मेरठ जेल में गूंज रहे पुराने फिल्मी गाने!

जेल की जिंदगी आम तौर पर अनुशासन, नियमों और बंद माहौल से जुड़ी होती है. ऐसे में अगर उसी माहौल में संगीत की आवाज सुनाई दे तो यह कैदियों के लिए तनाव कम करने का एक माध्यम बन सकता है. उत्तर प्रदेश की मेरठ जिला जेल में ऐसी ही एक पहल शुरू की गई है, जहां कैदियों के लिए एक विशेष रेडियो रूम बनाया गया है.
इस रेडियो को ‘रेडियो परवाज़’ नाम दिया गया है. यहां बंदी अपनी पसंद के गानों की फरमाइश कर सकते हैं. इसके अलावा जो कैदी रेडियो जॉकी बनना चाहते हैं, उन्हें भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया जाता है.
इस पहल को जेल प्रशासन कैदियों के सुधार और सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में एक कदम मान रहा है.
किरण बेदी की संस्था की पहल से शुरू हुआ रेडियो रूम
मेरठ जेल के वरिष्ठ अधीक्षक विनेश राज शर्मा के अनुसार, कारागार में रेडियो रूम बनाने की पहल रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी किरण बेदी से जुड़ी संस्था इंडिया विजन फाउंडेशन की पहल के तहत की गई. इसका उद्देश्य कैदियों को उनकी पसंद के संगीत और सकारात्मक कार्यक्रमों से जोड़ना है. जेल प्रशासन के मुताबिक रेडियो का नियमित संचालन किया जा रहा है.
कैदियों को अपनी पसंद के गाने सुनने के लिए पहले से फरमाइश देने की सुविधा दी गई है. इसके लिए उन्हें एक दिन पहले पर्ची के जरिए अपनी पसंद का गाना बताना होता है.
पुराने और 90 के दशक के गानों की ज्यादा मांग
जेल प्रशासन के मुताबिक, ज्यादातर बंदियों की उम्र करीब 30 साल के आसपास है. ऐसे में रेडियो पर पुराने फिल्मी गाने और 90 के दशक के गीत काफी पसंद किए जा रहे हैं.
कुछ बंदी रोमांटिक गानों की फरमाइश करते हैं तो कुछ दर्द और जुदाई वाले गीत सुनना पसंद करते हैं. इसके अलावा प्रेरणादायक कार्यक्रम भी रेडियो पर प्रसारित किए जाते हैं.
इस तरह रेडियो सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि जेल के भीतर सकारात्मक गतिविधि को बढ़ावा देने का एक प्रयास भी है.
मुस्कान ने मांगे पुराने गाने, साहिल ने भेजी प्रेम गीतों की फरमाइश
मेरठ जेल में चर्चित मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल के बंद होने की वजह से रेडियो पर उनकी गानों की फरमाइश भी चर्चा में है. जेल अधीक्षक के मुताबिक, मुस्कान की ओर से पुराने गाने सुनने की फरमाइश की गई है, जबकि साहिल ने प्रेम गीतों की फरमाइश भेजी है. हालांकि, जेल में किसी बंदी की गानों की पसंद को लेकर प्रशासन का कहना है कि सभी कैदियों को समान रूप से रेडियो की सुविधा दी जाती है. किसी एक कैदी के लिए अलग व्यवस्था नहीं की गई है.
‘रेडियो परवाज़’ की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ गाने सुनने की सुविधा ही नहीं है. अगर कोई बंदी रेडियो जॉकी यानी RJ बनना चाहता है तो वह भी कार्यक्रम का हिस्सा बन सकता है. इससे कैदियों को अपनी बोलने की क्षमता और रचनात्मक प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है. जेल प्रशासन का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां बंदियों को सकारात्मक तरीके से व्यस्त रखने में मदद कर सकती हैं.
सभी बैरकों में लगाए गए स्पीकर
रेडियो कार्यक्रम को जेल के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए बड़े स्पीकर लगाए गए हैं. एक कंट्रोल रूम के माध्यम से रेडियो कार्यक्रम का संचालन किया जाता है. इस व्यवस्था के जरिए कैदी अपनी बैरक में रहते हुए कार्यक्रम और गाने सुन सकते हैं. जेल प्रशासन के अनुसार, रेडियो के माध्यम से संगीत के अलावा प्रेरणादायक और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम भी प्रसारित किए जाते हैं.
जेल प्रशासन ने क्या बताया?
वरिष्ठ जेल अधीक्षक विनेश राज शर्मा के मुताबिक, रेडियो की वजह से कैदियों के बीच सकारात्मक माहौल बनाने में मदद मिली है. प्रशासन का दावा है कि संगीत सुनने और रेडियो कार्यक्रमों में व्यस्त रहने से कैदियों के तनाव में कमी देखने को मिली है. साथ ही, बंदियों के बीच होने वाले छोटे-मोटे विवादों में भी कमी आने की बात कही गई है.
हालांकि, इन प्रभावों को किसी औपचारिक वैज्ञानिक अध्ययन के निष्कर्ष के रूप में नहीं, बल्कि जेल प्रशासन के अनुभव और आकलन के रूप में देखना चाहिए.
नशे के मामलों में बंद कैदियों के लिए भी मददगार
जेल में ऐसे कैदी भी हैं जो नशे से जुड़े मामलों में बंद हैं. प्रशासन के अनुसार, रेडियो कार्यक्रम उन्हें खाली समय सकारात्मक तरीके से बिताने का एक माध्यम देता है. संगीत और दूसरे कार्यक्रमों के जरिए कैदियों को व्यस्त रखना जेल के भीतर मानसिक तनाव कम करने और अनुशासन बनाए रखने में सहायक हो सकता है.
हालांकि, नशे की लत या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं के लिए केवल मनोरंजन पर्याप्त नहीं है. ऐसी परिस्थितियों में विशेषज्ञ परामर्श और उचित उपचार की जरूरत होती है.
संगीत के जरिए सुधार की कोशिश
जेल का उद्देश्य सिर्फ सजा देना ही नहीं, बल्कि कैदियों को सुधार और पुनर्वास का अवसर देना भी माना जाता है. इसी सोच के तहत दुनिया के कई हिस्सों में जेलों में शिक्षा, कौशल विकास, खेल, कला और संगीत जैसी गतिविधियां कराई जाती हैं. मेरठ जेल का ‘रेडियो परवाज़’ भी इसी दिशा में एक पहल के तौर पर देखा जा सकता है.
कैदियों को अपनी पसंद के गाने सुनने और कार्यक्रम में भाग लेने का मौका देकर जेल प्रशासन उनके भीतर रचनात्मकता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है.
Disclaimer: इस लेख में जेल प्रशासन की ओर से बताए गए दावों और उपलब्ध जानकारी को आधार बनाया गया है. किसी भी आरोपी या बंदी के संबंध में अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करती है.
