अलीगंज अग्निकांड की जांच में खुलासा हुआ है कि जिस बिल्डिंग में 15 लोगों की मौत हुई, वहां स्वीकृत सीमा से कहीं ज्यादा बिजली लोड का उपयोग किया जा रहा था।

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर जांच में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिस कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की दर्दनाक मौत हुई, वहां बिजली का लोड स्वीकृत क्षमता से काफी अधिक चल रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इमारत को केवल 20 किलोवाट (KW) बिजली लोड की मंजूरी मिली थी, लेकिन जून महीने तक इसका उपयोग 34 KVA से अधिक पहुंच गया था।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या लंबे समय से चल रही इस लापरवाही ने आग की भयावहता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
क्षमता से कहीं ज्यादा बिजली का इस्तेमाल
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, तीन मंजिला इस कमर्शियल बिल्डिंग में स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक बिजली का उपयोग किया जा रहा था। लगातार बढ़ते लोड के कारण पूरी इमारत का विद्युत सिस्टम दबाव में था।
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्धारित क्षमता से अधिक बिजली खपत के कारण वायरिंग, उपकरणों और वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
15 लोगों की गई जान
इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई थी। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। घटना के बाद पूरे शहर में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।
दमकल विभाग की टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था, लेकिन तब तक भारी जनहानि हो चुकी थी।
जांच एजेंसियों की नजर बिजली व्यवस्था पर
अब जांच का फोकस बिल्डिंग की बिजली व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या बिजली विभाग, भवन मालिक या अन्य संबंधित एजेंसियों की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि बढ़े हुए लोड की जानकारी संबंधित विभागों को थी या नहीं और यदि थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कमर्शियल बिल्डिंग में सुरक्षा मानकों पर सवाल
हादसे के बाद शहर की अन्य व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई भवनों में स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली का उपयोग किया जाता है, लेकिन नियमित निरीक्षण और निगरानी के अभाव में ऐसी अनियमितताएं लंबे समय तक जारी रहती हैं।
जिम्मेदारों पर हो सकती है कार्रवाई
प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। यदि जांच में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो भवन मालिकों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि हादसे के हर पहलू की जांच की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
हादसे से मिले सबक
लखनऊ का यह अग्निकांड एक बार फिर बता गया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी घातक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर विद्युत व्यवस्था का ऑडिट और सुरक्षा जांच ऐसे हादसों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फिलहाल जांच जारी है और पूरे मामले की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
