प्रस्तावना

भारत और इजरायल के बीच कूटनीतिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार गहराता जा रहा है। इस रिश्ते की गर्मजोशी का ताजा उदाहरण देखने को मिला जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहूदी नववर्ष रोश हशनाह के अवसर पर इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और दुनिया भर के यहूदी समुदाय को शुभकामनाएं दीं।
रोश हशनाह क्या है?
- यहूदी नववर्ष का पर्व – यह त्योहार यहूदी कैलेंडर के अनुसार नए साल की शुरुआत का प्रतीक है।
- सांस्कृतिक महत्व – इसमें प्रार्थना, पारंपरिक भोजन, आत्म-चिंतन और नवीनीकरण जैसे अनुष्ठान शामिल होते हैं।
- शांति और समृद्धि का संदेश – यह पर्व लोगों को एक नए जीवन की ओर प्रेरित करता है और सामूहिक शांति और भाईचारे का महत्व बताता है।
- इस साल यह पर्व उस समय आया है जब मध्य पूर्व में गाजा संघर्ष जारी है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है।
राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शुभकामना संदेश साझा किया।
उन्होंने लिखा:
- “माननीय इसहाक हर्जोग, भारत सरकार और जनता की ओर से, मैं आपको और यहूदी समुदाय को रोश हशनाह की हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। कामना है कि नया साल सभी के लिए शांति, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य लेकर आए।”
यह संदेश भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और सर्वधर्म समभाव की झलक पेश करता है।
प्रधानमंत्री मोदी का बधाई संदेश
पीएम नरेंद्र मोदी ने भी एक दिन पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और दुनिया भर के यहूदी समुदाय को शुभकामनाएं दी थीं।
उन्होंने लिखा:
- “शना टोवा! मेरे मित्र प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, इजरायल के लोगों और दुनिया भर के यहूदी समुदाय को रोश हशनाह की हार्दिक शुभकामनाएं। मैं सभी के लिए शांति, आशा और अच्छे स्वास्थ्य से भरे नए वर्ष की कामना करता हूं।”
मोदी और नेतन्याहू की दोस्ती अंतरराष्ट्रीय राजनीति में काफी चर्चित है। इस दोस्ती का असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर साफ झलकता है।
भारत-इजरायल संबंध: हालिया परिप्रेक्ष्य

भारत और इजरायल के रिश्ते केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आयामों तक फैले हुए हैं।
1. रक्षा और सुरक्षा सहयोग
- ब्रह्मोस परियोजना और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग।
- साइबर सुरक्षा और इंटेलिजेंस साझेदारी ने दोनों देशों को करीब लाया है।
2. कृषि और जल प्रबंधन
- इजरायल की माइक्रो-इरिगेशन तकनीक भारत में किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।
- कई राज्यों में “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित किए गए हैं।
3. टेक्नोलॉजी और नवाचार
- स्टार्टअप इकोसिस्टम में सहयोग।
- दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर टेक्नोलॉजी पर संयुक्त पहल।
व्यक्तिगत रिश्ते का महत्व
- पीएम मोदी और नेतन्याहू की व्यक्तिगत दोस्ती द्विपक्षीय संबंधों को गहराई देती है।
- हाल ही में नेतन्याहू ने पीएम मोदी को उनके 75वें जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं।
- यह आदान-प्रदान दिखाता है कि भारत और इजरायल के संबंध केवल औपचारिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी मजबूत हैं।
रोश हशनाह और मध्य पूर्व की स्थिति
इस साल रोश हशनाह का त्योहार गाजा में जारी संघर्ष के बीच मनाया जा रहा है।
- हजारों लोग इस संघर्ष में जान गंवा चुके हैं।
- भारत ने हमेशा संयम, संवाद और शांति की वकालत की है।
- भारत का रुख संतुलित रहा है: एक ओर इजरायल के साथ गहरे संबंध बनाए रखना और दूसरी ओर फिलिस्तीन मुद्दे पर शांति समाधान की अपील करना।
वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
- अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और कई अन्य नेताओं ने भी यहूदी समुदाय को शुभकामनाएं दीं।
- भारत का संदेश इस वैश्विक आदान-प्रदान का हिस्सा है और इसकी रणनीतिक अहमियत भी है।
भारत की कूटनीतिक छवि
इस तरह के शुभकामना संदेश केवल औपचारिकता नहीं होते, बल्कि वे भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करते हैं।
- भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में शांति और भाईचारे का संदेश देता है।
- यह संदेश खासकर उन समयों में महत्वपूर्ण होता है जब क्षेत्रीय संघर्ष गहराता है।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इजरायल और यहूदी समुदाय को दी गई रोश हशनाह की शुभकामनाएं भारत की कूटनीतिक संवेदनशीलता और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक हैं।
भारत-इजरायल संबंधों की बढ़ती गहराई और दोनों देशों के नेताओं की व्यक्तिगत मित्रता यह दर्शाती है कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और मजबूत होगी।
रोश हशनाह का संदेश—शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य—भारत और इजरायल दोनों के साझा भविष्य के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।
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