🥛 दूध की कीमत बढ़ी, लेकिन ग्राहकों की जेब पर नहीं पड़ेगा असर! महाराष्ट्र में किसानों को अब हर लीटर दूध पर 1 रुपये ज्यादा मिलेंगे। गणेशोत्सव से पहले क्यों लिया गया ये फैसला? जानें पूरी खबर।

महाराष्ट्र में गणेशोत्सव से पहले दूध को लेकर एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिसे जानकर आम ग्राहकों को राहत मिल सकती है। पुणे जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ ने किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत में 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। यानी अब दूध बेचने वाले किसानों को पहले के मुकाबले ज्यादा भुगतान मिलेगा। इस बढ़ोतरी का असर सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर नहीं पड़ेगा। डेयरी की ओर से साफ किया गया है कि ग्राहकों के लिए दूध की खुदरा कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में दुकान से दूध खरीदने वाले लोगों को फिलहाल पहले जितनी ही कीमत चुकानी होगी।
किसानों को मिलेगा दूध का ज्यादा दाम…..
पुणे जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ ने गाय और भैंस के दूध की खरीद कीमत बढ़ाने का फैसला किया है। नई दरें अगले दिन से लागू होने की बात कही गई है। इस फैसले से उन किसानों को फायदा होगा जो जिला सहकारी केंद्रों के माध्यम से डेयरी को दूध बेचते हैं। उन्हें हर लीटर दूध पर पहले से 1 रुपये अधिक मिलेगा। डेयरी संघ के मुताबिक, पिछले कुछ समय में पशुओं के चारे, पशु आहार और दूध के परिवहन पर होने वाला खर्च बढ़ा है। बढ़ती लागत का सीधा असर किसानों के मुनाफे पर पड़ रहा था। ऐसे में खरीद कीमत में बढ़ोतरी को किसानों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
दूध महंगा हुआ, फिर भी ग्राहक क्यों बचेंगे…..?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर दूध की खरीद कीमत 1 रुपये बढ़ गई है तो ग्राहकों को ज्यादा पैसे क्यों नहीं देने पड़ेंगे? दरअसल, यहां खरीद कीमत और खुदरा कीमत के अंतर को समझना जरूरी है। खरीद कीमत वह रकम है जो डेयरी या सहकारी संस्था किसानों से कच्चा दूध खरीदते समय उन्हें देती है। वहीं खुदरा कीमत वह राशि है, जो ग्राहक पैकेट वाला दूध खरीदते समय दुकान पर चुकाता है। इस मामले में किसानों को मिलने वाली खरीद कीमत बढ़ाई गई है, लेकिन ग्राहकों के लिए खुदरा कीमत को पहले जैसा ही रखा गया है। यानी बढ़ी हुई लागत का बोझ डेयरी खुद उठाएगी और इसे फिलहाल ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा।
3.5 फैट और 8.5 SNF वाले दूध की नई कीमत…..
नई व्यवस्था के बाद 3.5 फैट और 8.5 SNF वाले गाय के दूध की खरीद कीमत 39.80 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 40.80 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसका मतलब है कि दूध उत्पादक किसानों को प्रत्येक लीटर पर 1 रुपये अतिरिक्त मिलेगा। यह बदलाव खासतौर पर बढ़ती उत्पादन लागत के बीच किसानों की आय को सहारा देने के उद्देश्य से किया गया है।
गणेशोत्सव से पहले बढ़ती है दूध और मिठाइयों की मांग…..
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाता है। त्योहार के दौरान घरों के अलावा मिठाई और खाद्य उत्पाद बनाने वाले कारोबारियों के बीच भी दूध की मांग बढ़ जाती है। पेड़ा, मोदक, बर्फी और दूसरी मिठाइयों को तैयार करने में दूध और मावे की बड़ी भूमिका होती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गणेशोत्सव के दौरान दूध और मावे की मांग में करीब 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे समय में दूध उत्पादकों के लिए बेहतर खरीद कीमत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि मांग बढ़ने के साथ उत्पादन और परिवहन से जुड़े खर्च भी प्रभावित होते हैं।
मुंबई में भी दूध की कीमतों में हुआ बदलाव…..
महाराष्ट्र में दूध की कीमतों को लेकर यह पहला बदलाव नहीं है। हाल ही में मुंबई में मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की ओर से भैंस के दूध की कीमत में 9 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई थी। इसके मुकाबले पुणे में किसानों के लिए 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, लेकिन यहां खास बात यह है कि ग्राहकों के लिए खुदरा कीमत को बढ़ाने का फैसला नहीं किया गया है।
त्योहार से पहले ग्राहकों को मिली राहत…..
गणेशोत्सव के दौरान घरों में मिठाइयों और दूसरे पकवानों की तैयारी बढ़ जाती है। ऐसे में अगर दूध की खुदरा कीमत भी बढ़ जाती, तो इसका असर लोगों के त्योहार के बजट पर पड़ सकता था। फिलहाल पुणे की कात्रज डेयरी की ओर से ग्राहकों के लिए खुदरा कीमत को नहीं बढ़ाने का फैसला राहत देने वाला है। यानी किसानों को अतिरिक्त भुगतान मिलेगा, लेकिन इसका सीधा भार दूध खरीदने वाले आम ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा।
क्या आगे बढ़ सकते हैं दूध के दाम…..?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस फैसले का असर उपभोक्ताओं के लिए दूध की खुदरा कीमत पर नहीं किया गया है। इसलिए ग्राहकों को अभी दूध खरीदते समय अतिरिक्त 1 रुपये देने की जरूरत नहीं होगी। दूध की खरीद कीमत, उत्पादन लागत और बाजार की परिस्थितियों में आगे होने वाले बदलावों का खुदरा कीमत पर क्या असर पड़ेगा, यह भविष्य के फैसलों पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष…..
महाराष्ट्र में दूध की खरीद कीमत में 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी किसानों के लिए राहत लेकर आई है, जबकि ग्राहकों के लिए खुदरा कीमत को फिलहाल स्थिर रखा गया है। बढ़ती चारा, पशु आहार और परिवहन लागत के बीच किसानों को अतिरिक्त भुगतान मिलने से उन्हें कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं गणेशोत्सव से पहले ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने का फैसला त्योहार के दौरान आम परिवारों के बजट के लिए राहत भरा साबित हो सकता है।
