लेना अच्छा विकल्प नहीं माना जाता. अगर चटनी में चीनी या मीठे सिरप की मात्रा अधिक है, तो वह भोजन में अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी जोड़ सकती है.
बाजार के अचार और चटनी से क्यों रहें सावधान?
पैकेज्ड अचार, चटनी और सॉस खरीदते समय सिर्फ स्वाद पर ध्यान न दें. इनके लेबल को पढ़ना भी जरूरी है.
कई पैकेज्ड उत्पादों में:
- ज्यादा सोडियम
- अतिरिक्त चीनी
- ज्यादा तेल
- प्रिजर्वेटिव
- अन्य एडेड इंग्रीडिएंट्स
हो सकते हैं.
इसलिए डायबिटीज वाले लोगों को खरीदारी करते समय Nutrition Facts और Ingredients List जरूर देखनी चाहिए.
खासकर ‘Added Sugar’, ‘Sugar’, ‘Syrup’ या अन्य मीठे पदार्थों की मौजूदगी पर ध्यान दें.
क्या अचार और चटनी ब्लड शुगर को तुरंत बढ़ाते हैं?
हर अचार और चटनी का असर एक जैसा नहीं होता.
अगर किसी उत्पाद में कार्बोहाइड्रेट और अतिरिक्त चीनी कम है, तो उसका ब्लड शुगर पर असर भी सीमित हो सकता है. वहीं मीठी चटनी या ज्यादा चीनी वाले उत्पाद ब्लड ग्लूकोज को प्रभावित कर सकते हैं.
इसके अलावा भोजन में अचार या चटनी किस चीज के साथ खाई जा रही है, यह भी मायने रखता है.
उदाहरण के लिए अगर पूरी थाली में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, तला हुआ खाना और मीठी चीजें ज्यादा हैं, तो केवल कम मात्रा में चटनी लेने से भोजन हेल्दी नहीं हो जाता.
डायबिटीज में इन्हें खाने का सही तरीका क्या है?
इन बातों का रखें ध्यान
अचार कम मात्रा में खाएं: अचार को सब्जी की तरह ज्यादा मात्रा में न लें. इसका इस्तेमाल केवल स्वाद बढ़ाने के लिए करें.
भुना पापड़ चुनें: तले हुए पापड़ की जगह भुना हुआ पापड़ बेहतर विकल्प हो सकता है.
ताजी घर की चटनी बेहतर: घर पर बनी हरी चटनी में चीनी और नमक की मात्रा नियंत्रित की जा सकती है.
मीठी चटनी सीमित करें: ऐसी चटनी से बचें जिसमें अतिरिक्त चीनी ज्यादा हो.
लेबल जरूर पढ़ें: पैकेज्ड उत्पादों में कुल कार्बोहाइड्रेट, शुगर, सोडियम और कैलोरी की जानकारी देखें.
पोर्टियन कंट्रोल रखें: डायबिटीज डाइट में सिर्फ क्या खा रहे हैं, यह नहीं बल्कि कितना खा रहे हैं, यह भी महत्वपूर्ण है.
अचार, पापड़ और चटनी को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है. लेकिन इनका सेवन कम मात्रा में और समझदारी से करना चाहिए.
क्या डायबिटीज में अचार, पापड़ और चटनी पूरी तरह बंद करनी चाहिए?
डायबिटीज के मरीज के लिए किसी भी खाद्य पदार्थ को लेकर व्यक्तिगत सलाह उसकी दवाओं, ब्लड शुगर लेवल, वजन, अन्य स्वास्थ्य समस्याओं और पूरी डाइट पर निर्भर कर सकती है. अगर डॉक्टर या डाइटिशियन ने किसी विशेष खाद्य पदार्थ को सीमित करने की सलाह दी है, तो उसका पालन करना चाहिए. सामान्य तौर पर, कम मात्रा में और सही विकल्प चुनकर अचार, चटनी या भुना हुआ पापड़ कभी-कभार डाइट में शामिल किया जा सकता है.
