RBI के पास पड़े हैं 86,917 करोड़ रुपये लावारिस! SBI सबसे आगे, जानिए आपका पैसा तो नहीं फंसा?

देश के बैंकों में बड़ी रकम ऐसी है, जिस पर लंबे समय से किसी ने दावा नहीं किया है. RBI के DEA फंड में 86,917 करोड़ रुपये की लावारिस जमा राशि है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा SBI का है.
देश के बैंकिंग सिस्टम में हजारों करोड़ रुपये ऐसी जमा राशि के रूप में मौजूद हैं, जिन पर लंबे समय से किसी ग्राहक या उसके परिवार ने दावा नहीं किया है. राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, 30 जून तक RBI के Depositor Education and Awareness (DEA) Fund में करीब 86,917 करोड़ रुपये की लावारिस जमा राशि थी. इस रकम में सरकारी और निजी दोनों बैंकों का पैसा शामिल है. सरकारी बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सबसे आगे है.
SBI के 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा….
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, SBI ने DEA Fund में करीब 20,040 करोड़ रुपये की लावारिस जमा राशि ट्रांसफर की है. इसके बाद दूसरे सरकारी बैंकों में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करीब 7,585 करोड़ रुपये, केनरा बैंक के 6,830 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा के 5,848 करोड़ रुपये और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के 5,549 करोड़ रुपये शामिल हैं. इससे साफ है कि लंबे समय से निष्क्रिय खातों और जमा योजनाओं में बड़ी रकम पड़ी हुई है, जिसका असली हकदार अभी तक सामने नहीं आया है.
प्राइवेट बैंकों में ICICI सबसे आगे….
निजी बैंकों की बात करें तो ICICI Bank के पास सबसे ज्यादा लावारिस जमा राशि बताई गई है. बैंक की करीब 2,278 करोड़ रुपये की रकम DEA Fund में ट्रांसफर की गई है. इसके बाद HDFC Bank के करीब 1,912 करोड़ रुपये और Axis Bank के लगभग 1,734 करोड़ रुपये इस फंड में शामिल हैं.
कब पैसा लावारिस माना जाता है….?
सिर्फ बैंक अकाउंट में कुछ समय तक लेन-देन नहीं होने से पैसा तुरंत लावारिस नहीं हो जाता. नियमों के मुताबिक, अगर सेविंग या करंट अकाउंट में 10 साल तक कोई लेन-देन नहीं होता, तो उसमें जमा रकम अनक्लेम्ड डिपॉजिट की श्रेणी में आ सकती है. इसी तरह, अगर किसी टर्म डिपॉजिट की मैच्योरिटी के बाद 10 साल तक उस पर कोई दावा नहीं किया जाता, तो उसे भी लावारिस जमा राशि माना जा सकता है. इसके बाद बैंक निर्धारित प्रक्रिया के तहत यह रकम RBI के Depositor Education and Awareness Fund में ट्रांसफर करते हैं.
क्या लावारिस पैसा वापस मिल सकता है….?
हां, लावारिस जमा राशि का मतलब यह नहीं है कि ग्राहक या उसके कानूनी वारिस हमेशा के लिए उस पैसे से अपना अधिकार खो देते हैं. अगर बाद में खाताधारक या उसका कानूनी वारिस सही दस्तावेजों के साथ दावा करता है, तो बैंक के जरिए रकम वापस लेने की प्रक्रिया की जा सकती है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 30 जून तक ऐसे दावों के भुगतान के लिए DEA Fund से बैंकों को करीब 17,415 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके थे.
सरकार और RBI चला रहे हैं जागरूकता अभियान….
लावारिस जमा की बढ़ती रकम को कम करने के लिए RBI और बैंक समय-समय पर विशेष अभियान भी चलाते हैं. बैंकों को ग्राहकों, नॉमिनी और कानूनी वारिसों तक पहुंचने तथा अनक्लेम्ड डिपॉजिट की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाने को कहा गया है. अगर आपके परिवार में किसी सदस्य का पुराना बैंक अकाउंट, FD या दूसरी जमा राशि है, जिसका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है, तो उसके बारे में बैंक से जानकारी लेना फायदेमंद हो सकता है.
नोट: लावारिस जमा राशि को लेकर किसी भी दावे से पहले बैंक की आधिकारिक प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी जरूर लें.
