कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर NEET से जुड़े छात्र आत्महत्या मामलों में प्रभावित परिवारों को ₹1-1 करोड़ मुआवजा देने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है।

नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के संस्थापक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन छात्रों के परिवारों को ₹1-1 करोड़ की आर्थिक सहायता देने की मांग की है, जिन्होंने कथित तौर पर NEET परीक्षा के दबाव या उससे जुड़ी परिस्थितियों के बीच आत्महत्या की है।
इसके साथ ही पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की भी मांग उठाई है। संगठन का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार छात्रों की समस्याओं का प्रभावी समाधान करने में विफल रही है।
प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में क्या कहा गया?
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि देशभर में लाखों छात्र NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परीक्षा में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, मानसिक दबाव और असफलता के डर के कारण कई छात्र गंभीर तनाव का सामना करते हैं।
पत्र में मांग की गई है कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उन्हें केंद्र सरकार की ओर से ₹1-1 करोड़ की आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष नीति तैयार की जाए।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
पार्टी ने अपने बयान में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
हालांकि सरकार या शिक्षा मंत्रालय की ओर से इन मांगों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कल दिल्ली में फिर होगा प्रदर्शन
कॉकरोच जनता पार्टी ने घोषणा की है कि वह अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार को दिल्ली में एक बार फिर प्रदर्शन करेगी। संगठन का दावा है कि इस प्रदर्शन में छात्र, अभिभावक और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
प्रदर्शन के दौरान NEET परीक्षा प्रणाली में सुधार, छात्रों के लिए बेहतर काउंसलिंग व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
NEET और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहस
पिछले कुछ वर्षों में NEET परीक्षा को लेकर लगातार बहस होती रही है। परीक्षा की कठिन प्रतिस्पर्धा, कोचिंग संस्कृति और छात्रों पर बढ़ते दबाव को लेकर कई विशेषज्ञ चिंता जता चुके हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल परीक्षा परिणामों पर ध्यान देने के बजाय छात्रों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देने की जरूरत है। कई विशेषज्ञ स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में नियमित मनोवैज्ञानिक परामर्श और सहायता सेवाओं को मजबूत करने की वकालत कर रहे हैं।
सरकार के रुख पर नजर
कॉकरोच जनता पार्टी की मांगों और प्रस्तावित प्रदर्शन के बाद अब सभी की नजर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है। यह मुद्दा एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।
