🍬 त्योहारी सीजन से पहले चीनी को लेकर राहत की खबर! घरेलू बाजार में 2.5 लाख टन चीनी उतारने की तैयारी, बढ़ी सप्लाई से दाम घटने की उम्मीद। क्या अब आम लोगों को मिलेगी राहत?

त्योहारी सीजन से पहले आम लोगों के लिए राहत की खबर, बाजार में बढ़ी कीमतों पर लगाम लगाने की तैयारी
त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मिठाई और दूसरे खाद्य पदार्थों में चीनी की खपत बढ़ने के कारण आने वाले दिनों में इसकी मांग और बढ़ सकती है। ऐसे में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार और चीनी उद्योग की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय शुगर रिफाइनरियां घरेलू बाजार में करीब 2.5 लाख टन रिफाइंड चीनी बेचने की तैयारी कर रही हैं। उम्मीद है कि बाजार में अतिरिक्त स्टॉक आने से कीमतों पर दबाव कम होगा और उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है।
क्यों लिया गया चीनी बेचने का फैसला…..?
श्री रेणुका शुगर्स के एमडी और सीईओ सुशील कुमार के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियां घरेलू बाजार में लगभग ढाई लाख टन चीनी उतारने की योजना बना रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है। खासतौर पर त्योहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खुदरा कीमतों में पहले ही आई है कुछ गिरावट…..
चीनी के दामों में हाल के दिनों में कुछ नरमी देखने को मिली है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव 65.08 रुपये प्रति किलो से घटकर 62.57 रुपये प्रति किलो रह गया था। खुदरा बाजार में आई यह गिरावट थोक और मिल स्तर पर हुई कीमतों में कमी के मुकाबले काफी कम है।
थोक और मिल स्तर पर बड़ी गिरावट…..
रिपोर्ट के अनुसार, चीनी के थोक भाव में करीब 17 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट आई है। वहीं मिल स्तर यानी एक्स-मिल कीमतों में भी लगभग 17 से 20 रुपये प्रति किलो की कमी देखने को मिली है। इसके बावजूद आम ग्राहक को दुकानों पर इसका पूरा फायदा नहीं मिल रहा है। कई जगह खुदरा कीमतों में सिर्फ 2 से 3 रुपये प्रति किलो की कमी दिखाई दे रही है।
आम लोगों को कब मिल सकती है राहत…..?
अब नजर इस बात पर है कि रिफाइनरियों द्वारा घरेलू बाजार में 2.5 लाख टन चीनी उतारने के बाद खुदरा कीमतों पर कितना असर पड़ता है। अगर बाजार में पर्याप्त मात्रा में स्टॉक पहुंचता है और सप्लाई बढ़ती है, तो आने वाले दिनों में चीनी के दामों में और नरमी देखने को मिल सकती है। इससे त्योहारी सीजन में मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की लागत पर भी कुछ दबाव कम होने की उम्मीद है। फिलहाल सरकार और चीनी उद्योग की कोशिश यही है कि बढ़ी हुई मांग के बावजूद बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और उपभोक्ताओं को अनावश्यक महंगाई का सामना न करना पड़े।
त्योहारी सीजन में बढ़ेगी मांग…..
त्योहारों के दौरान घरों में मिठाइयां और कई तरह के पकवान बनाने के कारण चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे समय में अगर सप्लाई पर्याप्त रही तो कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिल सकती है। अब 2.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इसका फायदा सीधे आम ग्राहक की जेब तक पहुंच पाएगा……?
