नागपुर के एक छात्र को NTA ने परीक्षा केंद्र भारत में नहीं, बल्कि अबूधाबी में आवंटित कर दिया। छात्र का कहना है कि उसके पास पासपोर्ट तक नहीं है और परिवार विदेश भेजने का खर्च भी नहीं उठा सकता।

नई दिल्ली/नागपुर: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब एक नया मामला सामने आया है, जिसमें महाराष्ट्र के नागपुर के एक छात्र को NEET री-एग्जाम का परीक्षा केंद्र भारत के बजाय संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबूधाबी में आवंटित कर दिया गया है। छात्र और उसके परिवार ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए परीक्षा एजेंसी NTA पर सवाल उठाए हैं।
छात्र का कहना है कि उसके पास पासपोर्ट तक नहीं है और परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह विदेश जाकर परीक्षा दे सके। मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक रंग भी ले चुका है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार और NTA को घेरा है।
छात्र ने बताई अपनी परेशानी
नागपुर निवासी छात्र ने बताया कि उसने NEET री-एग्जाम के लिए आवेदन किया था और उम्मीद थी कि उसे महाराष्ट्र या आसपास के किसी शहर में परीक्षा केंद्र मिलेगा। लेकिन एडमिट कार्ड जारी होने पर उसे पता चला कि उसका सेंटर अबूधाबी में निर्धारित किया गया है।
छात्र ने कहा, “मेरे पास पासपोर्ट नहीं है। विदेश यात्रा के लिए जरूरी दस्तावेज भी नहीं हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं है कि कुछ ही दिनों में विदेश जाकर परीक्षा दे सकूं।”
परिवार ने इसे NTA की बड़ी गलती बताते हुए तत्काल सुधार की मांग की है।
राहुल गांधी ने उठाए सवाल
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि देश के छात्रों का भविष्य लगातार प्रशासनिक अव्यवस्था की भेंट चढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि NEET परीक्षा से जुड़े विवादों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है।
राहुल गांधी ने कहा कि एक छात्र को परीक्षा देने के लिए विदेश भेजना न केवल अव्यावहारिक है बल्कि यह परीक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर करता है। उन्होंने मांग की कि NTA तुरंत इस गलती को सुधारे और प्रभावित छात्र को भारत में ही उचित परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराए।
पहले भी विवादों में रही है NTA
पिछले कुछ वर्षों में NTA कई बार परीक्षा प्रबंधन को लेकर सवालों के घेरे में रही है। पेपर लीक, परीक्षा केंद्रों की अव्यवस्था, तकनीकी खामियां और छात्रों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। NEET 2024 और उसके बाद हुए घटनाक्रमों ने भी परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस छेड़ी थी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा केंद्र आवंटन जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं में इस प्रकार की त्रुटियां छात्रों के मानसिक तनाव को बढ़ाती हैं और उनकी तैयारी पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
NTA की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल NTA की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि छात्र और उसके परिवार ने परीक्षा एजेंसी से संपर्क कर केंद्र बदलने की मांग की है। अब सभी की नजर NTA के अगले कदम पर टिकी हुई है।
छात्रों में बढ़ रही चिंता
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी कई छात्र और अभिभावक NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि परीक्षा केंद्र आवंटन में ऐसी गलतियां हो रही हैं, तो इससे छात्रों का भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।
NEET जैसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पारदर्शिता और सटीकता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि लाखों छात्रों का भविष्य इसी परीक्षा के परिणामों पर निर्भर करता है।
