बंगाल में मिड-डे मील को लेकर सियासत तेज! अंडों को हटाने की खबरों पर TMC ने भाजपा पर साधा निशाना। डेरेक ओ'ब्रायन ने आरोप लगाया कि बच्चों पर "शाकाहार थोपने" की कोशिश की जा रही है।

पश्चिम बंगाल में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भाजपा पर राज्य के बच्चों को पोषण से वंचित करने और उन पर शाकाहार थोपने का आरोप लगाया है। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब नई भाजपा सरकार के पहले बजट के दौरान मिड-डे मील योजना में इस्कॉन (ISKCON) के सहयोग की बात सामने आई।
सोमवार को पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने राज्य विधानसभा में भाजपा सरकार का पहला बजट पेश किया। बजट भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना के तहत भोजन तैयार करने और उसके वितरण में इस्कॉन से सहयोग मिलने की उम्मीद है। इसके बाद मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस्कॉन द्वारा प्रस्तावित मेन्यू में अंडों के स्थान पर शाकाहारी प्रोटीन स्रोतों को शामिल किया जा सकता है।
इसी मुद्दे को लेकर बुधवार (24 जून) को टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, “चुनाव प्रचार के दौरान मछली खाने को लेकर हुए तमाशे के बाद अब गुजरात जिमखाना का असली चेहरा सामने आ गया है। बंगाल में नई भाजपा सरकार काम पर लग गई है।”
‘बच्चों के पोषण से समझौता नहीं’
डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की खाद्य संस्कृति और पोषण संबंधी जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंडा राज्य के लाखों स्कूली बच्चों के लिए प्रोटीन का सस्ता और प्रभावी स्रोत है। ऐसे में यदि इसे मिड-डे मील से हटाया जाता है तो बच्चों के पोषण पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
टीएमसी नेताओं का कहना है कि बंगाल में लंबे समय से मिड-डे मील में अंडा शामिल किया जाता रहा है और इससे बच्चों में कुपोषण की समस्या को कम करने में मदद मिली है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा वैचारिक आधार पर भोजन की आदतों में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है।
भाजपा और इस्कॉन की ओर से अभी स्पष्ट बयान नहीं
हालांकि भाजपा सरकार या इस्कॉन की ओर से अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि मिड-डे मील योजना से अंडों को पूरी तरह हटाया जाएगा। सरकार का कहना है कि बच्चों को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है और किसी भी बदलाव का उद्देश्य पोषण स्तर को बेहतर बनाना होगा।
बंगाल की राजनीति में भोजन बना बड़ा मुद्दा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में भोजन और खानपान का मुद्दा पहले भी कई बार चर्चा में रहा है। चुनावों के दौरान मछली, मांस और अंडे जैसे खाद्य पदार्थों को लेकर बयानबाजी होती रही है। टीएमसी लगातार भाजपा पर बंगाल की सांस्कृतिक और खाद्य परंपराओं में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाती रही है, जबकि भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक बताती है।
अब मिड-डे मील में अंडे को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। विपक्ष इसे बच्चों के पोषण और बंगाल की पहचान से जोड़कर देख रहा है, जबकि सरकार का दावा है कि उसका हर फैसला छात्रों के हित में होगा।
मध्याह्न भोजन योजना में संभावित बदलाव को लेकर पश्चिम बंगाल में सियासी माहौल गर्म हो गया है। अंडे को हटाने की खबरों ने पोषण, संस्कृति और राजनीति को एक साथ बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में सरकार की आधिकारिक नीति सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मिड-डे मील योजना में वास्तव में क्या बदलाव किए जाएंगे और इसका बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
