🥃 Old Monk को लेकर बड़ा विवाद! FSSAI ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कहा कि कुछ प्रोडक्ट्स को ‘Rum’ के नाम से बेचने पर नियमों का पालन जरूरी है. आखिर क्या है पूरा मामला और क्या बंद हो जाएगी Old Monk की बिक्री? जानिए पूरी कहानी......

Old Monk को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रहे मामले ने शराब के शौकीनों के बीच हलचल बढ़ा दी है. FSSAI ने कोर्ट में कहा है कि कुछ Old Monk प्रोडक्ट्स को ‘Rum’ के नाम से बेचना नियमों के मुताबिक सही नहीं है. इसका मतलब यह नहीं है कि Old Monk की बिक्री पूरे देश में बंद हो गई है.
Old Monk का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में सबसे पहले ‘Rum’ का ख्याल आता है. लेकिन अब इसी पहचान को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो गया है. मामला बॉम्बे हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने Old Monk की लेबलिंग को लेकर अपना पक्ष रखा है. FSSAI का कहना है कि जिस प्रोडक्ट को Rum के तौर पर पेश किया जा रहा है, उसकी सामग्री और तैयार करने की प्रक्रिया तय नियमों के अनुरूप होनी चाहिए. रेगुलेटर के मुताबिक संबंधित Old Monk प्रोडक्ट में न्यूट्रल स्पिरिट और रम फ्लेवरिंग का इस्तेमाल होता है. ऐसे में इसे ‘Rum’ की बजाय ‘रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट’ के तौर पर लेबल किया जाना चाहिए.
आखिर क्या है पूरा विवाद…..?
यह पूरा मामला Old Monk की बिक्री पर रोक लगाने से ज्यादा लेबलिंग और प्रोडक्ट की कैटेगरी से जुड़ा है. FSSAI का तर्क है कि अगर किसी शराब में न्यूट्रल स्पिरिट और फ्लेवरिंग का इस्तेमाल किया गया है, तो उसे ऐसी कैटेगरी में नहीं बेचा जाना चाहिए जिससे ग्राहक को उसके स्वरूप के बारे में गलत जानकारी मिले. यानी विवाद सिर्फ बोतल पर लिखे ‘Rum’ शब्द का नहीं है. इसके पीछे यह सवाल है कि किसी अल्कोहलिक ड्रिंक को किस श्रेणी में रखा जाए और उसकी सामग्री की जानकारी ग्राहक को कितनी स्पष्टता से दी जाए.
कंपनी ने कोर्ट में पेश किए नए लेबल……
मामले की सुनवाई के दौरान Old Monk की कंपनी की ओर से संशोधित लेबल भी कोर्ट में पेश किए गए हैं. इन लेबल में प्रोडक्ट से जुड़ी जानकारी को अधिक स्पष्ट करने की कोशिश की गई है. FSSAI ने इन नए लेबल की जांच के लिए समय मांगा है. कोर्ट ने भी पैकेजिंग पर जरूरी जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज करने को लेकर निर्देश दिए हैं. लेबल पर एडेड फ्लेवर से जुड़ी जानकारी को स्पष्ट करने और पुराने दावों में बदलाव की बात भी सामने आई है.
‘7 Years Old Blended’ और ‘Very Old Vatted’ पर भी सवाल……
सुनवाई के दौरान प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर किए गए कुछ दावों को लेकर भी सवाल उठे हैं. इनमें ‘7 Years Old Blended’ और ‘Very Old Vatted’ जैसे दावे शामिल हैं. कोर्ट में इन दावों और लेबलिंग से जुड़ी जानकारी को लेकर चर्चा हुई है. ऐसे में आने वाले समय में कंपनी को अपने प्रोडक्ट की पैकेजिंग और दावों को लेकर नियामकीय नियमों के अनुरूप बदलाव करने पड़ सकते हैं.
क्या अब Old Monk मिलना बंद हो जाएगी……?
इस सवाल का जवाब फिलहाल नहीं है. इस मामले को Old Monk की पूरे देश में बिक्री पर प्रतिबंध के तौर पर देखना सही नहीं होगा. फिलहाल विवाद महाराष्ट्र में बिक्री और प्रोडक्ट की लेबलिंग से जुड़ा हुआ है. कंपनी ने कोर्ट में संशोधित लेबल पेश किए हैं और FSSAI उनकी जांच कर रहा है. इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि Old Monk की बिक्री पूरी तरह बंद हो जाएगी.
11 सितंबर को होगी अगली सुनवाई……
मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होनी है. आगे की कानूनी प्रक्रिया और FSSAI की जांच के बाद ही यह साफ होगा कि कंपनी को लेबलिंग में और क्या बदलाव करने होंगे. इसलिए फिलहाल Old Monk के चाहने वालों को घबराने की जरूरत नहीं है. विवाद का मुख्य केंद्र इसकी बिक्री नहीं, बल्कि ‘Rum’ के तौर पर इसकी कैटेगरी और लेबल पर दी जाने वाली जानकारी है. असली सवाल लेबल का है, बोतल बंद होने का नहीं Old Monk को लेकर सामने आया विवाद यह दिखाता है कि किसी भी खाद्य या पेय उत्पाद की पैकेजिंग पर दी गई जानकारी कितनी महत्वपूर्ण होती है. ग्राहक जिस नाम और कैटेगरी के आधार पर कोई प्रोडक्ट खरीदता है, उसके बारे में सही जानकारी देना नियामकीय नियमों का अहम हिस्सा है. अब सबकी नजर 11 सितंबर की सुनवाई पर रहेगी, जहां इस मामले में आगे की तस्वीर कुछ और साफ हो सकती है…….
