
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की बहुपक्षीय और द्विपक्षीय यात्रा पर रवाना हुए। इस दौरे में नवाचार, निवेश, व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक सहयोग प्रमुख एजेंडा रहेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि अगले कुछ दिनों में वह फ्रांस और स्लोवाकिया में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, द्विपक्षीय बैठकों, बहुपक्षीय चर्चाओं और भारतीय समुदाय के लोगों से संवाद में हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता दोनों देशों के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना होगी।
फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री मोदी ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम में शामिल होंगे, जहां फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद रहेंगे। यह कार्यक्रम भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष के तहत आयोजित किया जा रहा है और इसमें स्टार्टअप्स, इनोवेटर्स, निवेशक तथा वेंचर कैपिटल फंड्स हिस्सा लेंगे।
नीस में पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी होगी, जिसमें दोनों देश भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह पहल दोनों देशों के बीच नवाचार और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने का काम करेगी।
फ्रांस यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी 14 से 16 जून तक स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा करेंगे। यह यात्रा ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी।
स्लोवाकिया में पीएम मोदी प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऑटोमोबाइल विनिर्माण और रेलवे अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना है।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी 16-17 जून को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के दौरान वह जी7 देशों, साझेदार देशों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के साथ अहम बैठकों में शामिल होंगे।
यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 18 जून को पेरिस पहुंचेंगे, जहां वह यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप कार्यक्रम ‘विवाटेक’ (VivaTech) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। साथ ही, पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करने का भी कार्यक्रम प्रस्तावित है।
यह दौरा भारत के यूरोपीय देशों के साथ रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
