पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है।

काबुल/इस्लामाबाद: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सीमा पार ड्रोन हमलों की खबरों ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं। इसी बीच पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन गतिविधियों और आतंकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के दावों ने नई बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और उग्रवादी संगठनों को लेकर पहले से ही तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी लगातार जारी है।
सीमा पर क्यों बढ़ा तनाव?
हाल ही में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा करते हुए हवाई हमले किए थे। पाकिस्तान का कहना था कि इन हमलों में कई उग्रवादी मारे गए, जबकि अफगान पक्ष ने नागरिक हताहतों का आरोप लगाया। इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्तों में और अधिक तनाव देखने को मिला।
ड्रोन हमलों को लेकर क्या दावे?
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध ड्रोन गतिविधियां देखी गईं और कुछ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि इन घटनाओं को लेकर दोनों देशों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए हैं और कई सूचनाओं की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
ISIS और अन्य आतंकी संगठनों पर फोकस
क्षेत्र में सक्रिय ISIS-K और अन्य उग्रवादी संगठनों को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों ही अपने-अपने स्तर पर आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा करते रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में सक्रिय आतंकी संगठनों की मौजूदगी दोनों देशों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
विश्लेषकों के अनुसार, यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पहले भी दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर चुकी हैं।
फिलहाल हालात पर दुनिया की नजर बनी हुई है। सीमा पार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के दावों के बीच यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंध एक बार फिर संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गए हैं।
