भारत की 50°C गर्मी से भी ज्यादा परेशान कर रही जर्मनी की 33°C हीट! भारतीय महिला ने वायरल वीडियो में बताया कि आखिर कम तापमान होने के बावजूद यूरोप की गर्मी क्यों लगती है ज्यादा खतरनाक।

भारत में 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक की भीषण गर्मी झेलने वाले लोग अक्सर सोचते हैं कि 30 से 35 डिग्री तापमान कोई बड़ी बात नहीं होगी। लेकिन जर्मनी में रहने वाली एक भारतीय महिला का वायरल वीडियो इस धारणा को चुनौती देता नजर आ रहा है। महिला का कहना है कि उत्तर प्रदेश की 50 डिग्री तक की गर्मी सहने के बावजूद जर्मनी की 33 डिग्री सेल्सियस गर्मी उसके लिए ज्यादा मुश्किल साबित हो रही है।
महिला का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर हजारों लोग अपनी राय दे रहे हैं।
वीडियो में क्या कहा महिला ने?
वायरल वीडियो में महिला बताती है कि वह फिलहाल जर्मनी में रहती हैं, जहां इन दिनों तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस है। उन्होंने कहा कि वह पहले उत्तर प्रदेश में रह चुकी हैं, जहां गर्मियों में तापमान कई बार 45 से 50 डिग्री तक पहुंच जाता है।
इसके बावजूद उनका कहना है कि जर्मनी की गर्मी उन्हें ज्यादा परेशान कर रही है। वीडियो में उन्होंने बताया कि तेज धूप, उमस और लगातार बनी रहने वाली गर्म हवा के कारण बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने यह वीडियो जिम से घर लौटते समय रिकॉर्ड किया।
यूरोप में हीटवेव ने बढ़ाई चिंता
महिला ने बताया कि जर्मनी में 33 डिग्री तापमान पर ही हीटवेव की चेतावनी जारी कर दी गई है। लोग गर्मी से बचने के लिए घरों में रह रहे हैं और सार्वजनिक स्थानों पर भी भीड़ कम दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि जिस जिम में वह रोज जाती हैं, वहां भी इन दिनों बहुत कम लोग पहुंच रहे हैं।
इस बीच यूरोप के कई देशों में भी रिकॉर्डतोड़ गर्मी देखने को मिल रही है। कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। लगातार पड़ रही गर्मी ने लोगों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर असर डाला है।
वैज्ञानिकों ने बताई वजह
विशेषज्ञों के अनुसार यूरोप में इस बार पड़ रही भीषण गर्मी के पीछे ‘ओमेगा ब्लॉक’ नाम का एक विशेष मौसमीय सिस्टम जिम्मेदार माना जा रहा है। इस स्थिति में गर्म हवा लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में फंसी रहती है, जिससे तापमान लगातार ऊंचा बना रहता है और हीटवेव अधिक खतरनाक हो जाती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 21 जून के बाद से यूरोप में अत्यधिक गर्मी के कारण 1300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं
महिला का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।
कई यूजर्स का कहना है कि केवल तापमान ही गर्मी की तीव्रता तय नहीं करता, बल्कि हवा में नमी (Humidity), स्थानीय मौसम, इमारतों की संरचना और जीवनशैली भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कुछ लोगों ने लिखा कि भारत और यूरोप की गर्मी की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जा सकती, क्योंकि दोनों क्षेत्रों की जलवायु पूरी तरह अलग है। वहीं कई भारतीयों ने महिला की बात का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने भी विदेशों में अपेक्षाकृत कम तापमान होने के बावजूद ज्यादा गर्मी महसूस की है।
तापमान से ज्यादा मायने रखता है मौसम का प्रभाव
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि किसी स्थान पर महसूस होने वाली गर्मी (Feels Like Temperature) केवल थर्मामीटर पर दर्ज तापमान पर निर्भर नहीं करती। हवा में नमी, तेज धूप, हवा की गति, भवनों की बनावट और स्थानीय जलवायु जैसे कई कारक शरीर पर गर्मी के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं।
यही कारण है कि कई बार 33 डिग्री तापमान भी कुछ क्षेत्रों में 45 डिग्री जैसी गर्मी का एहसास करा सकता है।
