
वॉशिंगटन, 9 फरवरी
ग्लोबल आईआईटी मीटिंग के तहत कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच में अप्रैल 2026 में ग्लोबल पैन-आईआईटी कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। चार दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में हजारों आईआईटी एलुमनाई, उद्यमी और कॉर्पोरेट लीडर्स हिस्सा लेंगे।
यह कॉन्फ्रेंस 22 से 25 अप्रैल, 2026 तक आयोजित होगी, जिसकी थीम “इनोवेट, इग्नाइट एंड थ्राइव” रखी गई है। आयोजन में दुनिया भर से 2,500 से अधिक प्रतिभागियों के पहुंचने की उम्मीद है।
ग्लोबल आईआईटी मीटिंग में नवाचार पर फोकस
वेंचर कैपिटलिस्ट और सम्मेलन के चेयरपर्सन शशि त्रिपाठी के अनुसार, ग्लोबल आईआईटी मीटिंग का उद्देश्य ऐसे समय में दुनिया के सबसे तेज दिमागों को एक मंच पर लाना है, जब टेक्नोलॉजी, जियोपॉलिटिक्स और आर्थिक शक्ति तेजी से बदल रही है।
कॉन्फ्रेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थकेयर, सस्टेनेबिलिटी, निवेश, वेंचर कैपिटल, प्राइवेट इक्विटी और एग्जिट प्लानिंग जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
AI और स्टार्टअप्स पर खास सत्र
आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में शशि त्रिपाठी ने बताया कि सम्मेलन में छह ग्रैंड कीनोट सेशंस होंगे। इसके अलावा पैनल डिस्कशन, फायरसाइड चैट और वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा। एनवीडिया के नेतृत्व में एक विशेष सत्र भी होगा, जिसमें स्टार्टअप्स के लिए गो-टू-मार्केट स्ट्रेटेजी और फंडरेजिंग पर चर्चा होगी।
सम्मेलन सभी के लिए खुला
त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि यह सम्मेलन एक्सक्लूसिव नहीं है। उन्होंने कहा,
“इसमें कोई भी हिस्सा ले सकता है। आईआईटी से होना या भारतीय होना जरूरी नहीं है। हम पूरी तरह इनक्लूसिव हैं।”
उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय अमेरिकी आबादी का लगभग 2 फीसदी है, लेकिन अर्थव्यवस्था में 8 फीसदी का योगदान दे रहा है।
भारत-अमेरिका सहयोग पर जोर
शशि त्रिपाठी ने कहा कि दशकों से आईआईटी ग्रेजुएट सिलिकॉन वैली के टेक इकोसिस्टम की रीढ़ रहे हैं और अब यह समुदाय हेल्थकेयर, स्टार्टअप्स और वेंचर कैपिटल तक फैल चुका है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर उन्होंने इसे इंटरनेट से भी बड़ी क्रांति बताया और कहा कि भारत और अमेरिका के बीच एआई के क्षेत्र में एक स्वाभाविक साझेदारी बन सकती है।
उन्होंने कहा,
“अगर भारत और अमेरिका मिलकर काम करते हैं, तो भविष्य में एक बेहद शक्तिशाली एआई इकोसिस्टम तैयार हो सकता है।”
