
नई दिल्ली/मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े राजनीतिक संकट के लिए तैयार होती दिख रही है। शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के सामने पार्टी में विद्रोह की आशंका बढ़ती जा रही है। सूत्रों का दावा है कि उद्धव गुट के छह सांसदों को दिल्ली से जयपुर भेज दिया गया है। इस कदम को संभावित ‘हार्ट चेंज’ को रोकने की रणनीति माना जा रहा है, जब उन्हें समझा-बुझाकर अपने पक्ष में किया जाए, और साथ ही सांसदों के इर्द-गिर्द और मजबूती से एकजुट रखने के लिए भी।
दिल्ल़ी से जयपुर तक मुद्दा पहुंचने का कारण क्या था?
पिछले कुछ दिनों में अटकलें थीं कि शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं और लोकसभा में एक अलग समूह बनाने के लिए तैयार हैं। इन सांसदों की गतिविधियों पर ध्यान और उन्हें नियंत्रण में लाने के लिए पार्टी नेतृत्व के प्रयासों के बाद घटनाक्रम बदल गया। इसी बीच, न्यूज वायर ने दिल्ली से जयपुर तक सांसदों के तबादले की खबर दी, जिसे राजनीतिक जानकारों ने नियोजित कदम बताया।
सबसे पहली बात: दो-तिहाई बहुमत की जरूरत
शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा में 9 सांसद हैं। anti-defection law के अनुसार, किसी गुट को आधिकारिक तौर पर अलग से मान्यता तभी मिल सकती है जब उसके साथ दो-तिहाई या उससे अधिक सदस्य हों। इसलिए 9 में से 6 सांसदों का समर्थन में होना बेहद निर्णायक है। और यही वजह है कि ये छह सांसद पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की बुनियाद बन गए हैं।
उद्धव गुट की बढ़ती चिंता
उद्धव ठाकरे गुट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी अपने सांसदों को संसदीय दल की बैठक के लिए दिल्ली में रहने का निर्देश दिया था। बयान के विवरण से यह भी संकेत दिया गया था कि जो सांसद दूर रहे होंगे, उन्हें भी दंडित किया जा सकता है। लेकिन उपस्थिति वैसी नहीं रही जैसी कि जब वे बैठक के लिए गए थे, जिससे विद्रोह की और सरगर्मियाँ बढ़ीं।
शिंदे गुट के दावों को लेकर बढ़ती अटकलें
शिंदे खेमे के नेताओं का दावा है कि कई सांसद लंबे समय से नेतृत्व में बदलाव से नाखुश रहे हैं। यह भी खबरें आई हैं कि कोई सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर अलग संसदीय समूह की मांग कर सकता है। हालांकि कुछ सांसदों ने सार्वजनिक रूप से दलबदल की खबरों को कम करके बताया है, राजनीतिक परिदृश्य अभी भी अस्पष्ट बना हुआ है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ पर चर्चा
इन दिनों महाराष्ट्र की राजनीति में भी ‘ऑपरेशन टाइगर’ शब्द हर किसी की जुबान पर है। जहां विपक्षी नेता दावा कर रहे हैं कि उद्धव ठाकरे के सांसदों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है, वहीं शिंदे और भाजपा के खेमों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। भाजपा नेताओं की टिप्पणी: भाजपा नेताओं के अनुसार, यह पूरी तरह से शिवसेना के दोनों गुटों के बीच का आंतरिक मामला है।
उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा झटका?
उद्धव ठाकरे को पहले ही 2022 में एकनाथ शिंदे के बगावत करने के बाद पार्टी संगठन और चुनाव प्रतीक को लेकर बड़े राजनीतिक नुकसान झेलने पड़े थे। यदि लोकसभा के छह सांसद वास्तव में बाहर हो जाते हैं, तो यह ठाकरे गुट के लिए एक और बड़ा झटका हो सकता है। इससे संसद में उनके संख्या-बल में कमी आएगी, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी स्थिति कमजोर भी पड़ सकती है।
आगे क्या?
बाहर की दुनिया की सभी निगाहें बागी सांसदों के साथ आगे होने वाली घटनाओं पर टिकी हैं। पहले, अलग गुट के लिए शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने हेतु उसके अपने सभी 10 विधायक जुटाने पड़े थे — लेकिन क्या इस समय यह बदल जाएगा? आने वाले कुछ दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
— acharan.in
